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कानपुर ठगी मामला: वैध तरीके से बनवाते थे फर्जी दस्तावेज, महंगी कारों का शौकीन है मास्टरमाइंड, ऐसे हुआ खुलासा

Sat, 21 Feb 2026 06:16 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 21 Feb 2026 06:16 AM IST
सार

Kanpur News: बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम कर चुके अंग्रेजी भाषी शातिरों ने फर्जी फर्मों के जरिए सात समंदर पार ठगी का नेटवर्क खड़ा किया। मास्टरमाइंड ने ठगी के पैसों से मुंबई में 50 करोड़ का बंगला और करोड़ों की गाड़ियां खरीदीं, लेकिन एक असली पते ने पूरे गिरोह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

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Kanpur fraud case Fake documents were made legally mastermind is fond of expensive cars
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में विदेश के कारोबारियों और उद्यमियों से ठगी के लिए गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेजों को वैध तरीके से तैयार कराते थे। उन्हीं दस्तावेजों के सहारे डील होती थी। यह साक्ष्य पुलिस और साइबर सेल को मिले हैं। पनकी औद्योगिक क्षेत्र के अपट्रॉन स्टेट में भी फर्म खोलने के लिए आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड, बिजली के बिल और अन्य दस्तावेजों का सहारा लिया था। पुलिस की जांच में न तो कोई फर्म मिली और न ही कोई खाताधारक मिला।

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डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि नौबस्ता पशुपतिनगर निवासी अरविंद यादव के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, बिजली का बिल और जीएसटी नंबर लिया गया था। आरोपियों ने अरविंद यादव के नाम से चेक गणराज्य के कारोबारी गैंगेला की कंपनी से संपर्क किया। करीब दो करोड़ की ठगी होने के बाद गैंगेला ने अरविंद यादव और रामकुमार राय के खिलाफ शिकायत दी थी। इन्हीं के बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस की जांच में अब तक दोनों नाम फर्जी होने की जानकारी हुई है। फिलहाल इन दोनों की तलाश जारी है।

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म्यूल अकाउंट खोलकर मंगवाते थे रुपये
पनकी थाना प्रभारी मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि आरोपी इससे पूर्व की गई ठगी में म्यूल अकाउंट खोलकर रुपये मंगवाते थे। विदेशी होने की वजह से वहां के कारोबारी इसकी शिकायत भारत के अलग-अलग राज्यों की पुलिस से नहीं किया करते थे। चेक गणराज्य के कारोबारी ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय को ईमेल किया जिससे जांच शुरू हुई। आरोपियों में से एक ने फर्जी दस्तावेजों में एक दस्तावेज असली लगा दिया, जिसकी वजह से गिरोह पकड़ा गया। उन्होंने सामान्य सी डिलिवरी के लिए अपने असली घर का पता दे दिया था।

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अमित मास्टरमाइंड, मल्टीनेशनल कंपनी में करते थे कार्य
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक झांसी का अमित ओम प्रकाश शर्मा मास्टरमाइंड है। उसने नौबस्ता के आकाश कुमार और अन्य सदस्यों के साथ गिरोह तैयार किया। सभी पूर्व में किसी न किसी मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे। उनका विदेश आना-जाना था। अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में काफी अच्छी पकड़ है। विदेश की कंपनियों से डील किसी प्रोफेशनल की तरह करते थे।

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बीएमडब्ल्यू और अन्य कारों का शौक
साइबर सेल के प्रभारी शुभम यादव ने बताया कि गिरोह के सदस्यों के पास बीएमडब्ल्यू और अन्य महंगी कारें हैं। मास्टरमाइंड का मुंबई में 50 करोड़ से अधिक का घर है। एक आरोपी के पास 100 ऑटो हैं जिनको किराये पर चलवा रहा है। टीम के शुक्रवार को आने के बाद काफी कुछ और जानकारियां मिलेंगी।

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