Kanpur Fire Accident: कासिफ मेरे भाई, आग लग गई…जान बचाओ, चार मिनट में दानिश ने दो बार मिलाया था फोन
Kanpur Fire Accident News: दानिश ने फोन उठते ही चीखते हुए कहा कि कासिफ कहां हो, घर में आग लगी है। एक पल के लिए तो कुछ समझ ही नहीं आया। तब तक फोन कट गया। जब तक कुछ समझ पाता 9:14 बजे दानिश भाई का फोन आ गया। बोले कासिफ..मेरे भाई आग लग गई…जान बचाओ।
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Tragic Fire Accident In Kanpur: कासिफ मेरे भाई... आग लग गई.. जान बचाओ। दानिश के ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे हैं। घर की ओर देखता हूं तो लगता है आग से तड़प रहे भाई-भाभी बचाने के लिए मदद मांग रहे हैं। आंख बंद करता हूं तो आग से घिरी बच्चियां नजर आ रही हैं। आंसुओं के सैलाब के साथ रुंधे गले से ये बात मोहम्मद कासिफ ने कही।
कासिफ के बड़े भाई दानिश, भाभी नाजली और तीन मासूम भतीजियों ने आग में जलकर दम तोड़ दिया था। कासिफ को इस बात का मलाल है कि वह आखिरी पलों में भाई की मदद नहीं कर सके। मंगलवार दोपहर करीब 12:20 बजे कासिफ अपने उसी घर के सामने पड़ी कुर्सियों पर नीचे सिर झुकाए बैठे सिसकते दिखे। कासिफ, उस दिन क्या हुआ था।
गला रुंध गया और शब्द अधूरे रह गए
सवाल सुनते ही उसकी सिसकियां रोने में बदल गई और आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बोले, थोड़ी देर पहले ही तो परिवार के साथ घर से गया था। क्या पता था कि जाजमऊ नहीं, भाई से हमेशा के लिए दूर जा रहा हूं। वह मुझसे चार साल बड़े थे, लेकिन एक वालिद (पिता) की तरह मेरा ख्याल रखते थे। कहते-कहते उनका गला रुंध गया और शब्द अधूरे रह गए।
कासिफ कहां हो, घर में आग लगी है
पास बैठे शख्स के कंधे पर सिर टिका कर काफी देर बिलखते रहे। एक दोस्त ने पीने के लिए पानी की बोतल दी तो चंद बूंदे गले से नीचे उतारने के बाद चश्मा पोंछते हुए बोले, उस रात 9: 12 मिनट पर सामने वाले इमरान भाई का फोन आया। फोन उठाते ही चीखते हुए बोले, कासिफ कहां हो, घर में आग लगी है। एक पल के लिए तो कुछ समझ ही नहीं आया।
बदहवास होकर घर की ओर भागे कासिफ
तब तक फोन कट गया। जब तक कुछ समझ पाता 9:14 बजे दानिश भाई का फोन आ गया। बोले कासिफ..मेरे भाई आग लग गई…जान बचाओ। इसके बाद उनके कुछ कहने से पहल ही फोन कट गया। बदहवास होकर वो घर की ओर भागे। इस बीच भाई ने फिर फोन मिलाया, लेकिन वह उठा न सके। जेब से फोन निकाल कर दिखाते हुए बोले, बाद में देखा तो 9:16 मिनट पर उसकी ये मिस कॉल पड़ी थी।
आखिरी फोन को न उठा पाने का मलाल
उसके बाद भाई को कई बार फोन मिलाया लेकिन नहीं मिला। मदद के लिए आए भाई के आखिरी फोन को न उठा पाने के मलाल में खुद को कोस रहा कासिफ ने रोते हुए कहा कि मेरी तकलीफों को बिना कहे समझने वाला भाई उन्हें छोड़कर चला। इसके बाद कासिफ दोनों हाथ से आंसुओं को पोंछते हुए निशब्द हो गए और सिसकियां तेज हो गईं।
उन्नाव के बंथरा में जूते का कारखाना लगा रहा था दानिश
घर पर जूते का स्टॉक रखे होने के बारे में पूछने पर बताया कि यहां केवल माल रखा था। कारखाना एक साल से बंद पड़ा है। दानिश उन्नाव के बंथरा में कारखाना लगा रहा है। जगह तक फाइनल थी, उम्मीद थी कि दिसंबर तक वहां पर प्रोडक्शन शुरू हो जाता। अगस्त सितंबर तक मशीनें आनी थीं।
बहनों को याद कर बिलख रहे कासिफ के बेटे
रिश्तेदारों के मुताबिक दानिश और कासिफ जैसा प्यार ही उनके बच्चों में भी था। बड़े भाई दानिश के तीन बेटियां सारा, सिमरा और इनाया फातिमा थीं। वहीं, कासिफ के दो बेटे अयान और सूफियान हैं। दोनों भाईयों के बच्चों में खूब अच्छी पटती थी। संग खेलने जाना हो या शॉपिंग के लिए बाजार, बच्चे अक्सर साथ ही रहते। पांचों भाई-बहनों के बीच खूब प्यार था।
हाय अप्पी कहां चली गईं
कासिफ हो या दानिश, दोनों में से जो भी बाजार जाता, सभी बच्चों के लिए खाने-पीने की चीजें या खिलौने लाना नहीं भूलता। घटना के बाद से बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बहनों को याद कर जब वह रोना शुरू कर देते हैं तो मां उन्हें दिलासा देती। छोटा बेटा सूफियान अपनी छोटी बहन इनाया और सिमरा व सारा को याद करके बार बार बिलख कर कहता है, हाय अप्पी कहां चली गईं। इसके बाद परिवार वाले उसे समझाते लेकिन खुद उनके आंसू छलक पड़ते।