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कानपुर देहात : बारा गांव में पाकिस्तानियों के नाम अभी भी दर्ज जमीनें, शत्रु संपत्ति के तहत कार्रवाई की तैयारी
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कानपुर देहात। आजादी के समय देश छोड़कर पाकिस्तान गए लोगों के नाम अब भी अकबरपुर तहसील के बारा गांव के भूलेख रिकार्ड में दर्ज हैं। डीएम के आदेश पर अब तहसील प्रशासन पाकिस्तानियों के नाम दर्ज जमीनों का ब्योरा तैयार करा रहा है। इसके बाद शत्रु संपत्ति के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अकबरपुर तहसील में कानपुर-इटावा हाईवे किनारे बारा गांव स्थित है। आजादी के बाद देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान बना तो यहां के लोग वहां रहने चले गए। उनकी जमीनें अभी भी यहां हैं। कई वर्षों तक यह जमीनें खाली रहीं, लेकिन आबादी बढ़ने पर कुछ लोगों ने यहां कब्जा करना शुरू कर दिया।
जिन लोगों के नाम यह जमीनें हैं वह अब जीवित हैं या फिर नहीं इसका भी पता नहीं है। क्षेत्रीय लेखपाल योगेंद्र के अनुसार भूलेख रिकार्ड में छह लोगों के पाकिस्तान के निवासी होने का जिक्र अभिलेख में दर्ज है।
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भूमि के मामले में शिकायत नहीं होने से अब तक किसी ने गौर नहीं किया। अब डीएम नेहा जैन के निर्देश पर तहसील प्रशासन पाकिस्तानियों के नाम दर्ज जमीनों का ब्योरा तैयार कर रहा है।
पाकिस्तानियों के नाम जमीनें दर्ज होने की जानकारी नहीं थी। डीएम के निर्देश पर अब ऐसी भूमि की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। यह जमीनें छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में हैं। इसके बाद शत्रु संपत्ति नियमावली के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। - रणविजय सिंह, तहसीलदार अकबरपुर।
कभी लौटकर नहीं आए पाकिस्तान गए लोग
बारा गांव की इंतखाब खतौनी में पाकिस्तान निवासी शराफत खां, जमील खां, असलम, नियाज अहमद, मोहम्मद अहमद व खालिद अहमद खां के नाम जमीनें दर्ज हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जिन के नाम जमीनें दर्ज हैं वह यहां कभी वापस नहीं आए। लेखपाल योगेंद्र कटियार कहते हैं कि राजस्व अभिलेख में पाकिस्तान निवासी लोगों के नाम दर्ज देखे, लेकिन कोई शिकायत न होने पर ध्यान नहीं दिया।
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अकबरपुर तहसील में कानपुर-इटावा हाईवे किनारे बारा गांव स्थित है। आजादी के बाद देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान बना तो यहां के लोग वहां रहने चले गए। उनकी जमीनें अभी भी यहां हैं। कई वर्षों तक यह जमीनें खाली रहीं, लेकिन आबादी बढ़ने पर कुछ लोगों ने यहां कब्जा करना शुरू कर दिया।
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जिन लोगों के नाम यह जमीनें हैं वह अब जीवित हैं या फिर नहीं इसका भी पता नहीं है। क्षेत्रीय लेखपाल योगेंद्र के अनुसार भूलेख रिकार्ड में छह लोगों के पाकिस्तान के निवासी होने का जिक्र अभिलेख में दर्ज है।
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भूमि के मामले में शिकायत नहीं होने से अब तक किसी ने गौर नहीं किया। अब डीएम नेहा जैन के निर्देश पर तहसील प्रशासन पाकिस्तानियों के नाम दर्ज जमीनों का ब्योरा तैयार कर रहा है।
पाकिस्तानियों के नाम जमीनें दर्ज होने की जानकारी नहीं थी। डीएम के निर्देश पर अब ऐसी भूमि की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। यह जमीनें छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में हैं। इसके बाद शत्रु संपत्ति नियमावली के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। - रणविजय सिंह, तहसीलदार अकबरपुर।
कभी लौटकर नहीं आए पाकिस्तान गए लोग
बारा गांव की इंतखाब खतौनी में पाकिस्तान निवासी शराफत खां, जमील खां, असलम, नियाज अहमद, मोहम्मद अहमद व खालिद अहमद खां के नाम जमीनें दर्ज हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जिन के नाम जमीनें दर्ज हैं वह यहां कभी वापस नहीं आए। लेखपाल योगेंद्र कटियार कहते हैं कि राजस्व अभिलेख में पाकिस्तान निवासी लोगों के नाम दर्ज देखे, लेकिन कोई शिकायत न होने पर ध्यान नहीं दिया।