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Kanpur: आबकारी समेत आठ परियोजनाओं ने बिगाड़ी राजस्व रैंकिंग, मिला ई ग्रेड
Sun, 13 Apr 2025 12:03 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 13 Apr 2025 12:03 AM IST
सार
सीएम डैश बोर्ड से जारी राजस्व कार्यों की रैंकिंग में सभी परियोजनाओं को ई ग्रेड मिला है।
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सीएम डैश बोर्ड
- फोटो : amar ujala
विस्तार
सीएम डैश बोर्ड की मार्च माह की राजस्व रैंकिंग में जिला काफी पीछे रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण आबकारी और राजस्व विभाग की आठ परियोजनाएं हैं। इनकी प्रगति खराब होने के कारण जिले को ई ग्रेड मिला। मार्च में राजस्व कार्य में 46वीं रैंक हासिल हुई है।
सीएम डैश बोर्ड में पोर्टल पर फीड जिलेवार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा होती है। उसी आधार पर प्रत्येक परियोजना की रैंकिंग और ग्रेड भी तय किया जाता है। सबसे नीचे ग्रेड ई होता है। इसका मतलब है कि इस परियोजना की प्रगति सबसे खराब है। जिले में अवस्थापना, औद्योगिक विकास की ओर से किए गए एमओयू की प्रगति सबसे खराब है। कुल 824 एमओयू हुए हैं। इनमें 239 अभी प्रक्रियाधीन हैं। 19 इकाइयों में ही उत्पादन शुरू हुआ है। इस कारण एमओयू परियोजना में रैंकिंग 73वीं और ई ग्रेड मिला है।
इधर, आबकारी विभाग राजस्व वसूली में फिसड्डी रहा। मार्च माह में 178 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 128 करोड़ ही वसूल सका। इस कारण 75वीं रैंक मिली। गेहूं खरीद योजना में 3623 किसानों का पंजीकरण हुआ, 628 से खरीद हुई। इस कारण 64वीं रैंक मिली। राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे हो रहा। 1110 गांवों का सर्वे होना था। इसमें 783 गांवों का सर्वे हुआ। राजस्व वसूली में 1370 करोड़ का लक्ष्य था जिसमें 933 करोड़ वसूला गया। इस कारण 70वीं रैंक मिली। सरकारी कर राजस्व समेकित परियोजना में 69वीं रैंक मिली। निर्विवाद उत्तराधिकारी योजना में 71वीं रैंक मिली है। इन सभी का असर राजस्व कार्यों की रैंकिंग पर पड़ा है।
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सीएम डैश बोर्ड में पोर्टल पर फीड जिलेवार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा होती है। उसी आधार पर प्रत्येक परियोजना की रैंकिंग और ग्रेड भी तय किया जाता है। सबसे नीचे ग्रेड ई होता है। इसका मतलब है कि इस परियोजना की प्रगति सबसे खराब है। जिले में अवस्थापना, औद्योगिक विकास की ओर से किए गए एमओयू की प्रगति सबसे खराब है। कुल 824 एमओयू हुए हैं। इनमें 239 अभी प्रक्रियाधीन हैं। 19 इकाइयों में ही उत्पादन शुरू हुआ है। इस कारण एमओयू परियोजना में रैंकिंग 73वीं और ई ग्रेड मिला है।
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इधर, आबकारी विभाग राजस्व वसूली में फिसड्डी रहा। मार्च माह में 178 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 128 करोड़ ही वसूल सका। इस कारण 75वीं रैंक मिली। गेहूं खरीद योजना में 3623 किसानों का पंजीकरण हुआ, 628 से खरीद हुई। इस कारण 64वीं रैंक मिली। राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे हो रहा। 1110 गांवों का सर्वे होना था। इसमें 783 गांवों का सर्वे हुआ। राजस्व वसूली में 1370 करोड़ का लक्ष्य था जिसमें 933 करोड़ वसूला गया। इस कारण 70वीं रैंक मिली। सरकारी कर राजस्व समेकित परियोजना में 69वीं रैंक मिली। निर्विवाद उत्तराधिकारी योजना में 71वीं रैंक मिली है। इन सभी का असर राजस्व कार्यों की रैंकिंग पर पड़ा है।
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