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कानपुर: एक नवंबर से खुलेगा सरैया आरओबी, सफर को लगेंगे पंख, पुल पर पांच मोड़, 30-40 किमी रहेगी गति
Thu, 22 Oct 2026 10:13 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 22 Oct 2026 10:13 PM IST
सार
रेलवे का कार्य पूरा हो गया है। अब डामरीकरण कराया जा रहा। पांच दिन में काम पूरा होने की संभावना है।
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सरैया आरओबी पर हो रहा डामरीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर-उन्नाव और लखनऊ के बीच आवागमन सुगम बनाने के लिए 1150 मीटर लंबा सरैया रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) एक नवंबर से वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को पूजन के बाद इस पर डामरीकरण शुरू हो गया। सेतु निगम के अनुसार चार चरणों में पांच दिन के भीतर सड़क बनाने का काम पूरा होगा। आरओबी के चालू होने से कानपुर-लखनऊ मार्ग पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरैया आरओबी के निर्माण की योजना वर्ष 2016 में तैयार हुई थी। तब 785 मीटर लंबे पुल की अनुमानित लागत करीब 78 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2020 में मंजूरी के बाद निर्माण शुरू हुआ और जून 2023 तक इसे पूरा करना था। यातायात दबाव का अध्ययन करने के बाद पुल को मरहला चौराहे के आगे तक विस्तारित किया गया। इससे लंबाई बढ़कर 1150 मीटर और लागत 150 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। डिजाइन में बदलाव, बजट स्वीकृति और निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण से काम में देरी हुई। सितंबर 2024 में संशोधित योजना के तहत निर्माण दोबारा शुरू हुआ।
अप्रैल 2025 में सेतु निगम मुख्यालय ने करीब 40 करोड़ रुपये का शेष काम साई डेवलपर्स एंड कंस्ट्रक्शन को सौंपा। इसके बाद दस अधूरे पिलर पूरे कराए गए। पुल के कुल 26 पिलर बनाए गए हैं। रेलवे लाइन के ऊपर करीब 130 मीटर हिस्से में 24 गर्डर स्थापित किए जा चुके हैं। डामरीकरण के पहले चरण में टैक कोट लगाया जाएगा। दूसरे चरण में हॉट मिक्स प्लांट में तैयार बिटुमिनस मिश्रण बिछाया जाएगा। तीसरे चरण में बिटुमिनस कंक्रीट (बीसी) की परत और चौथे चरण में अंतिम सतही परत तैयार की जाएगी। आरसीसी स्लैब के ऊपर डामर बिछाया जाएगा।
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सरैया आरओबी के निर्माण की योजना वर्ष 2016 में तैयार हुई थी। तब 785 मीटर लंबे पुल की अनुमानित लागत करीब 78 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2020 में मंजूरी के बाद निर्माण शुरू हुआ और जून 2023 तक इसे पूरा करना था। यातायात दबाव का अध्ययन करने के बाद पुल को मरहला चौराहे के आगे तक विस्तारित किया गया। इससे लंबाई बढ़कर 1150 मीटर और लागत 150 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। डिजाइन में बदलाव, बजट स्वीकृति और निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण से काम में देरी हुई। सितंबर 2024 में संशोधित योजना के तहत निर्माण दोबारा शुरू हुआ।
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अप्रैल 2025 में सेतु निगम मुख्यालय ने करीब 40 करोड़ रुपये का शेष काम साई डेवलपर्स एंड कंस्ट्रक्शन को सौंपा। इसके बाद दस अधूरे पिलर पूरे कराए गए। पुल के कुल 26 पिलर बनाए गए हैं। रेलवे लाइन के ऊपर करीब 130 मीटर हिस्से में 24 गर्डर स्थापित किए जा चुके हैं। डामरीकरण के पहले चरण में टैक कोट लगाया जाएगा। दूसरे चरण में हॉट मिक्स प्लांट में तैयार बिटुमिनस मिश्रण बिछाया जाएगा। तीसरे चरण में बिटुमिनस कंक्रीट (बीसी) की परत और चौथे चरण में अंतिम सतही परत तैयार की जाएगी। आरसीसी स्लैब के ऊपर डामर बिछाया जाएगा।
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सरैया आरओबी
- फोटो : अमर उजाला
पुल पर पांच मोड़, 30-40 किमी रहेगी गति
पुल पर पांच मोड़ होने के कारण वाहनों की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की सलाह दी गई है। आरओबी चालू होने से बिल्हौर, बिठूर और नरवल समेत आसपास के क्षेत्रों से आने वाले वाहन बदरका चौराहे तक सीधे पहुंच सकेंगे। यहां से लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली और प्रयागराज जाना आसान होगा।
पुल पर पांच मोड़ होने के कारण वाहनों की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की सलाह दी गई है। आरओबी चालू होने से बिल्हौर, बिठूर और नरवल समेत आसपास के क्षेत्रों से आने वाले वाहन बदरका चौराहे तक सीधे पहुंच सकेंगे। यहां से लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली और प्रयागराज जाना आसान होगा।
सड़क बनाने समेत कुछ काम बाकी है जिसे तेजी से कराया जा रहा है। प्रयास है कि एक नवंबर तक आरओबी खोल दिया जाए। - विजय सेन, मुख्य परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
जाजमऊ पुल की मरम्मत में आएगी तेजी, जल्द खुलेगी एक लेन
कानपुर-लखनऊ मार्ग पर प्रतिदिन करीब एक लाख छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव के अनुसार पीक आवर में जाजमऊ गंगा पुल पार करने में 15 से 20 मिनट लगते हैं। सरैया आरओबी चालू होने पर वैकल्पिक मार्ग मिलने से यह समय करीब पांच मिनट रह जाने की उम्मीद है। इससे जाजमऊ पुल पर मरम्मत काम में भी तेजी आ सकेगी। फिलहाल जाजमऊ पुल की एक लेन पर कंक्रीट का काम चल रहा है। पुरानी सरिया हटाकर नई डाली गई है। कंक्रीट के बाद बिटुमेन का काम होगा। दो से तीन नवंबर तक एक लेन खोलने की उम्मीद है। एप्रोच रोड की करीब 100 मीटर लंबी एक लेन पर कंक्रीट का काम पूरा हो चुका है। तराई के बाद इसे 15 दिन में खोलने का लक्ष्य है, फिर दूसरी लेन की मरम्मत होगी।
कानपुर-लखनऊ मार्ग पर प्रतिदिन करीब एक लाख छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज यादव के अनुसार पीक आवर में जाजमऊ गंगा पुल पार करने में 15 से 20 मिनट लगते हैं। सरैया आरओबी चालू होने पर वैकल्पिक मार्ग मिलने से यह समय करीब पांच मिनट रह जाने की उम्मीद है। इससे जाजमऊ पुल पर मरम्मत काम में भी तेजी आ सकेगी। फिलहाल जाजमऊ पुल की एक लेन पर कंक्रीट का काम चल रहा है। पुरानी सरिया हटाकर नई डाली गई है। कंक्रीट के बाद बिटुमेन का काम होगा। दो से तीन नवंबर तक एक लेन खोलने की उम्मीद है। एप्रोच रोड की करीब 100 मीटर लंबी एक लेन पर कंक्रीट का काम पूरा हो चुका है। तराई के बाद इसे 15 दिन में खोलने का लक्ष्य है, फिर दूसरी लेन की मरम्मत होगी।