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Kanpur News: प्रधान का जाति प्रमाण पत्र मिला फर्जी, एसडीएम न्यायिक ने पद से हटाने के दिए निर्देश
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डेरापुर। सब्दलपुर के निर्वाचित प्रधान का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है। एसडीएम न्यायिक ने वर्तमान प्रधान को गड़रिया जाति का होने के कारण उनके अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को अवैध करार दिया। बीडीओ को प्रधान के वित्तीय अधिकार समाप्त कर पद से हटाने के आदेश दिए हैंं। इस आदेश की प्रति बीडीओ डेरापुर को भेजी है।
ब्लॉक की सब्दलपुर ग्राम पंचायत के प्रधान का पद इस बार चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। गांव के शैलेंद्र कुमार ने गड़रिया जाति का होने के बाद भी वर्ष 2015 में अपना व बहन नीलम पाल का अनुसूचित जाति धनगर का प्रमाण पत्र तहसील से बनवा लिया। इसके बाद पंचायत चुनाव में इसी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन किया और जीत हासिल की।
उसी दौरान सब्दलपुर गांव के मजरा जीरेपुर के अक्षय कुमार ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे आरक्षित पद का लाभ लेने का आरोप लगाते हुए एसडीएम ऋषिकांत राजवंशी को शिकायती पत्र देकर जांच कराने की मांग की थी।
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तत्कालीन एसडीएम ऋषिकांत राजवंशी ने तत्कालीन तहसीलदार लाल सिंह यादव से रिपोर्ट मांगी थी। तहसीलदार ने जांच की तो शिकायत सही मिली। इस पर एसडीएम ने जातिप्रमाण पत्र निरस्त करने के लिए आला अफसरों को रिपोर्ट भेज दी थी।
अफसरों ने प्रमाण पत्र निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद रिपोर्ट तहसीलदार डेरापुर को भेजी गई थी। वहीं, वर्ष 2021 में अक्षय ने एसडीएम न्यायालय में प्रधान के गलत तरीके से जाति छिपाकर प्रधान पद हथियाने के संबंध में वाद दायर किया था।
इसमें एसडीएम न्यायिक राम शरण तिवारी ने सुनवाई के बाद प्रधान शैलेंद्र धनगर को पिछड़ी जाति का मानते हुए एससी जाति के प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया। उन्होंने बीडीओ को पत्र भेजकर प्रधान के वित्तीय अधिकार समाप्त करते हुए उसे पद से हटाने के निर्देश दिए है। बीडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि आदेश की प्रति मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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ब्लॉक की सब्दलपुर ग्राम पंचायत के प्रधान का पद इस बार चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। गांव के शैलेंद्र कुमार ने गड़रिया जाति का होने के बाद भी वर्ष 2015 में अपना व बहन नीलम पाल का अनुसूचित जाति धनगर का प्रमाण पत्र तहसील से बनवा लिया। इसके बाद पंचायत चुनाव में इसी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन किया और जीत हासिल की।
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उसी दौरान सब्दलपुर गांव के मजरा जीरेपुर के अक्षय कुमार ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे आरक्षित पद का लाभ लेने का आरोप लगाते हुए एसडीएम ऋषिकांत राजवंशी को शिकायती पत्र देकर जांच कराने की मांग की थी।
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तत्कालीन एसडीएम ऋषिकांत राजवंशी ने तत्कालीन तहसीलदार लाल सिंह यादव से रिपोर्ट मांगी थी। तहसीलदार ने जांच की तो शिकायत सही मिली। इस पर एसडीएम ने जातिप्रमाण पत्र निरस्त करने के लिए आला अफसरों को रिपोर्ट भेज दी थी।
अफसरों ने प्रमाण पत्र निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद रिपोर्ट तहसीलदार डेरापुर को भेजी गई थी। वहीं, वर्ष 2021 में अक्षय ने एसडीएम न्यायालय में प्रधान के गलत तरीके से जाति छिपाकर प्रधान पद हथियाने के संबंध में वाद दायर किया था।
इसमें एसडीएम न्यायिक राम शरण तिवारी ने सुनवाई के बाद प्रधान शैलेंद्र धनगर को पिछड़ी जाति का मानते हुए एससी जाति के प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया। उन्होंने बीडीओ को पत्र भेजकर प्रधान के वित्तीय अधिकार समाप्त करते हुए उसे पद से हटाने के निर्देश दिए है। बीडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि आदेश की प्रति मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।