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कानपुर: डीजीक्यूए भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी का तबादला, उत्तर पुस्तिकाओं में हुई थी छेड़छाड़
Fri, 17 Dec 2021 01:22 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:22 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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कानपुर कैंट के डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) कांप्लेक्स स्थित सामान्य वस्तु नियंत्रणालय में 2016 में हुई छह क्लर्कों की भर्ती घोटाले में रक्षा मंत्रालय ने परीक्षा ऑफिसर बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी का तबादला कर दिया है।
मंत्रालय की ओर से 24 नवंबर को आदेश जारी किया गया था। उन्हें रिलीव भी कर दिया गया है। उनका दिल्ली हेडक्वार्टर तबादला हुआ है। हालांकि इतनी देरी से हुई कार्रवाई पर सवाल भी उठ रहे हैं। इसके अलावा आरोपी क्लर्कों पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है।
सीबीआई ने 22 दिसंबर को लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें डॉ. संतोष के अलावा कई क्लर्कों के खिलाफ साजिश रचने, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद से सीबीआई जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार चेयरमैन ने पास अभ्यर्थी को फेल करके अपने चहेतों को अधिक नंबर देकर पास करा दिया।
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सफेद स्याही की मदद से उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की गई थी। जांच में पता चला था कि एक अन्य रक्षा प्रतिष्ठान में कार्यरत महिला अफसर ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद भी रिजल्ट जारी किया गया था। जांच के आधार पर मंत्रालय ने यह कार्रवाई की। जांच प्रभावित करने की भी आशंका थी। अभी आरोपी क्लर्कों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
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मंत्रालय की ओर से 24 नवंबर को आदेश जारी किया गया था। उन्हें रिलीव भी कर दिया गया है। उनका दिल्ली हेडक्वार्टर तबादला हुआ है। हालांकि इतनी देरी से हुई कार्रवाई पर सवाल भी उठ रहे हैं। इसके अलावा आरोपी क्लर्कों पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है।
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सीबीआई ने 22 दिसंबर को लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें डॉ. संतोष के अलावा कई क्लर्कों के खिलाफ साजिश रचने, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद से सीबीआई जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार चेयरमैन ने पास अभ्यर्थी को फेल करके अपने चहेतों को अधिक नंबर देकर पास करा दिया।
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सफेद स्याही की मदद से उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की गई थी। जांच में पता चला था कि एक अन्य रक्षा प्रतिष्ठान में कार्यरत महिला अफसर ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद भी रिजल्ट जारी किया गया था। जांच के आधार पर मंत्रालय ने यह कार्रवाई की। जांच प्रभावित करने की भी आशंका थी। अभी आरोपी क्लर्कों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।