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UP election 2022: कानपुर पुलिस के पास ना वाहन और ना सुविधाएं, कैसे होंगे विधान सभा चुनाव
Sat, 22 Jan 2022 07:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 22 Jan 2022 07:50 PM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव को सकुशल निपटाने के लिए मुख्यालय से तमाम निर्देश आने शुरू हो गए हैं। जिसे लेकर कमिश्नरी और आउटर की पुलिस तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। फिलहाल पुलिस के पास ना तो वाहन हैं और न ही सुविधाएं। ऐसे में मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों को शत प्रतिशत पालन कराना पुलिस के लिए चुनौतियों से कम नहीं है। आलाअधिकारी सिर्फ ये ही मंथन कर रहे हैैं कि सीमित संसाधनों के बीच कैसे चुनाव संपन्न कराए जाएं।
1250 रुपये में कैसे बनेगा शौचालय
10 विधानसभा के सभी बूथों पर शौचालय का इंतजाम कराने के मुख्यालय के निर्देश हैैं। जिसके लिए शासन द्वारा एक टॉयलेट के लिए 1250 रुपये पास किए गए हैैं। जबकि एक शीट की कीमत ही एक हजार रुपये से ज्यादा है। अब सवाल ये उठता है कि अगर अधिकारी इसकी जिम्मेदारी अगर थानेदारों को देते हैं तो बेईमानी की संभावना बढ़ जाती है।
कैमरा नहीं है इंतजाम
अतिसंवेदनशील और संवेदनशील बूथों पर 360 डिग्री मूव करने वाले कैमरे लगाए जाने हैैं। कमिश्नरी और आउटर में एक भी 360 डिग्री पर मूव करने वाला कैमरा नहीं है। वहीं हर विधानसभा में ड्रोन से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैैं। अगर उपद्रवी छत पर कोई हथियार (ईंट पत्थर, पेट्रोल बम) इकट्ठा किए होंगे तो उसे देखने के लिए ड्रोन मददगार होगा।
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बूथों से चंद कदम की दूरी पर कोई योजना बनाई जा रही होगी तो उसके लिए भी ड्रोन हेल्पफुल होगा। अगर ड्रोन की बात की जाए तो एक खराब ड्रोन कमिश्नरी में हैैं। निगरानी के लिए ड्रोन 80 हजार का नया आता है और 800 रुपये रोज किराए पर आता है। मुख्यालय से आए आदेशों में कहीं भी ये नहीं लिखा है कि ड्रोन कहां से आएगा?
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1250 रुपये में कैसे बनेगा शौचालय
10 विधानसभा के सभी बूथों पर शौचालय का इंतजाम कराने के मुख्यालय के निर्देश हैैं। जिसके लिए शासन द्वारा एक टॉयलेट के लिए 1250 रुपये पास किए गए हैैं। जबकि एक शीट की कीमत ही एक हजार रुपये से ज्यादा है। अब सवाल ये उठता है कि अगर अधिकारी इसकी जिम्मेदारी अगर थानेदारों को देते हैं तो बेईमानी की संभावना बढ़ जाती है।
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कैमरा नहीं है इंतजाम
अतिसंवेदनशील और संवेदनशील बूथों पर 360 डिग्री मूव करने वाले कैमरे लगाए जाने हैैं। कमिश्नरी और आउटर में एक भी 360 डिग्री पर मूव करने वाला कैमरा नहीं है। वहीं हर विधानसभा में ड्रोन से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैैं। अगर उपद्रवी छत पर कोई हथियार (ईंट पत्थर, पेट्रोल बम) इकट्ठा किए होंगे तो उसे देखने के लिए ड्रोन मददगार होगा।
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बूथों से चंद कदम की दूरी पर कोई योजना बनाई जा रही होगी तो उसके लिए भी ड्रोन हेल्पफुल होगा। अगर ड्रोन की बात की जाए तो एक खराब ड्रोन कमिश्नरी में हैैं। निगरानी के लिए ड्रोन 80 हजार का नया आता है और 800 रुपये रोज किराए पर आता है। मुख्यालय से आए आदेशों में कहीं भी ये नहीं लिखा है कि ड्रोन कहां से आएगा?
वाहनों की है विशेष कमी
मुख्यालय द्वारा कोविड प्रोटोकॉल के तहत चुनाव करने का निर्देश दिया गया है। जिसके लिए भारी मात्रा में फोर्स की तैनाती होनी है। सीपीएमएफ की एक कंपनी में 130 जवान होते हैैं। यानी एक कंपनी के लिए चार बसों की जरूरत है। इलेक्शन में पांच कंपनी सीपीएमएफ और तीन कंपनी पीएसी मांगी गई है। कुछ फोर्स ने आमद भी कर ली है।
जिस हिसाब से पुलिस बल है। उस हिसाब से पुलिस के पास उनके मूवमेंट के लिए वाहन नहीं है। अब सुरक्षित चुनाव के लिए पुलिस के बेड़े में शामिल वाहनों की बात की जाए तो विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए न पुलिस के पास वज्र वाहन है और न ही पीछा करने के लिए इंटरसेप्टर। और तो और भीड़ को तितर बितर करने वाली वाटर कैनन वैन भी खराब पड़ी है।
ना आवास ना ही वाहन चालक
कमिश्नरी और आउटर में पुलिस वाहन चलाने वालों की विशेष कमी है, जिसके चलते पुलिस विभाग को परेेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि वाहन और चालकों के लिए मुख्यालय को सुझाव भेजा गया है कि आस पास के जिन प्रदेशों में चुनाव नहीं हो रहे हैैं, वहां से वाहन और चालक मंगा लिए जाए। जिसकी कवायद भी शुरू कर दी गई है।
कोविड प्रोटोकॉल के चलते ड्यूटी पर आए जवानों को जहां रोका गया है। इंतजाम किया गया है। जवानों की संख्या ज्यादा होने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जवानों के रुकने की व्यवस्था आउटर में स्कूलों और सरकारी भवनों में कराई गई है। जबकि कमिश्नरेट इलाके में थानों में खाली पड़े स्थान में इनका इंतजाम किया गया है।
एसपी आउटर अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जो कमियों हैं उसकी जानकारी उच्चाधिकारियों और मुख्यालय को देकर दूर कराने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यालय द्वारा कोविड प्रोटोकॉल के तहत चुनाव करने का निर्देश दिया गया है। जिसके लिए भारी मात्रा में फोर्स की तैनाती होनी है। सीपीएमएफ की एक कंपनी में 130 जवान होते हैैं। यानी एक कंपनी के लिए चार बसों की जरूरत है। इलेक्शन में पांच कंपनी सीपीएमएफ और तीन कंपनी पीएसी मांगी गई है। कुछ फोर्स ने आमद भी कर ली है।
जिस हिसाब से पुलिस बल है। उस हिसाब से पुलिस के पास उनके मूवमेंट के लिए वाहन नहीं है। अब सुरक्षित चुनाव के लिए पुलिस के बेड़े में शामिल वाहनों की बात की जाए तो विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए न पुलिस के पास वज्र वाहन है और न ही पीछा करने के लिए इंटरसेप्टर। और तो और भीड़ को तितर बितर करने वाली वाटर कैनन वैन भी खराब पड़ी है।
ना आवास ना ही वाहन चालक
कमिश्नरी और आउटर में पुलिस वाहन चलाने वालों की विशेष कमी है, जिसके चलते पुलिस विभाग को परेेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि वाहन और चालकों के लिए मुख्यालय को सुझाव भेजा गया है कि आस पास के जिन प्रदेशों में चुनाव नहीं हो रहे हैैं, वहां से वाहन और चालक मंगा लिए जाए। जिसकी कवायद भी शुरू कर दी गई है।
कोविड प्रोटोकॉल के चलते ड्यूटी पर आए जवानों को जहां रोका गया है। इंतजाम किया गया है। जवानों की संख्या ज्यादा होने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जवानों के रुकने की व्यवस्था आउटर में स्कूलों और सरकारी भवनों में कराई गई है। जबकि कमिश्नरेट इलाके में थानों में खाली पड़े स्थान में इनका इंतजाम किया गया है।
एसपी आउटर अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जो कमियों हैं उसकी जानकारी उच्चाधिकारियों और मुख्यालय को देकर दूर कराने की कोशिश की जा रही है।