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UP: इस सीट पर ब्राह्मण प्रत्याशियों का बोलबाला... भाजपा को पछाड़ कांग्रेस ने किया 'खेला', यहां का इतिहास रोचक
Sun, 24 Mar 2024 10:15 AM IST
शाहरुख खान
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 24 Mar 2024 10:15 AM IST
सार
कांग्रेस ने शनिवार को उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी कर दी है। यूपी की इस सीट से पार्टी ने ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेला है। इस सीट पर ब्राह्मण प्रत्याशियों का बोलबाला रहा है। भाजपा और अन्य पार्टियों से अब तक कुल नौ ब्राह्मण चुनाव मैदान में उतरे चुके हैं।
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Kanpur Nagar Lok Sabha seat
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर महानगर लोकसभा सीट पर अभी तक भाजपा की ओर से प्रत्याशी घोषित नहीं होने की वजह से कयासबाजी तेज हो गई है। काफी दिनों से चर्चा है कि इस सीट पर पार्टी किसी ब्राह्मण प्रत्याशी को उतार सकती है। प्रत्याशी शहर से होगा या फिर बाहर से यह अभी तक तय नहीं है, वैसे नाम कई नेताओं के चर्चा में हैं।
महानगर सीट पर ब्राह्मण प्रत्याशी ही क्यों, इसके पीछे यहां की पांच विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोट बैंक का बड़ा फैक्टर बताया जा रहा है। साथ ही पिछले दो चुनाव से लगातार ब्राह्मण प्रत्याशी के जीतकर आने का भी तर्क दिया जा रहा है।
बिरादरी के हिसाब से बात की जाए तो ब्राह्मणों की संख्या लोकसभा क्षेत्र में 6.5 लाख के आसपास बताई जाती है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस ने भी 28 साल बाद ब्राह्मण प्रत्याशी के रूप में आलोक मिश्रा को मैदान में उतारा है।
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भाजपा में स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश और पार्टी राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में भी जो बातें चल रही हैं, उसमें भी ब्राह्मण प्रत्याशी का ही नाम चर्चा में है। शनिवार को दिल्ली में हुई कोर कमेटी की बैठक से जो बात छनकर आ रही हैं, उसमें भी ब्राह्मण को प्रबल दावेदार बताया जा रहा है। जितने भी सांसद भाजपा के टिकट से इस सीट पर जीते हैं, वे सभी ब्राह्मण ही रहे हैं।
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महानगर सीट पर ब्राह्मण प्रत्याशी ही क्यों, इसके पीछे यहां की पांच विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोट बैंक का बड़ा फैक्टर बताया जा रहा है। साथ ही पिछले दो चुनाव से लगातार ब्राह्मण प्रत्याशी के जीतकर आने का भी तर्क दिया जा रहा है।
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बिरादरी के हिसाब से बात की जाए तो ब्राह्मणों की संख्या लोकसभा क्षेत्र में 6.5 लाख के आसपास बताई जाती है। शायद यही वजह है कि कांग्रेस ने भी 28 साल बाद ब्राह्मण प्रत्याशी के रूप में आलोक मिश्रा को मैदान में उतारा है।
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भाजपा में स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश और पार्टी राष्ट्रीय स्तर की बैठकों में भी जो बातें चल रही हैं, उसमें भी ब्राह्मण प्रत्याशी का ही नाम चर्चा में है। शनिवार को दिल्ली में हुई कोर कमेटी की बैठक से जो बात छनकर आ रही हैं, उसमें भी ब्राह्मण को प्रबल दावेदार बताया जा रहा है। जितने भी सांसद भाजपा के टिकट से इस सीट पर जीते हैं, वे सभी ब्राह्मण ही रहे हैं।
इसमें जगतवीर सिंह द्रोण, मुरली मनोहर जोशी हो या फिर वर्तमान सांसद सत्यदेव पचौरी। सिर्फ भाजपा ही नहीं कांग्रेस में भी कई ब्राह्मण प्रत्याशी लोकसभा के चुनाव में उतारे गए। यह जरूर है कि सफलता सिर्फ नरेश चंद्र चतुर्वेदी को 1984 के चुनाव में मिली। वैसे नरेश चंद्र 1977 के चुनाव में भी कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए गए थे, लेकिन हार गए थे।
इसके अलावा पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा को भी 1996 में पार्टी ने प्रत्याशी बनाया लेकिन उन्हें भी हार का मुंह देखना पड़ा था। पिछले 28 साल से कांग्रेस में अभी तक किसी ब्राह्मण कांग्रेसी को मौका नही मिला। इस वजह से इस बार कांग्रेस में भी ब्राह्मण प्रत्याशी को लेकर आवाज उठी थी।
इस बीच कांग्रेस से आलोक मिश्रा को प्रत्याशी बना दिया गया। अब भाजपा में यह चर्चा होने लगी है कि भाजपा ब्राह्मणों के बल पर ही महानगर सीट पर अपना प्रभुत्व जमाने में कई बार कामयाब रही है। इस बार फिर से पार्टी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहेगी।
इसी वजह से महानगर सीट पर जितने भाजपा नेताओं के लड़ने की चर्चा चल रही है, उसमें 80 प्रतिशत ब्राह्मण बिरादरी से ही हैं। नीतू सिंह का नाम भी इसलिए चर्चा में चल रहा है क्योंकि वह सत्यदेव पचौरी की बेटी हैं।
कहा जा रहा है कि नीतू सिंह भी पचौरी की बेटी यानि ब्राह्मण के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। बाकी जिन ब्राह्मण दावेदारों के नाम चर्चा में चल रहे हैं, उसमें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, मालिनी अवस्थी, विधायक सुरेंद्र मैथानी, महेश त्रिवेदी, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष प्रांशु दत्त द्विवेदी शामिल हैं।
महानगर सीट से कांग्रेस के ब्राह्मण प्रत्याशी और सांसद
नरेश चंद्र चतुर्वेदी सांसद,
प्रत्याशियों में छैल बिहारी दीक्षित 1957
सूरज प्रकाश अवस्थी 1957 उपचुनाव
गणेश दत्त वाजपेयी 1967
1996 में भूधर नारायण मिश्रा
नरेश चंद्र चतुर्वेदी सांसद,
प्रत्याशियों में छैल बिहारी दीक्षित 1957
सूरज प्रकाश अवस्थी 1957 उपचुनाव
गणेश दत्त वाजपेयी 1967
1996 में भूधर नारायण मिश्रा
भाजपा से ब्राह्मण सांसद
जगतवीर सिंह द्रोण तीन बार सांसद 1991 से 1998 तक,
मुरली मनोहर जोशी 2014
सत्यदेव पचौरी 2019
जगतवीर सिंह द्रोण तीन बार सांसद 1991 से 1998 तक,
मुरली मनोहर जोशी 2014
सत्यदेव पचौरी 2019
अन्य ब्राह्मण सांसद
राजाराम शास्त्री प्रजा सोशलिस्ट पार्टी 1952
एसएम बनर्जी निर्दलीय 1957 से 1971 तक
राजाराम शास्त्री प्रजा सोशलिस्ट पार्टी 1952
एसएम बनर्जी निर्दलीय 1957 से 1971 तक