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कानपुर: आधार में जिया राम खतौनी में जै राम, नहीं हो पा रही है फार्मर रजिस्ट्री, रोजाना तहसीलों के चक्कर काट रह

Thu, 27 Aug 2026 11:56 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 27 Aug 2026 11:56 AM IST
सार

Kanpur News: आधार कार्ड और खतौनी में नाम की मामूली वर्तनी की गलतियों के कारण हजारों किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इसके चलते किसानों को खरीफ सीजन में डीएपी और यूरिया जैसी खाद मिलने में दिक्कत आ रही है और वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। 

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Kanpur Jiya Ram in Aadhaar but Jai Ram  in land records Farmer Registry stalled
फार्मर रजिस्ट्री कराने को किसानों की लगी भीड़ - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में आधार कार्ड और खतौनी में नाम की मामूली गड़बड़ी से हजारों किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। आधार में कन्हैया लाल तो खतौनी में कैन्हयालाल, जिया राम की जगह जै राम तो कहीं नाम के आगे सिंह या कुमार नहीं होने जैसी मामूली गलतियां किसानों के जी का जंजाल बन गई हैं। फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाने का सीधा असर किसानों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं पर पड़ रहा है।

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सबसे बड़ी चिंता यह है कि खरीफ सीजन में किसानों को न तो समय पर डीएपी मिल रही है न यूरिया। नाम में अंतर के कारण किसान रोजाना तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों के निर्देश पर शपथ पत्र भी जमा कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद नामों में सुधार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही। नतीजा यह है कि खेतों में फसल खड़ी है और किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

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खतौनी में जै राम दर्ज होने से उनकी फार्मर रजिस्ट्री अटक गई
कल्याणपुर ब्लॉक के मोहम्मदपुर गांव के एक किसान के आधार कार्ड में नाम श्री किशन दर्ज है जबकि खतौनी में श्री कृष्ण लिखा हुआ है। इसी तरह रमेल कछार के एक किसान के आधार में नाम जिया राम है लेकिन खतौनी में जै राम दर्ज होने से उनकी फार्मर रजिस्ट्री अटक गई है। ऐसे ही कई मामले किसानों के गले की फांस बन गए हैं। जिले में 2.85 लाख खतौनी बनाने का लक्ष्य है।

दस्तावेजों के मिलान की व्यवस्था नहीं थी
इसमें से अभी तक 2.34 लाख किसानों की खतौनी बन चुकी है।  खतौनी की इस प्रगति से प्रदेश में जिला 56वें स्थान पर चल रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कि 30-35 वर्ष पहले खतौनी में नाम दर्ज करते समय प्रचलित नाम ही लिख दिए जाते थे। उस समय दस्तावेजों के मिलान की व्यवस्था नहीं थी।

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किसान खेतों से ज्यादा तहसीलों के चक्कर लगा रहे
इसके बाद में आधार कार्ड बनाते समय भी कई लोगों के नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज हो गए। अब डिजिटल रिकॉर्ड के मिलान में यही अंतर किसानों के लिए सबसे बड़ी आफत बन गया है। खरीफ सीजन के समय किसान खेतों से ज्यादा तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि नाम की छोटी सी गलती ने उन्हें सरकारी व्यवस्था के सामने बेबस कर दिया है।

आधार और खतौनी के नामों में संशोधन कराने के लिए लगातार गांव-गांव कैंप लगाए जा रहे हैं। काफी किसानों के नाम संशोधित हो चुते हैं और लगातार किए जा रहे हैं। खतौनी और आधार में नाम एक होने के बाद ही फार्मर रजिस्ट्री बनेगी।  -विनय द्विवेदी, तहसीलदार सदर

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