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कानपुर: जूनियर डॉक्टरों ने बंद कराई हैलट ओपीडी, इमरजेंसी से भी मरीजों को लौटाते रहे
Tue, 07 Dec 2021 08:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 07 Dec 2021 08:00 PM IST
सार
नीटी पीजी-2021 की काउंसलिंग न होने से आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल अभी जारी रहेगी। जूनियर डॉक्टरों के देश व्यापी आंदोलन के समर्थन में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को हैलट की ओपीडी बंद करा दी।
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कानपुर हैलट में लगी मरीजों की भीड़
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
नीट पीजी-2001 की काउंसलिंग की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने हैलट ओपीडी में रोगी पर्चा काउंटर बंद करा दिए। इससे शहर और बाहर से आए नए रोगी पर्चा बनवाने के लिए भटकते रहे। मीलों से कराहते आए मरीजों के दर्द का इलाज न हो सका। सवा तीन सौ रोगी बिना जांच कराए ही लौट गए। सीनियर कंसल्टेंट ने पुराना पर्चा लेकर आए करीब ढाई सौ रोगियों को देखा।
इसके साथ ही हैलट इमरजेंसी में आने वाले रोगियों को हड़ताल बताकर लौट जाने के लिए कहा जाता रहा। इसी चक्कर में बहुत से रोगी लौट गए। बहुत से लोग हैलट से अपना मरीज लेकर निजी अस्पताल चले गए। मंगलवार सुबह हैलट ओपीडी के काउंटर पर सिर्फ चार पर्चे बन पाए थे कि जूनियर डॉक्टरों ने काउंटर बंद करा दिए। लाइन में खड़े लोगों ने एतराज जताया और हंगामा किया।
कंसल्टेंट अपनी ओपीडी में बैठे जरूर लेकिन सिर्फ फॉलोअप में आने वाले पुराने पर्चे पर रोगियों को देखा। दोपहर 12 बजे तक मेडिसिन की ओपीडी में गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार ने 54, फिजीशियन डॉ. ललित कुमार ने 53 रोगियों को देखा। मंगलवार को प्राचार्य डॉ. संजय काला की भी सर्जरी ओपीडी रही है। वहां सिर्फ 10 रोगी देखे गए। न्यूरो सर्जरी में डॉ. राघवेंद्र गुप्ता ने 100 रोगी देखे।
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जेआर-1 की हड़ताल के समर्थन में जेआर-2 और सीनियर रेजीडेंट ने भी काम बंद कर दिया है। कंसल्टेंट के साथ सिर्फ इंटर्न छात्र काम करते रहे। ओपीडी से किसी रोगी को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया। इसके साथ ही जो रोगी इमरजेंसी में आए, उनमें से कई बाहर से ही वापस कर दिए गए। इसके साथ ही स्थिर हुए कुछ रोगियों को डिस्चार्ज कर दिया गया।
ओपीडी में पर्चा न बन पाने से कई रोगी इमरजेंसी आए लेकिन यहां भी उनका पर्चा नहीं बन पाया और सीढ़ियों पर मायूस बैठे रहे। औरैया, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, फतेहपुर, कौशांबी, उन्नाव, हरदोई आदि जिलों के मरीजों को लौटना पड़ा। कई रोगियों को प्रोस्ट्रेट, अपेंडिक्स, आंत आदि का ऑपरेशन कराना है।
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इसके साथ ही हैलट इमरजेंसी में आने वाले रोगियों को हड़ताल बताकर लौट जाने के लिए कहा जाता रहा। इसी चक्कर में बहुत से रोगी लौट गए। बहुत से लोग हैलट से अपना मरीज लेकर निजी अस्पताल चले गए। मंगलवार सुबह हैलट ओपीडी के काउंटर पर सिर्फ चार पर्चे बन पाए थे कि जूनियर डॉक्टरों ने काउंटर बंद करा दिए। लाइन में खड़े लोगों ने एतराज जताया और हंगामा किया।
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कंसल्टेंट अपनी ओपीडी में बैठे जरूर लेकिन सिर्फ फॉलोअप में आने वाले पुराने पर्चे पर रोगियों को देखा। दोपहर 12 बजे तक मेडिसिन की ओपीडी में गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट डॉ. विनय कुमार ने 54, फिजीशियन डॉ. ललित कुमार ने 53 रोगियों को देखा। मंगलवार को प्राचार्य डॉ. संजय काला की भी सर्जरी ओपीडी रही है। वहां सिर्फ 10 रोगी देखे गए। न्यूरो सर्जरी में डॉ. राघवेंद्र गुप्ता ने 100 रोगी देखे।
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जेआर-1 की हड़ताल के समर्थन में जेआर-2 और सीनियर रेजीडेंट ने भी काम बंद कर दिया है। कंसल्टेंट के साथ सिर्फ इंटर्न छात्र काम करते रहे। ओपीडी से किसी रोगी को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया। इसके साथ ही जो रोगी इमरजेंसी में आए, उनमें से कई बाहर से ही वापस कर दिए गए। इसके साथ ही स्थिर हुए कुछ रोगियों को डिस्चार्ज कर दिया गया।
ओपीडी में पर्चा न बन पाने से कई रोगी इमरजेंसी आए लेकिन यहां भी उनका पर्चा नहीं बन पाया और सीढ़ियों पर मायूस बैठे रहे। औरैया, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, फतेहपुर, कौशांबी, उन्नाव, हरदोई आदि जिलों के मरीजों को लौटना पड़ा। कई रोगियों को प्रोस्ट्रेट, अपेंडिक्स, आंत आदि का ऑपरेशन कराना है।
मरीजों की पीड़ा
पेट में तकलीफ है, दिखाने आए हैं। यहां लोग कह रहे हैं कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। अब किसे दिखाएं। तकलीफ बहुत है। सुबह जल्दी-जल्दी घर का कामकाज निपटाकर आए थे। बिना दिखाए जाना पड़ेगा।
नीलम, महाराजपुर
पीठ में बहुत दर्द रहता है। 80 साल के हैं, बड़ी मुश्किल से यहां आ पाए। यहां पहुंचे तो कोई देख नहीं रहा है। बता रहे हैं कि डॉक्टर नहीं देखेंगे। वे हड़ताल कर रहे हैं। बहुत परेशान हो रहे हैं। डेढ़-दो घंटे हो गए भटकते हुए।
चंद्रकली, नानकारी
आंख में बहुत तकलीफ है। जोड़ों में दर्द रहता है। सवेरे ही घर से चल दिए थे। बस से आए हैं। हैलट सुबह 8:30 बजे पहुंच गए थे। काउंटर खुला और फिर बंद कर दिया। समझ में नहीं आ रहा है कि अब क्या करें?
मायादेवी, औरैया
कमर में तकलीफ है। बहुत परेशान हैं। अस्पताल दिखाने के लिए आए हैं। लेकिन यहां सब काउंटर बंद हैं। पर्चा बन ही नहीं रहा है। कर्मचारी बता रहे हैं कि डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। नए रोगी देखने के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
वीरेंद्र कुमार अग्रवाल, नौबस्ता
पेट में तकलीफ है, दिखाने आए हैं। यहां लोग कह रहे हैं कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। अब किसे दिखाएं। तकलीफ बहुत है। सुबह जल्दी-जल्दी घर का कामकाज निपटाकर आए थे। बिना दिखाए जाना पड़ेगा।
नीलम, महाराजपुर
पीठ में बहुत दर्द रहता है। 80 साल के हैं, बड़ी मुश्किल से यहां आ पाए। यहां पहुंचे तो कोई देख नहीं रहा है। बता रहे हैं कि डॉक्टर नहीं देखेंगे। वे हड़ताल कर रहे हैं। बहुत परेशान हो रहे हैं। डेढ़-दो घंटे हो गए भटकते हुए।
चंद्रकली, नानकारी
आंख में बहुत तकलीफ है। जोड़ों में दर्द रहता है। सवेरे ही घर से चल दिए थे। बस से आए हैं। हैलट सुबह 8:30 बजे पहुंच गए थे। काउंटर खुला और फिर बंद कर दिया। समझ में नहीं आ रहा है कि अब क्या करें?
मायादेवी, औरैया
कमर में तकलीफ है। बहुत परेशान हैं। अस्पताल दिखाने के लिए आए हैं। लेकिन यहां सब काउंटर बंद हैं। पर्चा बन ही नहीं रहा है। कर्मचारी बता रहे हैं कि डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। नए रोगी देखने के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
वीरेंद्र कुमार अग्रवाल, नौबस्ता