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Kanpur: सब स्टेशन में घूम-घूमकर खराबी पता करेगा रोबोट, आईआईटी में विकसित किया गया रोबोट ‘सर’
Wed, 12 Mar 2025 08:35 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 12 Mar 2025 08:35 PM IST
सार
Kanpur News: आईआईटी के स्मार्ट मैटेरियल्स, स्ट्रक्चर्स एंड सिस्टम्स लैब में रोबोट ‘सर’ विकसित किया गया। दिल्ली में हुए ग्रिडकॉन में रोबोट पावरग्रिड को सौंपा गया।
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आईआईटी में विकसित किया गया रोबोट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विद्युत से जुड़ी खराबी का पता लगाने के लिए आईआईटी कानपुर के स्मार्ट मैटेरियल्स, स्ट्रक्चर्स एंड सिस्टम्स (एसएमएसएस) लैब में सबस्टेशन इंस्पेक्शन रोबोट ‘सर’ विकसित किया गया है। इसे दिल्ली में नौ से 11 मार्च तक आयोजित ग्रिडकॉन 2025 में आधिकारिक तौर पर पावरग्रिड को सौंप दिया है। इस दौरान केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और पावर ग्रिड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार त्यागी के सामने रोबोट का सफल प्रदर्शन भी किया गया।
पावरग्रिड के सहयोग से आईआईटी कानपुर ने स्वायत्त मोबाइल रोबोट ‘सर’ को विकसित किया है। यह रोबोट बिजली संबंधित खराबी का पता लगाने के अलावा सब-स्टेशनों पर निरीक्षण का काम भी करेगा। पनकी स्थित सब-स्टेशन पर इसका परीक्षण किया जा चुका है। यह एआई-संचालित नेविगेशन, लिडार, डेप्थ कैमरा, आईआर और मोशन सेंसर्स पर काम करता है। यह मोबाइल रोबोट है, जो बिजली सबस्टेशन के अंदर आराम से घूम सकता है और कम समय में खराबी ढूंढ लेता है। इसे पूरी तरह से स्वचालित बनाने के लिए काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है। संस्थान का नवाचार ‘सर’ इसे आगे ले जाने में सक्षम है।
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पावरग्रिड के सहयोग से आईआईटी कानपुर ने स्वायत्त मोबाइल रोबोट ‘सर’ को विकसित किया है। यह रोबोट बिजली संबंधित खराबी का पता लगाने के अलावा सब-स्टेशनों पर निरीक्षण का काम भी करेगा। पनकी स्थित सब-स्टेशन पर इसका परीक्षण किया जा चुका है। यह एआई-संचालित नेविगेशन, लिडार, डेप्थ कैमरा, आईआर और मोशन सेंसर्स पर काम करता है। यह मोबाइल रोबोट है, जो बिजली सबस्टेशन के अंदर आराम से घूम सकता है और कम समय में खराबी ढूंढ लेता है। इसे पूरी तरह से स्वचालित बनाने के लिए काम किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है। संस्थान का नवाचार ‘सर’ इसे आगे ले जाने में सक्षम है।
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आईआईटी में विकसित किया गया रोबोट
- फोटो : अमर उजाला
चुंबकीय शक्ति से बचाएगा रोबोट
सबस्टेशन के अंदर चुंबकीय शक्ति बहुत अधिक होती है, जो इंसानों के लिए बहुत हानिकारक है। इस रोबोट की मदद से इंसान उस खतरे से काफी हद तक बच सकेंगे। रोबोट वहां भी आसानी से जा सकता है जहां इंसान नहीं जा सकते हैं। यह खराबी का पता लगाकर विभाग को महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
सबस्टेशन के अंदर चुंबकीय शक्ति बहुत अधिक होती है, जो इंसानों के लिए बहुत हानिकारक है। इस रोबोट की मदद से इंसान उस खतरे से काफी हद तक बच सकेंगे। रोबोट वहां भी आसानी से जा सकता है जहां इंसान नहीं जा सकते हैं। यह खराबी का पता लगाकर विभाग को महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
आईआईटी में विकसित किया गया रोबोट
- फोटो : अमर उजाला
सभी इलाकों व मौसम में करेगा काम
संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर बिशाख भट्टाचार्य ने बताया कि एसआईआर ओवरहीटिंग, लीक और संरचनात्मक क्षति का पता लगाने के लिए यह एआई के माध्यम से काम करेगा। रिमोट-कंट्रोल और वायरलेस चार्जिंग के साथ ‘सर’ को सभी इलाकों और सभी मौसम में निरंतर संचालन के लिए बनाया गया है। रोबोट का इस्तेमाल देश के हर सब-स्टेशन में करने की तैयारी है। इसमें कई तरह के आधुनिक कैमरे और माइक्रोफोन लगे हैं। जो सबस्टेशन की कमियों का आसानी से पता लगा सकते हैं। जैसे ही रोबोट सबस्टेशन के अंदर घूमेगा, सबस्टेशन में होने वाली खराबी रोबोट से जुड़ी कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देगी। रोबोट पांच से 10 किमी प्रति घंटे की गति से लगभग दो घंटे में एक सबस्टेशन को आसानी से कवर कर सकता है।
संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर बिशाख भट्टाचार्य ने बताया कि एसआईआर ओवरहीटिंग, लीक और संरचनात्मक क्षति का पता लगाने के लिए यह एआई के माध्यम से काम करेगा। रिमोट-कंट्रोल और वायरलेस चार्जिंग के साथ ‘सर’ को सभी इलाकों और सभी मौसम में निरंतर संचालन के लिए बनाया गया है। रोबोट का इस्तेमाल देश के हर सब-स्टेशन में करने की तैयारी है। इसमें कई तरह के आधुनिक कैमरे और माइक्रोफोन लगे हैं। जो सबस्टेशन की कमियों का आसानी से पता लगा सकते हैं। जैसे ही रोबोट सबस्टेशन के अंदर घूमेगा, सबस्टेशन में होने वाली खराबी रोबोट से जुड़ी कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देगी। रोबोट पांच से 10 किमी प्रति घंटे की गति से लगभग दो घंटे में एक सबस्टेशन को आसानी से कवर कर सकता है।