Kanpur: हार्ट अटैक से तीन और ब्रेन अटैक से दो रोगियों की मौत, सांस के मरीजों की दिक्कत बढ़ी
ठंड के कारण ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक के रोगी बढ़ गए हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेज विभाग प्रमुख डॉ. मनीष सिंह का कहना है कि ब्रेन अटैक के 40 फीसदी रोगी घर पर या अस्पताल लाते वक्त दम तोड़ देते हैं। 60 फीसदी अस्पताल पहुंचते हैं, उनमें भी 10 फीसदी नहीं बच पाते।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जाड़े में ब्रेन अटैक के रोगी चार गुना और हार्ट अटैक के तीन गुना बढ़ गए हैं। अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने और ठंड लगने की वजह से रोगियों की मौत हो जा रही है। मंगलवार को हार्ट अटैक से तीन और ब्रेन अटैक के दो रोगियों की मौत हुई है। हैलट में ब्रेन अटैक के 23 रोगी भर्ती हैं। इसी तरह कार्डियोलॉजी के आईसीयू, एचडीयू और वार्ड फुल हो गए हैं।
इसके अलावा सांस रोगियों की दिक्कत बढ़ रही है। किदवईनगर के रहने वाले राजा वर्मा (55) और बाबूुपुरवा के रूपेश (49) की ब्रेन अटैक से मौत हो गई। परिजन उन्हें लेकर क्षेत्र के अस्पताल ले गए लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। राजा वर्मा के छोटे भाई किशोर और रुपेश के परिजनों ने बताया कि दोनों का इलाज ओपीडी स्तर पर हैलट में चल रहा था।
रोगियों को अचानक चक्कर आया और बेहोश हो गए। इसके बाद सांस थम गई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेज विभाग प्रमुख डॉ. मनीष सिंह का कहना है कि ब्रेन अटैक के 40 फीसदी रोगी घर पर या अस्पताल लाते वक्त खत्म हो जाते हैं। 60 फीसदी ही अस्पताल पहुंचते हैं, उनमें भी 10 फीसदी नहीं बच पाते।
इसी तरह हार्ट अटैक से चौबेपुर के विनय (55), नवाबगंज के आशुतोष नारायण (61) और गीतेश कु मार (54) की मौत हुई है। रोगियों का पहले से इलाज चल रहा था। आशुतोष के परिजनों ने बताया कि दो साल पहले रोगी को स्टेंट पड़ा था। ठंड बढ़ने के बाद कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी में रोगियों की संख्या प्रतिदिन औसत 35 हो गई है। कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. विनय कृष्णा ने बताया कि ठंड में हार्ट अटैक के रोगी बढ़ जाते हैं। जो रोगी अस्पताल पहुंच जाते हैं, उन्हें बचा लिया जाता है।
ऐसे करें बचाव
- ब्लड प्रेशर की बराबर जांच करते रहें।
- ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखें।
- गर्म कमरे से अचानक ठंड में न आएं।
- रात को हल्का और पौष्टिक खाना लें।
- गरिष्ठ भोजन न लें, देर रात की पार्टियों से बचें।