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कानपुर: काली मंदिर में पशु बलि का विरोध, धक्का-मुक्की, हंगामा
Sat, 06 Nov 2021 07:47 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 06 Nov 2021 07:47 PM IST
सार
पीड़िता का आरोप है कि उनके सामने तीन पशुओं की बलि दी गई थी। पुलिस ने इसके बाद भी बलि नहीं रुकवाई। वह बलि से पहले कोतवाली में मदद मांगने गईं थीं लेकिन कोई अफसर नहीं मिला था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में शिवाला बंगाली मोहाल स्थित प्राचीन काली मंदिर में दिवाली की रात दी जा रही पशु (बकरों) की बलि के विरोध में भीड़ ने महिला पशु प्रेमियों से धक्का-मुक्की कर दी। उन्हें धक्के मारकर परिसर से बाहर निकाल दिया। फिर पशुओं की बलि जारी रखी।
पीड़ितों ने कोतवाली थाने में अज्ञात के खिलाफ छेड़छाड़ व पशु क्रूरता अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मंदिर प्रबंधन ने इसे साजिश करार दिया है। मेनका गांधी के एनजीओ पीपुल्स फॉर एनीमल की कल्याणपुर निवासी पदाधिकारी ने पुलिस को बताया कि मंदिर में दिवाली की आधी रात को पूजा पाठ के बाद करीब एक दर्जन बकरों की बलि दी जाती है।
वह बलि रोकने के लिए साथियों संग मदिर परिसर में पहुंच गईं और बलि का विरोध दर्ज कराया तो मंदिर के पुजारी, कर्मचारियों और आयोजकों ने धक्का मुक्की शुरू कर दी। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस महिलाओं को भीड़ से बचा कर निकाल लाई।
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पीड़िता का आरोप है कि उनके सामने तीन पशुओं की बलि दी गई थी। पुलिस ने इसके बाद भी बलि नहीं रुकवाई। वह बलि से पहले कोतवाली में मदद मांगने गईं थीं लेकिन कोई अफसर नहीं मिला था।
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पीड़ितों ने कोतवाली थाने में अज्ञात के खिलाफ छेड़छाड़ व पशु क्रूरता अधिनियम की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मंदिर प्रबंधन ने इसे साजिश करार दिया है। मेनका गांधी के एनजीओ पीपुल्स फॉर एनीमल की कल्याणपुर निवासी पदाधिकारी ने पुलिस को बताया कि मंदिर में दिवाली की आधी रात को पूजा पाठ के बाद करीब एक दर्जन बकरों की बलि दी जाती है।
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वह बलि रोकने के लिए साथियों संग मदिर परिसर में पहुंच गईं और बलि का विरोध दर्ज कराया तो मंदिर के पुजारी, कर्मचारियों और आयोजकों ने धक्का मुक्की शुरू कर दी। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस महिलाओं को भीड़ से बचा कर निकाल लाई।
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पीड़िता का आरोप है कि उनके सामने तीन पशुओं की बलि दी गई थी। पुलिस ने इसके बाद भी बलि नहीं रुकवाई। वह बलि से पहले कोतवाली में मदद मांगने गईं थीं लेकिन कोई अफसर नहीं मिला था।
पशुओं की बलि मत दो, चाहे मेरी बलि दे दो...
घटना का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में एनजीओ की पदाधिकारी कहते सुनी गईं कि पशुओं की बलि मत दो, चाहे इसके बदले मेरी बलि दे दो....।
मंदिर प्रबंधन भी दर्ज करा सकता है रिपोर्ट
मंदिर प्रबंधन ने इसे एक साजिश करार देेते हुए कहा कि पुरानी प्रथा में विघ्न डालनेे की कोशिश की गई। यह हिंदू धर्म के खिलाफ साजिश है। उन्होंने एनजीओ की पदाधिकारी और उनकी टीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
घटना का किसी ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में एनजीओ की पदाधिकारी कहते सुनी गईं कि पशुओं की बलि मत दो, चाहे इसके बदले मेरी बलि दे दो....।
मंदिर प्रबंधन भी दर्ज करा सकता है रिपोर्ट
मंदिर प्रबंधन ने इसे एक साजिश करार देेते हुए कहा कि पुरानी प्रथा में विघ्न डालनेे की कोशिश की गई। यह हिंदू धर्म के खिलाफ साजिश है। उन्होंने एनजीओ की पदाधिकारी और उनकी टीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।