फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Kanpur Even three days after the transfer the secretaries paid Rs 64 lakh the dongles were not deregistered

Exclusive: तबादले के तीन दिन बाद भी सचिवों ने किया 64 लाख का भुगतान, डोंगल नहीं किए गए थे अनपंजीकृत…पढ़ें मामला

Fri, 20 Jun 2025 06:54 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर
रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 20 Jun 2025 06:54 AM IST
सार

Kanpur News: जिन सचिवों ने ग्राम पंचायतों में लाखों का विकास कार्य करा दिया था, उसका भुगतान बाकी था। ऐसे में तबादला होते ही सचिवों ने कुछ विकास कार्यों और कुछ फर्जी बिल-बाउचर लगाए। साथ ही, लाखों रुपये का राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त धनराशि से 18 जून तक भुगतान करते रहे।

विज्ञापन
Kanpur Even three days after the transfer the secretaries paid Rs 64 lakh the dongles were not deregistered
जिला पंचायत कार्यालय - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर की ग्राम पंचायतों में करीब 10 साल से तैनात सचिवों ने तबादले होने के तीन दिन बाद तक अपने डोंगल से 65 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। पंचायती राज विभाग ने एक भी सचिव का डोंगल अनपंजीकृत नहीं किया। नियमता तबादला होते ही डीपीआरओ को डोंगल अनपंजीकृत करना था।

विज्ञापन

ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पांच सचिवों की 14 ग्राम पंचायतों की पड़ताल में विकास कार्यों के नाम पर ग्राम पंचायतों के खाते से फर्जीवाड़ा होना सामने आया। शासन की तबादला नीति के तहत मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने 15 जून को 10 ब्लॉक के 17 सचिवों के तबादले किए थे।

विज्ञापन

16 साल से एक ही ब्लॉक में जमे हुए थे सचिव
इसमें सात ग्राम पंचायत अधिकारी और नौ ग्राम विकास अधिकारी हैं। सीडीओ ने ऐसे सचिवों के नाम फाइलों से बाहर निकाले जो 16 साल से एक ही ब्लॉक में जमे हुए थे। यह जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों की सिफारिश के कारण हटाए ही नहीं गए थे।

विज्ञापन

भुगतान के लिए फर्जी बिल-बाउचर भी लगाए
तबादला होने के बाद सभी सचिवों को क्लस्टर भी आवंटित कर दिए थे और अगले दिन नवीन स्थान पर ज्वाइन करना था। जिन सचिवों ने ग्राम पंचायतों में लाखों का विकास कार्य करा दिया था, उसका भुगतान बाकी था। ऐसे में तबादला होते ही सचिवों ने कुछ विकास कार्यों और कुछ फर्जी बिल-बाउचर लगाए।

विज्ञापन

उच्च अधिकारियों ने जानबूझकर रिलीव नहीं किया
साथ ही, लाखों रुपये का राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त धनराशि से 18 जून तक भुगतान करते रहे। यह सारा खेल विभाग में बैठे कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ। नियम है कि तबादला होने के बाद सचिव वित्तीय भुगतान नहीं कर सकता। इन्हें जानबूझकर उच्च अधिकारियों ने रिलीव नहीं किया।

इन सचिवों का खेल आया सामने
ब्लॉक बिधनू के अजीत सिंह ने करीब 21.64 लाख रुपये, राजेश कुमार ने 24.40 लाख रुपये और शिवपाल ने 7.42 लाख रुपये, पियूष सचान ने 11 लाख रुपये का भुगतान 18 जून तक किया। तबादले के बाद सभी सचिवों के डोंगल की जांच हो जाए, तो इसमें और भी फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।

तबादले के बाद वित्तीय भुगतान करना पूरी तरह से गलत है। अगर सचिवों ने मनमानी भुगतान किया है, तो इसकी जांच कराई जाएगी। अगर फर्जी बिल लगाकर भुगतान हुआ है, तो कार्रवाई होगी।  -मनोज कुमार, डीपीआरओ

तबादला के बाद सरकारी धन का भुगतान करना गलत है। अगर सचिवों ने ऐसा किया है, तो निश्चित जांच होगी। जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।  -जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed