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Kanpur Violence: सप्ताह भर में रची गई थी साजिश, हयात और पुलिस कनेक्शन की तलाश
Wed, 08 Jun 2022 11:15 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 08 Jun 2022 11:15 PM IST
सार
हयात व उसके साथ साजिश में शामिल रहे जावेद, राहिल व सूफियान को पुलिस ने रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। दस दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। बुधवार को कोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।
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Kanpur Violence
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में बाजार बंदी के नाम पर बवाल कराने की साजिश एक सप्ताह तक रची गई। उसके बाद अंजाम दिया गया। एसआईटी की शुरुआती जांच में यह तथ्य समाने आया है। वहीं दूसरी तरफ यह भी सामने आ रहा है कि कई पुलिसकर्मी हयात के करीबी रहे हैं। क्या हयात का किसी तरह का लाभ उनके जरिये मिला है।
नूपुर शर्मा ने 26 मई को विवादित बयान दिया था। बवाल तीन जून को हुआ। सूत्रों के मुताबिक बयान की जानकारी होने के तुरंत बाद से हयात एंड कंपनी ने बाजार बंदी की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। बवाल वाले दिन हयात की कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत हुई थी। अब जांच में यह देखा जाएगा कि बातचीत क्यों हुई। यह भी हो सकता है कि संबंधित क्षेत्र के पुलिसकर्मियों ने उससे संपर्क कर बंदी को स्थगित करने की बात कही हो। अगर यह कारण नहीं निकला तो विस्तृत जांच की जाएगी।
रिमांड अर्जी पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
हयात व उसके साथ साजिश में शामिल रहे जावेद, राहिल व सूफियान को पुलिस ने रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। दस दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। बुधवार को कोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। गुरुवार को इस पर फैसला सुनाया जाएगा।
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नूपुर शर्मा ने 26 मई को विवादित बयान दिया था। बवाल तीन जून को हुआ। सूत्रों के मुताबिक बयान की जानकारी होने के तुरंत बाद से हयात एंड कंपनी ने बाजार बंदी की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। बवाल वाले दिन हयात की कुछ पुलिसकर्मियों से बातचीत हुई थी। अब जांच में यह देखा जाएगा कि बातचीत क्यों हुई। यह भी हो सकता है कि संबंधित क्षेत्र के पुलिसकर्मियों ने उससे संपर्क कर बंदी को स्थगित करने की बात कही हो। अगर यह कारण नहीं निकला तो विस्तृत जांच की जाएगी।
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रिमांड अर्जी पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
हयात व उसके साथ साजिश में शामिल रहे जावेद, राहिल व सूफियान को पुलिस ने रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। दस दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। बुधवार को कोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। गुरुवार को इस पर फैसला सुनाया जाएगा।
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सपा विधायक बोले, पुख्ता साक्ष्यों पर ही की जाए गिरफ्तारी
जुमे के दिन हुए उपद्रव को लेकर सपा विधायकों ने पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीना से मुलाकात की। विधायकों ने कहा कि इस मामले में बेगुनाहों को भी पकड़ा जा रहा है। गिरफ्तारी के नाम पर लोगों से वसूली की जा रही है। किसी को तभी पकड़ा जाए जब उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य मिल जाएं। इसके अलावा पुलिस ने जिन बेगुनाहों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है उन्हें छोड़ा जाए।
विधायक ने पुलिस कमिश्नर को सात लोगों की बेगुनाही के संबंध में सबूत भी दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पुलिस कमिश्नर को दिया। यह भी मांग की गई कि प्रकरण की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में की जाए।
आर्यनगर विधायक अमिताभ वाजपेयी, सीसामऊ विधायक हाजी इरफान सोलंकी और कैंट विधायक हाजी मो. हसन रूमी बुधवार दोपहर पुलिस कमिश्नर से मिले। उन्होंने कहा कि कोई भी हिंसा के पक्ष में नहीं होता और न ही दोषियों को छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन प्रकरण के नाम पर बेगुनाहों का भी उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। इस पर पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ज्वाइंट कमिश्नर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साक्ष्य मिलने पर ही दोषी को गिरफ्तार किया जाएगा।
जुमे के दिन हुए उपद्रव को लेकर सपा विधायकों ने पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीना से मुलाकात की। विधायकों ने कहा कि इस मामले में बेगुनाहों को भी पकड़ा जा रहा है। गिरफ्तारी के नाम पर लोगों से वसूली की जा रही है। किसी को तभी पकड़ा जाए जब उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य मिल जाएं। इसके अलावा पुलिस ने जिन बेगुनाहों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है उन्हें छोड़ा जाए।
विधायक ने पुलिस कमिश्नर को सात लोगों की बेगुनाही के संबंध में सबूत भी दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पुलिस कमिश्नर को दिया। यह भी मांग की गई कि प्रकरण की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में की जाए।
आर्यनगर विधायक अमिताभ वाजपेयी, सीसामऊ विधायक हाजी इरफान सोलंकी और कैंट विधायक हाजी मो. हसन रूमी बुधवार दोपहर पुलिस कमिश्नर से मिले। उन्होंने कहा कि कोई भी हिंसा के पक्ष में नहीं होता और न ही दोषियों को छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन प्रकरण के नाम पर बेगुनाहों का भी उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। इस पर पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ज्वाइंट कमिश्नर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साक्ष्य मिलने पर ही दोषी को गिरफ्तार किया जाएगा।