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UP: पैसा आया नहीं....अफसरों ने कागजों में बना डाले 2000 शौचालय, पंचायती राज विभाग के अफसरों का फर्जीवाड़ा

Wed, 19 Nov 2025 11:04 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर
रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 19 Nov 2025 11:04 AM IST
सार

Kanpur News: पंचायती राज विभाग के अफसरों ने शासन की मॉनीटरिंग और नोटिस से बचने के लिए बजट न होने के बावजूद 2088 शौचालयों का निर्माण कागजों पर दिखाकर स्वच्छ भारत मिशन के पोर्टल पर इंटरनेट से फर्जी तस्वीरें अपलोड कर दी हैं। हालांकि, अप्रूव करने से डर रहे हैं, क्योंकि अप्रूव होते ही फर्जीवाड़ा पकड़ा जाएगा।

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Kanpur Money hasnt arrived officers created 2000 toilets on paper fraud by Panchayati Raj Department officials
बन रहा शौचालय अधूरा - फोटो : amar ujala

विस्तार

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  • केस एक: घाटमपुर ब्लाॅक के बरीपाल गांव में रहने वाली सरोज सिंह, रीना, शाहू को लाभार्थी बनाया गया है। ब्लाॅक के जिम्मेदारों ने तीन नवंबर को शौचालय पूर्ण दिखाकर फोटो अपलोड कर दी है पर निर्माण नहीं हुआ है।
  • केस दो: सरसौल ब्लाॅक के महाराजपुर निवासी रूपाली गुप्ता, नर्वल निवासी रेखा, सरस्वती को लाभार्थी बनाया गया था। इनके शौचालय पूर्ण दिखाकर 27 मई को फोटो अपलोड कर दी लेकिन अभी तक फोटो अप्रूव नहीं की गई।
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पंचायती राज विभाग के अफसरों ने बगैर बजट आए कागजों पर 2088 शौचालयों का निर्माण कर दिया। पोर्टल पर फर्जी फोटोग्राफ अपलोड कर दिए लेकिन अप्रूव करने से डर रहे हैं, क्योंकि अप्रूव करने के बाद फोटो बदल नहीं पाएंगे। सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा बिल्हौर और चौबेपुर ब्लाॅक में हुआ है। यहां 200 लाभार्थियों के नाम पर शौचालय फीड किए गए।शासन स्तर से लगातार की जा रही मॉनीटरिंग के कारण शौचालय निर्माण की संख्या बढ़ाने के चक्कर में अफसरों ने यह फर्जीवाड़ा कर दिया। धीमे निर्माण पर डीपीआरओ मनोज कुमार को दो बार निदेशालय से नोटिस भी जारी हो चुका है।

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अमर उजाला की टीम ने घाटमपुर, सरसौल ब्लाॅक के कई ग्रामीणों से पूछताछ की जिसमें पता चला कि खाते में अभी तक पैसा नहीं आया है। हमारी जमीन पर तो एक गड्ढा तक नहीं खोदा तो शौचालय कहां से बन गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के 10 ब्लाॅकों में 8,514 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। शासन ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत दिसंबर 2024 के बाद एक भी पैसे का भुगतान जिलों को नहीं किया है। यही नहीं अभी तक वित्तीय वर्ष 2024-25 में चिह्नित लाभार्थियों को शौचालय निर्माण की दूसरी किस्त तक नहीं जारी की गई।

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बड़ी संख्या में फर्जी फोटो अपलोड करना संभव नहीं
इसके बाद भी विभागीय अफसरों और कर्मचारियों ने वाहवाही लूटने के लिए इस वित्तीय वर्ष के 2,088 शौचालय कागजों में बना दिए। ब्लाॅक के खंड प्रेरक और सचिवों ने इंटरनेट से निकाली गई या पुराने निर्माण की तस्वीरें लाभार्थी के नाम से जोड़कर पोर्टल पर अपलोड कर दी हैं। फोटो अभी तक अप्रूव नहीं की गईं क्योंकि पोर्टल पर एक बार अप्रूव होते ही फोटो बदली नहीं जा सकती और फर्जीवाड़ा उसी पल पकड़ा जाएगा। मामले की जांच हुई तो कई अफसर दोषी पाए जाएंगे, क्योंकि बिना मंजूरी के इतनी बड़ी संख्या में फर्जी फोटो अपलोड करना संभव नहीं है।

शौचालय बनाने के निर्देश दिए गए थे। किसी ब्लॉक में फर्जी फोटो अपलोड की गई हैं, तो जांच कराई जाएगी। अभी तक ऐसी कोई भी शिकायत मेरे पास नहीं आई है।  -दीक्षा जैन, सीडीओ

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