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Kanpur: बदहाली के कैंसर से जूझ रहा जेके संस्थान, नए विभागों में शिक्षकों की कमी…रेजीडेंट डॉक्टर नहीं मिले

Tue, 07 Oct 2025 12:30 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 07 Oct 2025 12:30 PM IST
सार

Kanpur News: निदेशक डॉ. प्रसाद का कहना है कि एमसीएच और डीएम डिग्री वाले चिकित्सा शिक्षकों की जरूरत है। इनके साथ ही पीजी को भी मांगा गया है। डीजीएमई कार्यालय पीजी एलॉट करता है। इस संबंध में बराबर रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

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Kanpur JK Institute is battling the cancer of disrepair lack of teachers in new departments
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 20 नवंबर 2023 को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने याचिका समिति की बैठक के बाद जेके कैंसर इंस्टीट्यूट को सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाने का वादा किया था। वहां मौजूद तत्कालीन प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा को निर्देश भी दिए, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। 22 अप्रैल 2025 को तीन नए विभाग शुरू करने के आदेश हुए, लेकिन चिकित्सा शिक्षक ही पूरे नहीं मिल पाए। सीटें सृजित होने के बावजूद रेजीडेंट डॉक्टर एलॉट नहीं हुए।

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बदहाली के कैंसर से इंस्टीट्यूट जूझ रहा है। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में तीन नए विभागों के लिए फैकल्टी, रेजीडेंट डॉक्टर और स्टाफ के पद सृजित हैं लेकिन सभी पद भर नहीं पाए हैं। फैकल्टी पूरी न होने के कारण पीजी छात्र यानी रेजीडेंट भी नहीं मिले। इससे इंस्टीट्यूट का पीजी फंड भी अटका है। रोगियों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उपकरण खराब होने से बायोप्सी जांच शुरू नहीं हो पाई। कैंसर रोगियों की सेंकाई के लिए लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन भी नहीं मिल पाई।

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नए उपकरणों की खरीदारी में आएगी बाधा
इंस्टीट्यूट में सर्जिकल आंकोलॉजी, पैथोलॉजी और अनेस्थेसिया विभाग खुले हैं। इस संबंध में शासनादेश 22 अप्रैल को जारी हो गया था लेकिन महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय ने रेजीडेंट डॉक्टरों को आवंटित नहीं किया है। बिना रेजीडेंट के पीजी फंड नहीं मिलेगा। इससे नए उपकरणों की खरीदारी में बाधा आएगी। इसके साथ ही रोगियों की सुविधा भी बाधित रहेगी।

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अनेस्थेसिया का ढंग से नहीं हो पा रहा उपयोग
सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में अभी सिर्फ एक संविदा डॉक्टर हैं। विभाग में एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट और एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति होनी है। निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि चिकित्सा शिक्षकों के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अनेस्थेसिया विभाग में दो नियमित एसोसिएट प्रोफेसर और एक संविदा वाले प्रोफेसर हैं लेकिन अनेस्थेसिया सर्जरी विभाग से जुड़ा होता है। सर्जरी विभाग खाली होने से अनेस्थेसिया का ढंग से उपयोग नहीं हो पा रहा।

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एमसीएच और डीएम डिग्री वाले चिकित्सा शिक्षकों की जरूरत
पैथोलॉजी में एक नियमित एसोसिएट प्रोफेसर और एक संविदा वाले असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, लेकिन प्रोफेसर कोई नहीं है। पीजी के लिए प्रोफेसर होना जरूरी है। निदेशक डॉ. प्रसाद का कहना है कि एमसीएच और डीएम डिग्री वाले चिकित्सा शिक्षकों की जरूरत है। इनके साथ ही पीजी को भी मांगा गया है। डीजीएमई कार्यालय पीजी एलॉट करता है। इस संबंध में बराबर रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

पीजी छात्रों की सीट

सर्जिकल आंकोलॉजी

  • सीनियर रेजीडेंट-छह
  • जूनियर रेजीडेंट-छह


अनेस्थेसिया

  • सीनियर रेजीडेंट-तीन
  • जूनियर रेजीडेंट-तीन


पैथोलॉजी

  • सीनियर रेजीडेंट - तीन
  • जूनियर रेजीडेंट - तीन
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