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कानपुर: ऑक्सीजन के दाम बढ़े, दो सौ वाला सिलिंडर तीन सौ का, अब टोकन से मिलेगी गैस
Sat, 01 May 2021 02:02 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 01 May 2021 02:02 AM IST
सार
200 रुपये वाला छोटा सिलिंडर अब 300 रुपये में भरा जा रहा है। वहीं 500 वाला बड़ा सिलिंडर 700 रुपये में दिया जा रहा है। फजलगंज स्थित बब्बर ऑक्सीजन प्लांट में तो बाकायदा सूची भी चस्पा कर दी गई है।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
ऑक्सीजन प्लांट वालों ने गैस के दाम बढ़ा दिए हैं। 200 रुपये वाला छोटा सिलिंडर अब 300 रुपये में भरा जा रहा है। वहीं 500 वाला बड़ा सिलिंडर 700 रुपये में दिया जा रहा है। फजलगंज स्थित बब्बर ऑक्सीजन प्लांट में तो बाकायदा सूची भी चस्पा कर दी गई है।
वहीं विवाद से बचने के लिए बब्बर ऑक्सीजन प्लांट शुक्रवार से टोकन से सिलिंडर की रिफिलिंग शुरू कर दी गई है। डायरेक्टर सुमित बब्बर ने बताया कि प्रशासन से निर्देश मिले थे कि फुटकर ऑक्सीजन का वितरण नहीं किया जाएगा। अस्पतालों से थोक में आने वाले सिलिंडरों को ही ऑक्सीजन दी जाए, लेकिन गैस प्लांट के बाहर लाइन में लगे लोगों की मजबूरी देखी नहीं गई।
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वहीं विवाद से बचने के लिए बब्बर ऑक्सीजन प्लांट शुक्रवार से टोकन से सिलिंडर की रिफिलिंग शुरू कर दी गई है। डायरेक्टर सुमित बब्बर ने बताया कि प्रशासन से निर्देश मिले थे कि फुटकर ऑक्सीजन का वितरण नहीं किया जाएगा। अस्पतालों से थोक में आने वाले सिलिंडरों को ही ऑक्सीजन दी जाए, लेकिन गैस प्लांट के बाहर लाइन में लगे लोगों की मजबूरी देखी नहीं गई।
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इस वजह से वे फुटकर और थोक दोनों ही तरह से वितरण कर रहे हैं। वहीं, पहले सिलिंडर भरवाने को लेकर हो हल्ला से बचने के लिए टोकन सिस्टम की शुरुआत की गई है। प्लांट का एक कर्मचारी लाइन में लगे सभी लोगों को उनके क्रम के अनुसार टोकन उपलब्ध कराएगा। इसी क्रम में उन्हें प्लांट के अंदर सिलिंडर रिफिल कराने के लिए बुलाया जाएगा।
तीन गुना बढ़ी तरल ऑक्सीजन की मांग
सुमित बब्बर ने बताया कि आम दिनों में उनके यहां रोजाना चार से पांच टन तरल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती थी। जब से कोविड मरीजों की संख्या बढ़ी है, तब से 12 से 15 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। 16 से 25 टन तक के कैप्सूल तरल ऑक्सीजन लेकर शहर आते हैं।
यहां से ऑक्सीजन प्लांटों को जरूरत के अनुसार सप्लाई की जाती है। प्लांट में वाष्पीकरण की प्रक्रिया के बाद ऑक्सीजन तैयार होती है। इस गैस को प्लांट में लगे टैंकरों में भर लिया जाता है। मशीन की मदद से सिलिंडरों में भरी जाती है।
तीन गुना बढ़ी तरल ऑक्सीजन की मांग
सुमित बब्बर ने बताया कि आम दिनों में उनके यहां रोजाना चार से पांच टन तरल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती थी। जब से कोविड मरीजों की संख्या बढ़ी है, तब से 12 से 15 टन ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। 16 से 25 टन तक के कैप्सूल तरल ऑक्सीजन लेकर शहर आते हैं।
यहां से ऑक्सीजन प्लांटों को जरूरत के अनुसार सप्लाई की जाती है। प्लांट में वाष्पीकरण की प्रक्रिया के बाद ऑक्सीजन तैयार होती है। इस गैस को प्लांट में लगे टैंकरों में भर लिया जाता है। मशीन की मदद से सिलिंडरों में भरी जाती है।