फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kushagra Murder Case: Prosecution Demands Death Penalty, Defense Pleads for Leniency

कुशाग्र हत्याकांड: अभियोजन ने मांगी फांसी, बचाव पक्ष लगाता रहा रहम की गुहार, डेढ़ घंटे चली कोर्ट की कार्यवाही

Thu, 22 Jan 2026 11:40 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 22 Jan 2026 11:40 PM IST
सार

अभियोजन ने कहा कि गुरु-शिष्य संबंधों का कत्ल हुआ, गंभीर मानसिकता से अपराध किया गया। वहीं बचाव पक्ष का तर्क रखा कि दोषियों की उम्र कम है और आपराधिक इतिहास भी नहीं है इसलिए सुधार की गुंजाइश है।

विज्ञापन
Kushagra Murder Case: Prosecution Demands Death Penalty, Defense Pleads for Leniency
कुशाग्र हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुशाग्र की सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन ने दोषियों द्वारा गुरु-शिष्य संबंधों का कत्ल करने, शव के टुकड़े कर फेंकने की योजना जैसी आपराधिक मानसिकता और मृत्युदंड पर सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए तीनों दोषियों के लिए फांसी मांगी। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने तीनों की कम उम्र, आपराधिक इतिहास न होने और गरीबी का हवाला देते हुए सजा में रहम बरतने की गुहार लगाई।
विज्ञापन


डीजीसी दिलीप अवस्थी व एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने तर्क रखा कि रचिता और कुशाग्र के बीच गुरु-शिष्य का संबंध था। हत्या ने गुरु-शिष्य परंपरा को कलंकित किया। गुरु को मां-बाप से बढ़कर दर्जा दिया जाता है लेकिन इस तरह की घटनाओं से लोगों का विश्वास टूटा है। ऐसे जघन्य अपराध के लिए फांसी से कम कोई सजा नहीं दी जानी चाहिए। कुशाग्र की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता कमलेश पाठक व चिन्मय पाठक ने तर्क रखा कि हत्यारों का उद्देश्य सिर्फ रुपयों के लिए कुशाग्र का अपहरण करना ही नहीं था बल्कि उनकी मानसिकता गंभीर अपराध करने की थी। पुलिस ने जो चापड़ व पन्नी आदि सामान बरामद किए, उससे साफ है कि हत्यारे कुशाग्र के शव को टुकड़ों में काटकर फेंकने की योजना बना चुके थे। गंभीर मानसिकता के साथ किए गए अपराध के लिए फांसी ही उचित सजा होगी। चिन्मय की ओर से बचन सिंह, मच्छी सिंह व बसंत संपत दुपारे के मुकदमों में सुप्रीम कोर्ट की ओर से मृत्युदंड की परिस्थतियों के संबंध में दिए गए तर्कों को बताया गया। कहा कि विरलतम अपराध की श्रेणी में सिर्फ शरीर को काटना या जलाना ही वीभत्सता नहीं है बल्कि इसके कई और पैमाने भी हैं। कुशाग्र की हत्या संबंधों और विश्वास की हत्या है। अपराधी फांसी के ही हकदार हैं।
विज्ञापन


अभियोजन के तर्कों का जवाब देते हुए रचिता के अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी ने रचिता के मां-बाप की मौत के कारण बेसहारा होने, रचिता की कम उम्र और महिला होने का तर्क देते हुए सजा में रहम की अपील की। प्रभात के अधिवक्ता ओम नारायण द्विवेदी ने कहा कि प्रभात नवयुवक है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कानून में सजा के बजाय सुधार पर बल दिया गया है। जान के बदले जान को हमारे कानून में मान्यता नहीं है इसलिए प्रभात को सुधरने का मौका देते हुए सजा में नरमी बरती जाए। शिवा के अधिवक्ता मनीष शर्मा ने कहा कि शिवा के पिता पैरालाइज्ड हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं है। उसका अपराध सिर्फ फिरौती के पत्र देने तक का ही है। उसका हत्या से कोई लेना-देना नहीं था इसलिए उसे कम से कम सजा दी जाए। सभी को सुनने के बाद कोर्ट ने सजा पर फैसला सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
Trending Videos

Kushagra Murder Case: Prosecution Demands Death Penalty, Defense Pleads for Leniency
कुशाग्र की मां को ढांढस बंधाते पिता मनीष कनोडिया - फोटो : amar ujala
डेढ़ घंटे चली कोर्ट की कार्यवाही, दोषियों ने मांगी रहम की भीख
कोर्ट रूम में एक ओर कुशाग्र के मां-बाप, चाचा-बाबा व अन्य परिजन थे वहीं, दूसरी ओर कटघरे में रचिता, प्रभात और शिवा मौजूद थे। वकीलों से खचाखच भरी कोर्ट और बाहर मीडियाकर्मियों का जमावड़ा था। कुछ ऐसे ही माहौल में गुरुवार को कोर्ट ने कुशाग्र हत्याकांड पर फैसला सुनाया। कोर्ट की पूरी कार्यवाही में लगभग डेढ़ घंटे लगे।

अभियोजन और बचाव पक्ष सुबह कोर्ट पहुंचा तो न्यायाधीश ने सजा पर सुनवाई के लिए दोपहर दो बजे का समय दिया। दोपहर दो बजे दोषियों को कटघरे में लाया गया और कुशाग्र के मां-बाप समेत अन्य परिजन भी पहुंचे। अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के साथ-साथ सजा सुनने की उत्सुकता लिए अधिवक्ताओं की भीड़ भी कोर्ट में मौजूद रही। माहौल तब गमगीन हो गया जब कुशाग्र के माता-पिता और चाचा ने अपना दर्द बयां किया। कटघरे में खड़े हत्यारों से उनका पक्ष जाना गया तो रचिता, प्रभात और शिवा पछतावे के साथ कोर्ट से रहम की भीख मांगने लगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश सजा पर फैसला लिखने के लिए चले गए और लगभग सवा तीन बजे वापस लौटकर फैसला सुनाया। पूरी कार्यवाही में डेढ़ घंटे का वक्त लगा। इस दौरान पीडि़तों और हत्यारों दोनों के लिए एक-एक पल काटना भारी था।





 

Kushagra Murder Case: Prosecution Demands Death Penalty, Defense Pleads for Leniency
फैसला आने के बाद रोती कुशाग्र की मां - फोटो : amar ujala
जिसे बेटी माना उसने ही छीन लिया जिगर का टुकड़ा
सुनवाई के दौरान कुशाग्र की मां सोनिया ने कहा कि उन्होंने रचिता को शिक्षिका नहीं बेटी माना था। उसके पिता की मौत पर खुद खाना लेकर पहुंची और आर्थिक मदद भी की लेकिन उसने मेरे ही जिगर के टुकड़े को छीन लिया। जिस तरह हत्यारों ने मेरे बेटे का गला घोंटा, जान बचाने के लिए जैसे वह छटपटाया और तड़पा होगा उसी तरह इन्हें भी फांसी की सजा मिले तभी इन्हें उसकी तड़प का अहसास होगा। पिता मनीष ने कहा कि इनकी उम्र को कम नहीं आंका जा सकता। सोची-समझी साजिश के तहत बेटे की हत्या की गई। चाचा सुमित बोले कि हत्यारे कोर्ट में भी बार-बार झूठ बोलते रहे। उस दिन अगर थोड़ी देर और हो जाती तो शायद भतीजे का शव तक नहीं देख पाते।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed