फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Lakhs of fish died in the polluted water of drain, officials of five departments including PCB investigated

Farrukhabad: नाले के प्रदूषित पानी में मर गईं लाखों मछलियां, पीसीबी समेत पांच विभागों के अफसरों ने की जांच

Sat, 19 Oct 2024 10:38 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 19 Oct 2024 10:38 PM IST
सार

फर्रूखाबाद जिले में गंगा के भैरों घाट पर नाले के प्रदूषित पानी में लाखों मछलियां मर गईं। जानकारी पर पहुंचे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत पांच विभागों के अफसरों ने जांच की और नमूने एकत्र किए।

विज्ञापन
Lakhs of fish died in the polluted water of drain, officials of five departments including PCB investigated
प्रदूषित पानी में लाखों मछलियां मरने का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर से सटे भैरों घाट पर नाले के पानी में गंगा के मुहाने पर लाखों मछलियों के मरने की जांच शुरू हो गई है। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता के साथ उठाया था। शनिवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत पांच विभागों के अफसरों की टीम मौके पर पहुंची। तीन स्थानों से पानी के नमूने लिए गए। हालांकि पानी की आपूर्ति के वक्त नाले के पानी का बहाव तेज होने पर अधिकांश मछलियां गंगा में बह गईं। फिर भी बड़ी संख्या में मरी मछलियां दिखाई दीं।
विज्ञापन



प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के सहायक पर्यावरण अभियंता फरेश कुमार, साइंटिस्ट असिस्टेंट योगेंद्र द्विवेदी, अनु सहायक संजीव मिश्रा, योगेंद्र कुमार, गंगा प्रदूषण कंट्रोल यूनिट के सहायक परियोजना अभियंता सौरभ शुक्ला, प्रभारी डीसी दीक्षित, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार, मत्स्य विभाग के नारद राणा, नमामि गंगे की निहारिका पटेल की टीम नमामि गंगे घाट पहुंची। यहां से अधिकारी घाट के किनारे जल का निरीक्षण करते हुए भैरोंघाट पहुंचे। पर्यावरण विभाग की एक टीम ने अफसरों संग नाले का निरीक्षण किया, जबकि दूसरी टीम ने तीन स्थानों से नाले के पानी के नमूने लिए।
विज्ञापन

इसके बाद अधिकारी मोटरबोट से नमामि गंगे घाट होकर नगर पालिका में ईओ को दफ्तर पहुंचे। वहां शाम तक निरीक्षण आख्या तैयार की जाती रही। सहायक पर्यावरण अभियंता फरेश कुमार ने बताया कि गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही नाले के पानी का बहाव ठहर गया। मछली मरने का कारण क्या रहा, इसका पता लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। प्रदूषित जल भी मरने का कारण हो सकता है।

फिलहाल कुछ स्पष्ट कहना जल्दबाजी होगी। वहीं जलापूर्ति के वक्त नाले के पानी का तेज बहाव होने के कारण बड़ी संख्या में मछलियां गंगा की धारा में बह गईं। हालांकि हजारों मछलियां अभी भी किनारों पर पड़ी दिख रही हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में पक्षी मछलियों को भोजन बनाते दिख रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed