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कानपुर: नाइजीरियन ठग की साथी मेंडी ने उगले राज, कस्टम अधिकारी बनकर करती थी शिकार, पुलिस ने ऐसे दबोचा
Fri, 06 Aug 2021 07:18 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 06 Aug 2021 07:18 PM IST
सार
मेंडी मोसिस की पैरवी करने के लिए शहर आई हुई थी। पुलिस ने उसके पास से पांच मोबाइल बरामद किए हैं। जो वह ठगी के लिए इस्तेमाल करती थी। क्राइम ब्रांच को मेंडी ने मोसिस के कई राज बताए हैं।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी मेंडी
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
क्राइम ब्रांच की टीम ने सोशल साइट पर युवक युवतियों से दोस्ती कर लोगों से ठगी करने वाले नाइजीरियन मोसिस की महिला साथी मेंडी को भी शुक्रवार को गुरुदेव चौराहे के पास से दबोच लिया। महिला की पहचान मूलरूप से मेघालय के शिलांग निवासी अलीशा उर्फ मेंडी के रूप में हुई है। जो दिल्ली के मालवीय नगर में रहती है।
मेंडी मोसिस की पैरवी करने के लिए शहर आई हुई थी। पुलिस ने उसके पास से पांच मोबाइल बरामद किए हैं। जो वह ठगी के लिए इस्तेमाल करती थी। क्राइम ब्रांच को मेंडी ने मोसिस के कई राज बताए हैं। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि पकड़ी गई महिला मेंडी मोसिस की साथी है। वह पहले दिल्ली में ऑनलाइन कपड़ा बेचने का काम करती थी।
मेंडी ने पूछताछ में बताया कि वह लोगों को कस्टम विभाग और आयकर विभाग की अधिकारी बनकर कॉल करती थी। झांसे में न आने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की धमकी देती थी। इसके बाद लोगों से खाते में रुपये ट्रांसफर करा लेती थी। जिसका मोसिस उसे कमीशन देता था।
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मेंडी ने तीन जून को ही नवाबगंज निवासी महिला के साथ कस्टम विभाग का अधिकारी बन 4.05 लाख की ठगी की थी। पीड़िता ने नवाबगंज थाने में इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। जिसकी जांच क्राइम ब्रांच को दी गई थी। क्राइम ब्रांच ने मेंडी को जेल भेज दिया है।
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मेंडी मोसिस की पैरवी करने के लिए शहर आई हुई थी। पुलिस ने उसके पास से पांच मोबाइल बरामद किए हैं। जो वह ठगी के लिए इस्तेमाल करती थी। क्राइम ब्रांच को मेंडी ने मोसिस के कई राज बताए हैं। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि पकड़ी गई महिला मेंडी मोसिस की साथी है। वह पहले दिल्ली में ऑनलाइन कपड़ा बेचने का काम करती थी।
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मेंडी ने पूछताछ में बताया कि वह लोगों को कस्टम विभाग और आयकर विभाग की अधिकारी बनकर कॉल करती थी। झांसे में न आने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की धमकी देती थी। इसके बाद लोगों से खाते में रुपये ट्रांसफर करा लेती थी। जिसका मोसिस उसे कमीशन देता था।
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मेंडी ने तीन जून को ही नवाबगंज निवासी महिला के साथ कस्टम विभाग का अधिकारी बन 4.05 लाख की ठगी की थी। पीड़िता ने नवाबगंज थाने में इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। जिसकी जांच क्राइम ब्रांच को दी गई थी। क्राइम ब्रांच ने मेंडी को जेल भेज दिया है।
पुलिस गिरफ्त में नाइजीरियन ठग ओकुवारिमा मोसिस
- फोटो : अमर उजाला
कॉल डिटेल के पकड़ी गई मेंडी
क्राइम ब्रांच ने मोसिस के पकड़े जाने के बाद उसके मोबाइल की सीडीआर निकलवाई थी। जिससे पता चला कि मोसिस अक्सर दिल्ली के मालवीय नगर निवासी एक महिला से अकसर बात करता है। पुलिस ने सर्विलांस के जरिए नंबर की लोकेशन ट्रेस की तो मेंडी का पता चला। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने उसे गुरुदेव चौराहे से दबोच लिया। मेंडी के साथियों की तलाश में क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। मोसिस अपने अन्य साथियों संग दिल्ली के एक चर्च में मीटिंग करता था। धार्मिक सम्मेलन के जरिए वह ठगी का प्लान बनाता था।
प्री एक्टिवेटेड सिम का करते हैं इस्तेमाल
पुलिस ने दावा किया कि मेंडी के पास से बरामद सिमकार्ड बदायूं निवासी एक युवक के नाम से जारी हुआ है। जो प्री एक्टिेवेटेड नंबर है। मोसिस ही गैंग के सभी साथियों को ये प्री एक्टिवेटेड सिम उपलब्ध कराता था।
मोसिस के गिरोह में नाइजीरियन युवक युवतियों के अलावा भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं। सीडीआर के आधार टीम उसके अन्य साथियों की तलाश में दबिश दे रही है। जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
सलमान ताल पाटिल, डीसीपी क्राइम
क्राइम ब्रांच ने मोसिस के पकड़े जाने के बाद उसके मोबाइल की सीडीआर निकलवाई थी। जिससे पता चला कि मोसिस अक्सर दिल्ली के मालवीय नगर निवासी एक महिला से अकसर बात करता है। पुलिस ने सर्विलांस के जरिए नंबर की लोकेशन ट्रेस की तो मेंडी का पता चला। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने उसे गुरुदेव चौराहे से दबोच लिया। मेंडी के साथियों की तलाश में क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है। मोसिस अपने अन्य साथियों संग दिल्ली के एक चर्च में मीटिंग करता था। धार्मिक सम्मेलन के जरिए वह ठगी का प्लान बनाता था।
प्री एक्टिवेटेड सिम का करते हैं इस्तेमाल
पुलिस ने दावा किया कि मेंडी के पास से बरामद सिमकार्ड बदायूं निवासी एक युवक के नाम से जारी हुआ है। जो प्री एक्टिेवेटेड नंबर है। मोसिस ही गैंग के सभी साथियों को ये प्री एक्टिवेटेड सिम उपलब्ध कराता था।
मोसिस के गिरोह में नाइजीरियन युवक युवतियों के अलावा भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं। सीडीआर के आधार टीम उसके अन्य साथियों की तलाश में दबिश दे रही है। जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
सलमान ताल पाटिल, डीसीपी क्राइम