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कोरोना का कहर: दो हफ्ते में रेलवे के 100 कर्मचारी संक्रमित, आठ की मौत
Tue, 27 Apr 2021 01:08 PM IST
शिखा पांडेय
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 27 Apr 2021 01:08 PM IST
सार
अस्पताल में भर्ती होने पर ऑक्सीजन की कमी से भी कई की जान चली गई। कोरोना संक्रमितों में 60 रनिंग कर्मचारी, जिनमें लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट शामिल हैं।
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कोरोना का कहर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रेलवे पर भी कोरोना संक्रमण का बुरा असर पड़ा है। दो हफ्ते में रेलवे के 100 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। कुछ अस्पतालों में तो कुछ घरों में आइसोलेट हैं। आठ रेलवे कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। किसी को बेड नहीं तो किसी को बेहतर इलाज नहीं मिल सका।
अस्पताल में भर्ती होने पर ऑक्सीजन की कमी से भी कई की जान चली गई। कोरोना संक्रमितों में 60 रनिंग कर्मचारी, जिनमें लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट शामिल हैं। इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग सेंटर में आठ इंस्ट्रक्टर, तीन चीफ लोको इंस्ट्रक्टर संक्रमित हैं। इसके अलावा कॉमर्शियल, सिग्नल एंड टेलीकॉम, परिचालन विभाग के भी कई कर्मचारी संक्रमण की चपेट में हैं।
इन रेलकर्मियों जा चुकी जान
राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट सुनील कुमार श्रीवास्तव (55), असिस्टेंट लोको पायलट जितेंद्र कोहली (36), गार्ड शैलेष कुमार (56), एनके त्रिपाठी (55), इलेक्ट्रिक लोको शेड के वरिष्ठ तकनीशियन राजेंद्र सिंह (59), कानपुर सेंट्रल पर डिप्टी एसएस रवींद्र कुमार (34), टीएम शॉप के वरिष्ठ तकनीशियन लल्लू मंडल, अप्रेंटिस इलेक्ट्रिक अनुज पांडेय का निधन हो चुका है। डिप्टी एसएस रविंदर कुमार छुट्टी न मिलने से बुखार में भी काम कर रहे थे। हालत गंभीर होने पर मधुराज अस्पताल में भर्ती कराने के बाद निधन हो गया।
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संबद्ध अस्पतालों में भी जगह नहीं
रेलवे के लोको अस्पताल में रेल कर्मचारियों का इलाज होता है, लेकिन शहर के पांच निजी अस्पतालों में रेल कर्मचारी बिना कैश इलाज करा सकते हैं। इसके लिए रेलवे ने इन अस्पतालों से करार किया है। इनमें इलाज का खर्च रेलवे उठाता है। इनमें अधिकतर कोविड अस्पताल हो चुके हैं और बेड खाली नहीं है। एनसीआरईएस के मंडल अध्यक्ष मान सिंह ने बताया कि यह अस्पताल रेलवे कर्मचारियों को भर्ती ही नहीं करते हैं, क्योंकि पहले जो मरीज कैश लेकर भर्ती होना चाह रहा है, उसे प्राथमिकता देते हैं।
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अस्पताल में भर्ती होने पर ऑक्सीजन की कमी से भी कई की जान चली गई। कोरोना संक्रमितों में 60 रनिंग कर्मचारी, जिनमें लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट शामिल हैं। इलेक्ट्रिक ट्रेनिंग सेंटर में आठ इंस्ट्रक्टर, तीन चीफ लोको इंस्ट्रक्टर संक्रमित हैं। इसके अलावा कॉमर्शियल, सिग्नल एंड टेलीकॉम, परिचालन विभाग के भी कई कर्मचारी संक्रमण की चपेट में हैं।
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इन रेलकर्मियों जा चुकी जान
राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट सुनील कुमार श्रीवास्तव (55), असिस्टेंट लोको पायलट जितेंद्र कोहली (36), गार्ड शैलेष कुमार (56), एनके त्रिपाठी (55), इलेक्ट्रिक लोको शेड के वरिष्ठ तकनीशियन राजेंद्र सिंह (59), कानपुर सेंट्रल पर डिप्टी एसएस रवींद्र कुमार (34), टीएम शॉप के वरिष्ठ तकनीशियन लल्लू मंडल, अप्रेंटिस इलेक्ट्रिक अनुज पांडेय का निधन हो चुका है। डिप्टी एसएस रविंदर कुमार छुट्टी न मिलने से बुखार में भी काम कर रहे थे। हालत गंभीर होने पर मधुराज अस्पताल में भर्ती कराने के बाद निधन हो गया।
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संबद्ध अस्पतालों में भी जगह नहीं
रेलवे के लोको अस्पताल में रेल कर्मचारियों का इलाज होता है, लेकिन शहर के पांच निजी अस्पतालों में रेल कर्मचारी बिना कैश इलाज करा सकते हैं। इसके लिए रेलवे ने इन अस्पतालों से करार किया है। इनमें इलाज का खर्च रेलवे उठाता है। इनमें अधिकतर कोविड अस्पताल हो चुके हैं और बेड खाली नहीं है। एनसीआरईएस के मंडल अध्यक्ष मान सिंह ने बताया कि यह अस्पताल रेलवे कर्मचारियों को भर्ती ही नहीं करते हैं, क्योंकि पहले जो मरीज कैश लेकर भर्ती होना चाह रहा है, उसे प्राथमिकता देते हैं।
चंदे से करा रहे इलाज
रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में कारपेंटर वीर भुवन सिंह कोरोना संक्रमित हैं। रेलवे के लोको अस्पताल से रेफरल लेटर बनवाने के बाद भी किसी संबद्ध अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। शनिवार शाम को कल्याणपुर के एसपीएम अस्पताल में चंदा लेकर भर्ती कराया गया है। कुछ रुपये जमा किए हैं। अस्पताल ने जल्द ही दो लाख रुपये जमा कराने को कहा है। यह जानकारी इंजीनियरिंग की एनसीआरईएस के शाखा मंत्री संतोष यादव ने दी।
आक्सीजन नहीं मिली, फतेहपुर में भर्ती कराया
रेलवे में रिटायर कर्मचारी की पत्नी मीरा त्रिवेदी को कानपुर के किसी अस्पताल में जगह नहीं मिली। वह कोविड निगेटिव हैं। इसके बाद उनके पुलिस में सब इंस्पेक्टर पुत्र ने फतेहपुर जाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है, क्योंकि उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी, जो यहां नहीं मिल रही थी।
रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में कारपेंटर वीर भुवन सिंह कोरोना संक्रमित हैं। रेलवे के लोको अस्पताल से रेफरल लेटर बनवाने के बाद भी किसी संबद्ध अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। शनिवार शाम को कल्याणपुर के एसपीएम अस्पताल में चंदा लेकर भर्ती कराया गया है। कुछ रुपये जमा किए हैं। अस्पताल ने जल्द ही दो लाख रुपये जमा कराने को कहा है। यह जानकारी इंजीनियरिंग की एनसीआरईएस के शाखा मंत्री संतोष यादव ने दी।
आक्सीजन नहीं मिली, फतेहपुर में भर्ती कराया
रेलवे में रिटायर कर्मचारी की पत्नी मीरा त्रिवेदी को कानपुर के किसी अस्पताल में जगह नहीं मिली। वह कोविड निगेटिव हैं। इसके बाद उनके पुलिस में सब इंस्पेक्टर पुत्र ने फतेहपुर जाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है, क्योंकि उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी, जो यहां नहीं मिल रही थी।
यह सच है कि कोरोना की लहर में रेलवे कर्मचारी भी संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन जांच के बाद हर कर्मचारी को भर्ती कराया जा रहा है। संबद्ध अस्पतालों में जगह न मिलने से जो रेलवे कर्मचारी अपने रुपये खर्च कर अन्य निजी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं, उनके रिफंड की कार्यवाही के लिए मंडल अधिकारियों से बात करेंगे। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, निदेशक, कानपुर सेंट्रल