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Kanpur: होर्डिंग चमक रहीं, अफसरों की आंखें बंद, नगर निगम की लापरवाही से राजस्व को भारी नुकसान
Mon, 16 Jun 2025 01:51 PM IST
शिखा पांडेय
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:51 PM IST
सार
Kanpur News: नई नियमावली में चौराहों से 50 मीटर तक विज्ञापन पट नहीं लग सकते। सार्वजनिक स्थानों में तीन हजार से ज्यादा होर्डिंग लगीं हैं। सभी अवैध हैं।
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किदवई नगर चौराहे पर लगी होर्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चाैराहों और सड़कों के किनारे बांस-बल्लियों और एंगल के सहारे तीन हजार से ज्यादा होर्डिंग लगी हैं। ये सभी अवैध हैं। इनसे हादसों का भी खतरा है। इसके बावजूद नगर निगम के अफसर फाइलों में नियम और सड़कों पर आंखें बंद किए हैं। इससे नगर निगम को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नगर निगम ने राज्यपाल से स्वीकृति के बाद 2021 में नई विज्ञापन नियमावली लागू की। इसके अनुसार, फुटपाथ सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों में दो पायों वाली होर्डिंग पर रोक है। होर्डिंग निजी भवनों में सशर्त लग सकती हैं। चौराहों से 50 मीटर दूर तक विज्ञापन पट लगाना प्रतिबंधित है, पर यह नियमावली फाइलों में ही बंद है। इसका पालन नहीं हाे रहा है।
हालांकि, नगर निगम भी बांस-बल्लियों, एंगल के सहारे होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं दे रहा है। इसके बावजूद अवैध रूप से होर्डिंग लगाई गई हैं। जाजमऊ, नौबस्ता, भौंती समेत शहर के अन्य प्रवेश द्वारों से लेकर चमनगंज, कोपरगंज जैसी घनी आबादी वाले मोहल्लों में तीन हजार ज्यादा अवैध होर्डिंग लगी हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत में राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के चेहरे, नाम नजर आते हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं की सर्वाधिक होर्डिंग, बोर्ड आदि लगे हैं। अन्य का व्यवसायिक ताैर पर उपयोग कर विज्ञापन एजेंसियां करोड़ों रुपये कमा रही हैं।
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नगर निगम ने राज्यपाल से स्वीकृति के बाद 2021 में नई विज्ञापन नियमावली लागू की। इसके अनुसार, फुटपाथ सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों में दो पायों वाली होर्डिंग पर रोक है। होर्डिंग निजी भवनों में सशर्त लग सकती हैं। चौराहों से 50 मीटर दूर तक विज्ञापन पट लगाना प्रतिबंधित है, पर यह नियमावली फाइलों में ही बंद है। इसका पालन नहीं हाे रहा है।
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हालांकि, नगर निगम भी बांस-बल्लियों, एंगल के सहारे होर्डिंग लगाने की अनुमति नहीं दे रहा है। इसके बावजूद अवैध रूप से होर्डिंग लगाई गई हैं। जाजमऊ, नौबस्ता, भौंती समेत शहर के अन्य प्रवेश द्वारों से लेकर चमनगंज, कोपरगंज जैसी घनी आबादी वाले मोहल्लों में तीन हजार ज्यादा अवैध होर्डिंग लगी हैं। इनमें करीब 20 प्रतिशत में राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के चेहरे, नाम नजर आते हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं की सर्वाधिक होर्डिंग, बोर्ड आदि लगे हैं। अन्य का व्यवसायिक ताैर पर उपयोग कर विज्ञापन एजेंसियां करोड़ों रुपये कमा रही हैं।
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पुलिस ट्रैफिक बूथ पर चारों तरफ से लगी होर्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
अवैध होर्डिंग के पांच हजार रुपये तक होती वसूली
बांस-बल्लियों या पोल पर लगीं तमाम होर्डिंग कमजोर हैं। आंधी-पानी में इनके गिरने का खतरा बना रहता है। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक अवैध होर्डिंग के दो से पांच हजार रुपये तक सुविधा शुल्क वसूला जाता है। यही वजह है कि इन्हें तोड़ा नहीं जाता। खानापूरी और कार्रवाई के नाम पर वही अवैध होर्डिंग तोड़ी जाती हैं, जिनमें सुविधा शुल्क नहीं मिलता है।
बांस-बल्लियों या पोल पर लगीं तमाम होर्डिंग कमजोर हैं। आंधी-पानी में इनके गिरने का खतरा बना रहता है। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक अवैध होर्डिंग के दो से पांच हजार रुपये तक सुविधा शुल्क वसूला जाता है। यही वजह है कि इन्हें तोड़ा नहीं जाता। खानापूरी और कार्रवाई के नाम पर वही अवैध होर्डिंग तोड़ी जाती हैं, जिनमें सुविधा शुल्क नहीं मिलता है।
अवैध होर्डिंग हटाने के लिए जल्द ही बृहद स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। शहर भर से अवैध होर्डिंग हटाई जाएंगी। - विनय प्रताप सिंह, प्रभारी अधिकारी विज्ञापन, नगर निगम
किदवई नगर साइट नंबर 1 चौराहे पर लगी होर्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
यह है नई विज्ञापन नियमावली
सन् 2021 में लागू हुई नई विज्ञापन नियमावली में शहर को चार श्रेणियों में बाटा गया है। इनमें से प्रवर श्रेणी में विज्ञापन पट लगाने का सर्वाधिक शुल्क है। इसके अलावा ए, बी और सी श्रेणी हैं।
प्रवर श्रेणी में सर्वाधिक विज्ञापन शुल्क : इस श्रेणी में स्वरूपनगर, मुरे कंपनी पुल से माल रोड में मेघदूत तिराहा, सिविल लाइंस में आदर्श व्यायामशाला से कचहरी चौराहा, जीटी रोड में रामादेवी से आईआईटी, गुमटी, कल्याणपुर क्राॅसिंग से अर्मापुर आदि।
सन् 2021 में लागू हुई नई विज्ञापन नियमावली में शहर को चार श्रेणियों में बाटा गया है। इनमें से प्रवर श्रेणी में विज्ञापन पट लगाने का सर्वाधिक शुल्क है। इसके अलावा ए, बी और सी श्रेणी हैं।
प्रवर श्रेणी में सर्वाधिक विज्ञापन शुल्क : इस श्रेणी में स्वरूपनगर, मुरे कंपनी पुल से माल रोड में मेघदूत तिराहा, सिविल लाइंस में आदर्श व्यायामशाला से कचहरी चौराहा, जीटी रोड में रामादेवी से आईआईटी, गुमटी, कल्याणपुर क्राॅसिंग से अर्मापुर आदि।
चावला मार्केट चौराहे पर लगी होर्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
ए-श्रेणी के मोहल्ले : एक्सप्रेस रोड, घंटाघर से टाटमिल चौराहा, बाकरगंज से किदवईनगर चौराहा, रामादेवी चौराहा और उसके आसपास का क्षेत्र, जरीबचौकी रेलवे क्राॅसिंग से फजलगंज चौराहा, मरियमपुर हॉस्पिटल से कोकाकोला चौराहा आदि।
बी-श्रेणी के मोहल्ले : अहिरवां, सनिगवां, कोयलानगर, पोखरपुर, अवधपुरी मोड़ से सेल्सटैक्स रोड, कंपनीबाग चराहे से रामचंद्र चौराहा, चिड़ियाघर से एचबीटीयू गेट, बंबा रोड, कल्याणपुर आदि।
सी-श्रेणी के मोहल्ले : प्रवर, ए एवं बी से बचीं सभी आंतरिक सड़कें।
ये हैं प्रतिबंधित क्षेत्र
फुटपाथ, सरकारी भवन, दीवारें, उद्यान की दीवारें।
पांच करोड़ का लक्ष्य, वसूली सिर्फ 3.28 करोड़
नगर निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष में विज्ञापन मद में पांच करोड़ रुपये से ज्यादा वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन मात्र 3.28 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई। इसमें भी पिछले वित्तीय वर्षों के करीब ढाई करोड़ रुपये शामिल हैं। उससे पहले इस मद में नगर निगम को एक साल में मात्र 90 लाख रुपये राजस्व मिला था। चालू वित्तीय वर्ष में भी इस मद में पांच करोड़ रुपये से ज्यादा वसूली का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन इस बार भी लक्ष्य पूरा न हो पाने की आशंका जताई जा रही है।
बी-श्रेणी के मोहल्ले : अहिरवां, सनिगवां, कोयलानगर, पोखरपुर, अवधपुरी मोड़ से सेल्सटैक्स रोड, कंपनीबाग चराहे से रामचंद्र चौराहा, चिड़ियाघर से एचबीटीयू गेट, बंबा रोड, कल्याणपुर आदि।
सी-श्रेणी के मोहल्ले : प्रवर, ए एवं बी से बचीं सभी आंतरिक सड़कें।
ये हैं प्रतिबंधित क्षेत्र
फुटपाथ, सरकारी भवन, दीवारें, उद्यान की दीवारें।
पांच करोड़ का लक्ष्य, वसूली सिर्फ 3.28 करोड़
नगर निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष में विज्ञापन मद में पांच करोड़ रुपये से ज्यादा वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन मात्र 3.28 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई। इसमें भी पिछले वित्तीय वर्षों के करीब ढाई करोड़ रुपये शामिल हैं। उससे पहले इस मद में नगर निगम को एक साल में मात्र 90 लाख रुपये राजस्व मिला था। चालू वित्तीय वर्ष में भी इस मद में पांच करोड़ रुपये से ज्यादा वसूली का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन इस बार भी लक्ष्य पूरा न हो पाने की आशंका जताई जा रही है।