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बिकरू कांड  में आरोप निर्धारण पर नहीं हो सकी बहस, अब 16 को सुनवाई 

Thu, 04 Mar 2021 01:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 04 Mar 2021 01:55 AM IST
सार

  • बचाव पक्ष के अधिवक्ता बोले, नहीं मिली केस डायरी, कैसे रखें पक्ष 
  • तत्कालीन एसओ समेत 37 आरोपी कोर्ट में पेश

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Kanpur News : no debate on determination of charges in Bikru case
बिकरू कांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिकरू कांड में बुधवार को आरोप निर्धारण पर बहस नहीं हो सकी। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने केस डायरी न मिलने का हवाला दिया। अब सुनवाई की तिथि 16 मार्च तय की गई है।  

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बिकरू कांड की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही है। बुधवार को आरोपियों पर आरोप निर्धारण को लेकर बहस होनी थी। कोर्ट ने सभी आरोपियों को तलब किया। तत्कालीन चौबेपुर एसओ विनय तिवारी व विकास दुबे का खंजाची जय बाजपेई समेत 37 आरोपी कोर्ट में पेश हुए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित, पवनेश शुक्ला, अवधेश शुक्ला ने कोर्ट में तर्क रखा कि उन्हें केस डायरी की प्रति नहीं मिली है।
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वह बचाव पक्ष कैसे रखेंगे। सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं से कहा कि केस डायरी वृहद रूप में है। इससे उसकी छाया प्रति कराना संभव नहीं हो रहा है। उन्होंने केस डायरी का अवलोकन करने या फिर पेन ड्राइव में लेने के लिए कहा। 
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जेल से मां को छोड़ कर मौसी के साथ गई बच्ची 
कुख्यात विकास दुबे के पिता की देखभाल करने वाली रेखा अग्निहोत्री की सात वर्षीय बच्ची को कोर्ट के आदेश पर बुधवार को उसकी मौसी गुड्डी को सौंपा गया। घटना के बाद पुलिस ने रेखा को आरोपी बनाया था। उसे गिरफ्तार करने के दौरान उसके साथ सात साल की बेटी भी थी। बेटी मां के साथ रहने की जिद करके जेल में रह रही थी। कोर्ट के आदेश पर बुधवार को रेखा की बेटी को उसकी मौसी गुड्डी देवी को सौंप दिया गया। 

दो आरोपियों ने फिर जांच कराने की मांग की
बिकरू कांड में आरोपी हीरू दुबे व शांति देवी ने पुलिस पर मनगंढ़त तथ्यों के आधार पर मुल्जिम बनाने का आरोप लगाया है। दोनों अभियुक्तों ने बुधवार को अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित के माध्यम से एंटी डकैती कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण कराने की मांग की है। पत्र में इस बात का जिक्र है कि विकास का घर गिराया जा चुका है।


ऐसे में साक्ष्य भी नष्ट हो गए हैं और विवेचना भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। साक्ष्य नष्ट होने से बेगुनाही साबित करने में परेशानी हो रही है। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि कोर्ट को पत्र देकर दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण कराने का अनुरोध किया गया है।

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