Kanpur: 10 हजार करोड़ के झटके में उद्योग, उत्पादन बचा 30%, एक शिफ्ट में चल रहीं फैक्ट्रियां, ये उत्पाद महंगे
Kanpur News: पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते कानपुर के प्रमुख उद्योगों का 10,000 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। कच्चे माल की कमी और निर्यात ठप होने से फैक्ट्रियों में उत्पादन 30% रह गया है और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं।
विस्तार
अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध का संकट खत्म होता नहीं दिख रहा है। युद्ध का व्यापक असर शहर के चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, पैकेजिंग, केमिकल उद्योग पर है। 10 हजार करोड़ का उत्पादन, आयात-निर्यात प्रभावित हो चुका है। इकाइयों में उत्पादन एक शिफ्ट में ही चल रहा है। कच्चे माल की किल्लत, प्लास्टिक दाना महंगा होने से हर प्रमुख उद्योग का उत्पादन 30 प्रतिशत ही रह गया है। अब साबुन-डिटर्जेंट भी महंगा हो गया है।
पैकिंग उत्पाद महंगा होने से दाम बढ़ गए हैं। कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में चमड़ा और चमड़ा के बने उत्पादों की 250 से ज्यादा इकाइयां हैं। यहां से सालाना छह हजार करोड़ से ज्यादा का निर्यात होता है। चमड़ा उद्योग के लिए अलग-अलग प्रकार का चमड़ा, केमिकल विश्व के अलग-अलग देशों से आता है। कच्चा तेल महंगा होने और ईंधन संकट के चलते कच्चा माल के दाम या तो बढ़ गए हैं या फिर बाजार में उपलब्ध नहीं है।
इकाइयों में कच्चे माल का संकट है
खाड़ी देशों में भी निर्यात प्रभावित है। कुछ देशों को तो निर्यात पूरी तरह से बंद हो गया है। शहर में टेक्सटाइल, रेडीमेड, होजरी उत्पादों की दो हजार से अधिक इकाइयां हैं। इन इकाइयों में भी कच्चे माल का संकट है। प्रिंटिंग-पैकेजिंग की 250 और इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, केमिकल की 300 से ज्यादा इकाइयां हैं। इन सभी इकाइयों में अब एक शिफ्ट में ही काम हो रहा है। जिस इकाई में तीन शिफ्ट चलती थीं, वहां पर केवल दो शिफ्ट ही बची हैं।
कीमतों में वृद्धि का सीधा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा
जहां पर दो शिफ्ट थीं, अब वहां पर एक बंद कर दी गई है। अलग-अलग कच्चा माल 40-50 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। उद्यमियों ने बताया कि उत्पादों की लॉजिस्टिक कास्ट बढ़ने से कानपुर में आयातित होने वाले उत्पाद व वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। कच्चे माल की कमी और कीमतों में वृद्धि का सीधा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा। इसके चलते पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है। घरेलू उद्योगों में 70 प्रतिशत उत्पादन रह गया है। चमड़ा, केमिकल, प्लास्टिक, कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्यादा प्रभाव है।
700 करोड़ का निर्यात रुका, नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे
28 फरवरी से चल रहे से खाड़ी देशों को 700 करोड़ का निर्यात रुक गया है। नए निर्यात ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। कच्चे तेल के दामों में अनिश्चितता और आयात वस्तुओं के दाम बढ़ने से स्थितियां बिगड़ रही हैं। घरेलू उद्योगों के कच्चा माल का आयात भी रुक गया है। 1200-1300 करोड़ का आयात भी फंसा है। बताया गया कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देशों में शामिल सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन के अलावा इस्राइल, ईरान में निर्यात ठप हो गया है। 30 दिन में करीब 700 करोड़ का निर्यात प्रभावित हुआ है। इसमें 400 करोड़ का चमड़ा और चमड़ा का उत्पाद, 50 करोड़ से ज्यादा का किचन सब्जी मसाला, 200 करोड़ के करीब गारमेंट, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, इंजीनियरिंग आदि का निर्यात ठप है।
घरेलू उद्योगों में 60-70 प्रतिशत उत्पादन घट गया है। युद्ध से चमड़ा, केमिकल, कपड़ा, प्लास्टिक उद्योग पर गहरा संकट पड़ चुका है। प्लास्टिक से जुड़ा हर कच्चा माल महंगा होने से इससे जुड़ी हर चीज महंगी हो गई है। 31 दिन से चल रहे युद्ध से 8000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान एमएसएमई को हुआ है। निर्यातकों का माल डंप पड़ा है। पैकेजिंग उत्पाद महंगा होने से साबुन और डिटर्जेंट भी महंगा हो गया है। -संदीप अवस्थी, कानपुर चैप्टर अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
इस्राइल, ईरान, जीसीसी देशों में निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। आने वाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। नए निर्यात ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। उत्पादों की लॉजिस्टिक कास्ट बढ़ने से कानपुर में आयातित होने वाले उत्पाद व वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। कच्चे माल की कमी और कीमतों में वृद्धि का सीधा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा। इसके चलते पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है। शहर के निर्यातकों-आयातकों को दो हजार करोड़ का झटका अब तक लग चुका है। -आलोक श्रीवास्तव, सहायक निदेशक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो)