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गुजरात बवाल में मजदूर की हत्या का आरोप, 'पैराें में जूते नहीं, कान के ऊपर थे चोट के निशान'
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 14 Oct 2018 08:08 PM IST
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अहमदाबाद में मजदूरी करने गए युपी के हमीरपुर जिला निवासी एक युवक का शव पिछले सप्ताह रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला था। पुलिस के प्रयास से उसकी शिनाख्त अहमदाबाद में ही रह रहे उसके भांजे ने की और पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इस घटना के बाद गांव आए परिजनों ने गुजरात में हुए बवाल के दौरान युवक की हत्या कर शव रेलवे ट्रैक पर फेंकने का आरोप लगाया है।
जिले के ज्यादातर युवा मजदूरी की तलाश में गुजरात में हैं। गुजरात में हुए बवाल के बाद कुछ लौट भी आए हैं। उन्हीं में एक चिकासी थाना क्षेत्र के बंगरा गांव निवासी रामजीवन कुशवाहा (38) भी अपनी पत्नी संगीता और चार वर्षीय बच्चे के साथ अहमदाबाद में मजदूरी करता था। आठ अक्तूबर की शाम उसका शव अहमदाबाद के रेलवे ट्रैक पर मिला था। अहमदाबाद में ही मजदूरी करने वाले गोहांड निवासी रामजीवन के भांजे हेमंत ने बताया कि पुलिस ने उसके जेब में पड़ी डायरी के आधार पर एक रिश्तेदार वंदना को फोन किया तब वंदना ने पुलिस को उसका नंबर दिया। इस बीच पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
जानकारी होने पर उसने पोस्टमार्टम पर शव की शिनाख्त की। पुलिस के अनुसार रामजीवन के जेब में केवल दस रुपये ही मिले थे। पैराें में जूते नहीं थे, कान के ऊपर चोट के निशान थे। शव उसके आवास से दो किमी दूर मिला था। उसने घटना की जानकारी रामजीवन के गांव में देने के बाद शव का वहीं अंतिम संस्कार कर दिया। रामजीवन के भांजे हेमंत और उसके ममेरे भाई दिनेश ने बताया वह इकलौता पुत्र था। उसके माता-पिता वृद्ध और मानसिक रूप से कमजोर हैं। दोनों ने गुजरात बवाल में रामजीवन की हत्या का आरोप लगाया है।
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जिले के ज्यादातर युवा मजदूरी की तलाश में गुजरात में हैं। गुजरात में हुए बवाल के बाद कुछ लौट भी आए हैं। उन्हीं में एक चिकासी थाना क्षेत्र के बंगरा गांव निवासी रामजीवन कुशवाहा (38) भी अपनी पत्नी संगीता और चार वर्षीय बच्चे के साथ अहमदाबाद में मजदूरी करता था। आठ अक्तूबर की शाम उसका शव अहमदाबाद के रेलवे ट्रैक पर मिला था। अहमदाबाद में ही मजदूरी करने वाले गोहांड निवासी रामजीवन के भांजे हेमंत ने बताया कि पुलिस ने उसके जेब में पड़ी डायरी के आधार पर एक रिश्तेदार वंदना को फोन किया तब वंदना ने पुलिस को उसका नंबर दिया। इस बीच पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
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जानकारी होने पर उसने पोस्टमार्टम पर शव की शिनाख्त की। पुलिस के अनुसार रामजीवन के जेब में केवल दस रुपये ही मिले थे। पैराें में जूते नहीं थे, कान के ऊपर चोट के निशान थे। शव उसके आवास से दो किमी दूर मिला था। उसने घटना की जानकारी रामजीवन के गांव में देने के बाद शव का वहीं अंतिम संस्कार कर दिया। रामजीवन के भांजे हेमंत और उसके ममेरे भाई दिनेश ने बताया वह इकलौता पुत्र था। उसके माता-पिता वृद्ध और मानसिक रूप से कमजोर हैं। दोनों ने गुजरात बवाल में रामजीवन की हत्या का आरोप लगाया है।
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