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Kanpur: किसान मेले के पहले दिन बिके रिकाॅर्ड 30 लाख के बीज, गेहूं के बीज की अधिक रही मांग
Thu, 24 Oct 2024 10:37 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 24 Oct 2024 10:37 PM IST
सार
Kanpur News: किसान मेले में पहले दिन 30 लाख के बीजों की बिक्री हुई। गेहूं, मटर, मसूर, सरसों, राई व सब्जियों के बीज की मांग रही।
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किसान मेला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में गुरुवार को दो दिवसीय भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। शुभारंभ उप्र कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, विवि के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने किया। यहां अनाज व सब्जियों की 53 प्रजातियों के बीज रखे गए। पहले दिन ही रिकाॅर्ड 30 लाख रुपये के बीज बिके। इससे पहले लगे मेलों में पहले दिन अधिकतम 25 लाख के ही बीज बिके हैं। गेहूं के बीज की मांग अधिक रही।
वहीं, मटर, मसूर, सरसों, राई व सब्जियों के बीज भी बिके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. संजय सिंह ने कहा कि आर्गेनिक खेती की तरफ किसान बढ़ रहे हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन अगर बगल में नॉन आर्गेनिक खेती हो रही है तो इसका फायदा नहीं है। कारण, धरती के भीतर से रसायन रिसकर दूसरे के खेतों में पहुंच रहे हैं। वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के अनुसार नई प्रजातियां विकसित कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को नई तकनीक से रूबरू होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यहां प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। वहीं, प्रसार निदेशालय की ओर से लिखित पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। विवि परिसर में स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को शैक्षिक किट देकर सम्मानित किया गया। मेले का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया। मौके पर डॉ. सीएल मौर्या, डॉ. विजय यादव, डॉ. पीके उपाध्याय, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. खलील खान आदि मौजूद रहे।
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वहीं, मटर, मसूर, सरसों, राई व सब्जियों के बीज भी बिके। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. संजय सिंह ने कहा कि आर्गेनिक खेती की तरफ किसान बढ़ रहे हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन अगर बगल में नॉन आर्गेनिक खेती हो रही है तो इसका फायदा नहीं है। कारण, धरती के भीतर से रसायन रिसकर दूसरे के खेतों में पहुंच रहे हैं। वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के अनुसार नई प्रजातियां विकसित कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को नई तकनीक से रूबरू होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यहां प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। वहीं, प्रसार निदेशालय की ओर से लिखित पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। विवि परिसर में स्थित प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को शैक्षिक किट देकर सम्मानित किया गया। मेले का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया। मौके पर डॉ. सीएल मौर्या, डॉ. विजय यादव, डॉ. पीके उपाध्याय, डॉ. डीपी सिंह, डॉ. खलील खान आदि मौजूद रहे।
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गेहूं की इन प्रजाति के बीजों की रही अधिक मांग
डीबीडब्ल्यू 303 और 187 : मेले में गेहूं की इन दोनों प्रजातियों के बीजों की काफी मांग रही। इन बीजों में कीट कम लगते हैं और उत्पादन अन्य की तुलना में पांच से छह क्विंटल अधिक होता है। इस प्रजाति का उत्तर पश्चिम में अच्छा उत्पादन होता है।
के-1006 : गेहूं की इस प्रजाति में प्रोटीन, जिंक और आयरन की मात्रा अधिक होती है। यह कुपोषण को दूर करने में सहायक है। बिहार और पूर्वांचल में काफी अच्छा उत्पादन होता है। इसमें प्रोटीन, जिंक और आयरन अन्य की तुलना में 10पीपीएम से अधिक होता है।
के-1317 : गेहूं की यह प्रजाति कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। पानी की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए यह वरदान है। पर्यावरण हितैषी होने के साथ अधिक तापमान में भी तैयार हो जाती है।
- मेले में सरसों की सुरेखा, आजाद मैक और पीतांबरी प्रजाति काफी पसंद की गई। देर से बोने पर भी अच्छा उत्पादन देने के साथ इनमें बीमारी कम लगती है।
डीबीडब्ल्यू 303 और 187 : मेले में गेहूं की इन दोनों प्रजातियों के बीजों की काफी मांग रही। इन बीजों में कीट कम लगते हैं और उत्पादन अन्य की तुलना में पांच से छह क्विंटल अधिक होता है। इस प्रजाति का उत्तर पश्चिम में अच्छा उत्पादन होता है।
के-1006 : गेहूं की इस प्रजाति में प्रोटीन, जिंक और आयरन की मात्रा अधिक होती है। यह कुपोषण को दूर करने में सहायक है। बिहार और पूर्वांचल में काफी अच्छा उत्पादन होता है। इसमें प्रोटीन, जिंक और आयरन अन्य की तुलना में 10पीपीएम से अधिक होता है।
के-1317 : गेहूं की यह प्रजाति कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। पानी की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए यह वरदान है। पर्यावरण हितैषी होने के साथ अधिक तापमान में भी तैयार हो जाती है।
- मेले में सरसों की सुरेखा, आजाद मैक और पीतांबरी प्रजाति काफी पसंद की गई। देर से बोने पर भी अच्छा उत्पादन देने के साथ इनमें बीमारी कम लगती है।
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अमेरिका से आया फसलों का मित्र किट, संख्या बढ़ाने के लिए सीएसए में चल रहा शोध
फसलों के मित्र कीट जाइको ग्रामा वाई कुलेराटा की संख्या बढ़ाने के लिए सीएसए के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। 70 के दशक में गेहूं के आयात के दौरान यह कीट अमेरिका से भारत में आ गया था। इसकी पहचान 80 के दशक में हुई। यह कीट घातक गाजर घास को खाता है। किसान मेले में मृदा संरक्षण और कीट प्रबंधन विभाग की ओर से भी स्टॉल लगाया था। इसमें वैज्ञानिकों के साथ शोधार्थियों ने विभिन्न कीटों का प्रदर्शन किया। विवि के शोधार्थी राम अजीत चौधरी ने बताया कि लंबी पड़ताल के बाद पता चला कि यह कीट किसानों का हितैषी है। इसकी संख्या बढ़ाने पर शोध कर रहे हैं।
17 किलो का कद्दू रहा आकर्षण का केंद्र
फिरोजाबाद से आए किसानों के स्टॉल में रखा 17 किलो का कद्दू आकर्षण का केंद्र रहा। खास बात है कि इसे जैविक खेती से तैयार किया गया है। इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया।
फसलों के मित्र कीट जाइको ग्रामा वाई कुलेराटा की संख्या बढ़ाने के लिए सीएसए के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। 70 के दशक में गेहूं के आयात के दौरान यह कीट अमेरिका से भारत में आ गया था। इसकी पहचान 80 के दशक में हुई। यह कीट घातक गाजर घास को खाता है। किसान मेले में मृदा संरक्षण और कीट प्रबंधन विभाग की ओर से भी स्टॉल लगाया था। इसमें वैज्ञानिकों के साथ शोधार्थियों ने विभिन्न कीटों का प्रदर्शन किया। विवि के शोधार्थी राम अजीत चौधरी ने बताया कि लंबी पड़ताल के बाद पता चला कि यह कीट किसानों का हितैषी है। इसकी संख्या बढ़ाने पर शोध कर रहे हैं।
17 किलो का कद्दू रहा आकर्षण का केंद्र
फिरोजाबाद से आए किसानों के स्टॉल में रखा 17 किलो का कद्दू आकर्षण का केंद्र रहा। खास बात है कि इसे जैविक खेती से तैयार किया गया है। इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया।
यह भी रहे आकर्षण
सीएसए के होमसाइंस विभाग की ऐश्वर्या ने मेले में मिलेट के लड्डू का स्टॉल लगाया। यहां से लोगों ने जौ, बाजरा, गुड़, मेवे, रागी से तैयार लड्डू खरीदे। मिलेट्स से बनी पापड़ी की भी खूब मांग रही। सीएसजेएमयू में एमएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा युशरा, अंशिका, श्रुति, मोहिनी और सौरभ ने मिलेट्स से कुकीज, कप केक और ब्राउनी तैयार की, जो काफी पसंद की गई। .
मनमुताबिक बीज न मिलने से किसान हुए निराश
मेले में हर साल की तरह इस बार भी बीजों को लेकर किसानों के बीच मारामारी रही। कई किसान मनमुताबिक बीज नहीं मिलने से निराश होकर लौट गए। दूर दराज से आए किसानों को थोड़े-थोड़े बीज से संतोष करना पड़ा। स्टॉलों पर काफी लंबी कतार लगी रही। हालांकि, सीएसए प्रशासन ने मेले में एक हजार क्विंटल बीज बिक्री के लिए रखे थे, लेकिन उम्मीद से कही अधिक किसान पहुंच गए। मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, एमपी से भी काफी किसान पहुंचे थे।
सीएसए के होमसाइंस विभाग की ऐश्वर्या ने मेले में मिलेट के लड्डू का स्टॉल लगाया। यहां से लोगों ने जौ, बाजरा, गुड़, मेवे, रागी से तैयार लड्डू खरीदे। मिलेट्स से बनी पापड़ी की भी खूब मांग रही। सीएसजेएमयू में एमएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा युशरा, अंशिका, श्रुति, मोहिनी और सौरभ ने मिलेट्स से कुकीज, कप केक और ब्राउनी तैयार की, जो काफी पसंद की गई। .
मनमुताबिक बीज न मिलने से किसान हुए निराश
मेले में हर साल की तरह इस बार भी बीजों को लेकर किसानों के बीच मारामारी रही। कई किसान मनमुताबिक बीज नहीं मिलने से निराश होकर लौट गए। दूर दराज से आए किसानों को थोड़े-थोड़े बीज से संतोष करना पड़ा। स्टॉलों पर काफी लंबी कतार लगी रही। हालांकि, सीएसए प्रशासन ने मेले में एक हजार क्विंटल बीज बिक्री के लिए रखे थे, लेकिन उम्मीद से कही अधिक किसान पहुंच गए। मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, एमपी से भी काफी किसान पहुंचे थे।