Kanpur: रेड टेप को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पद्मश्री इरशाद मिर्जा का बीमारी के चलते निधन
पद्मश्री इरशाद मिर्जा (Irshad Mirza) का रविवार को बीमारी के चलते निधन हो गया। उनके निधन की सूचना पर बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन करने पार्वती बागला रोड स्थित उनके आवास पर पहुंचे। शाम साढ़े सात बजे उनका जनाजा घर से बड़ी ईदगाह बेनाझाबर के लिए निकला, जहां नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई।
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चर्म निर्यातक और मिर्जा इंटरनेशनल के चेयरमैन पद्मश्री इरशाद मिर्जा का रविवार सुबह पौने 10 बजे सर्वोदयनगर स्थित निजी अस्पताल में बीमारी के चलते निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। रेड टेप ब्रांड इनकी ही फर्म का है। मिर्जा इंटरनेशनल के साथ ही रेड टेप को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले इरशाद मिर्जा के निधन से टेनरी कारोबारियों में शोक की लहर दौड़ गई।
उनके निधन की सूचना पर बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन करने पार्वती बागला रोड स्थित उनके आवास पर पहुंचे। शाम साढ़े सात बजे उनका जनाजा घर से बड़ी ईदगाह बेनाझाबर के लिए निकला, जहां नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई। इसके बाद कर्नलगंज के तकिया बिसातियान कब्रिस्तान में उनके शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
इरशाद मिर्जा शुरुआती दौर में अपने मां-बाप के साथ नई सड़क स्थित सुनहरी मस्जिद के पास रहा करते थे। इसके बाद ग्वालटोली में रहने लगे। मिर्जा इंटरनेशनल के सहायक प्रबंधक शरीफ मोहम्मद खान ने बताया कि इरशाद मिर्जा ने लंबे संघर्ष के बाद उद्योग जगत में यह मुकाम बनाया। उन्होंने जाजमऊ की अहमद शरीफ की टेनरी में नौकरी भी की। इसके बाद कच्चे चमड़े का काम शुरू किया। फिर छोटी टेनरी लगाई। मिर्जा टेनरी के नाम की यह टेनरी बाद में मिर्जा इंटरनेशनल समूह के तौर पर पहचानी गई।
फोर्ब्स की सूची में आ चुका है नाम
उन्होंने कंपनी की शुरुआत की 1979 में की थी, जो लेदर बनाने और टैनिंग व फिनिशिंग के लिए काम करती है। इरशाद मिर्जा की कंपनी में बनने वाला लेदर विदेश में भी एक्सपोर्ट होता है। उनका नाम फोर्ब्स मैगजीन की प्रभावशाली उद्योगपतियों की सूची में आ चुका है। इरशाद मिर्जा राजनाथ सिंह की यूपी सरकार में राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी जमील आरा बेगम का 2017 में इंतकाल हो चुका है। परिवार में चार पुत्र राशिद मिर्जा, शाहिद मिर्जा, तौसीफ मिर्जा, तसनीफ अहमद मिर्जा व तीन बेटियां सबीहा हुसैन, मारिया खान, वासिया खान हैं।
समाज के लिए सराहनीय योगदान
इरशाद मिर्जा ने एक शैक्षणिक संस्थान, एक साहित्य प्रचार अकादमी और कई अन्य संस्थानों की स्थापना कर आगे बढ़ाया। वह रोटरी क्लब के कानपुर चैप्टर के अध्यक्ष रहे हैं। मिर्जा फाउंडेशन से उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों और ग्रामीणों को उच्च श्रेणी की चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए अपने कारखानों के पास 100 बिस्तरों वाला अस्पताल भी बनवाया है। वह अध्यक्ष, चमड़ा निर्यात परिषद, अध्यक्ष, एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, उत्तर प्रदेश, सदस्य प्रबंध समिति, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन, यूपी स्टेट इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन के निदेशक की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। यूपी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के साथ भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम, यूपी राज्य औद्योगिक विकास निगम आदि के बोर्ड में भी रहे।
इरशाद मिर्जा का संघर्ष
- वर्ष 1979 में इरशाद मिर्जा और बड़े पुत्र राशिद मिर्जा ने तत्कालीन मिर्जा टेनर्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। बाद में मिर्जा इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड का नाम दिया गया। उन्नाव के मगरवारा में तैयार चमड़े के निर्माण के लिए एक छोटी टेनरी की स्थापना की थी।
- इरशाद मिर्जा ने अपने कॅरियर की शुरुआत वर्ष 1973 में चमड़े के सामान (काठी उत्पाद) के एक निर्यातक के तौर पर की। विदेश में व्यापार की शुरुआत 25,000 रुपये और 40 कर्मचारियों के साथ की।
- 32 वर्षों की अवधि में एक निर्यात व्यवसाय खड़ा किया है, जिसका कारोबार लगभग 350 करोड़ रुपये है। इसमें 11000 लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं।
- वर्ष 1975 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समकालीन काठी (सैडलरी) विकसित की और इसे ऑस्ट्रेलिया ले गए, जहां इसे खूब पसंद किया गया।