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कानपुर ब्लॉक प्रमुख चुनाव: सपा का किला ढहा... भाजपा बादशाह, 10 में से सात सीटों पर दर्ज की जीत

Sun, 11 Jul 2021 01:51 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 11 Jul 2021 01:51 AM IST
सार

चुनाव में अपने चार प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित कराने में सफल रही भाजपा ने शनिवार को तीन और सीटों पर कब्जा जमा लिया।

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kanpur block pramukh chunav 2021 election: BJP got victory
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष की तरह ही ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भी सत्ताधारी दल भाजपा के आगे मुख्य विपक्षी पार्टी सपा की सारी किलेबंदी ढेर हो गई। आरोप-प्रत्यारोप, हंगामे के बीच पल-पल सियासी आस्था बदलने वाले इस चुनाव में अपने चार प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित कराने में सफल रही भाजपा ने शनिवार को तीन और सीटों पर कब्जा जमा लिया।
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इस तरह भाजपा ने 10 में से सात सीटों पर जीत दर्ज की तो सपा के खाते में महज तीन सीटें आईं। पिछले चुनाव में सपा ने आठ, जबकि बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी ने एक-एक सीट जीती थी। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में गुरुवार को नामांकन के दिन ही कल्याणपुर, बिधनू, घाटमपुर और शिवराजपुर में भाजपा प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया था।
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इनके सामने कोई उम्मीदवार न आने से शुक्रवार को नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद जीत का प्रमाणपत्र भी दे दिया गया। इससे भाजपा मतदान से पहले ही चार कदम आगे निकल चुकी थी। शनिवार को सरसौल, भीतरगांव, पतारा, चौबेपुर, बिल्हौर और ककवन में ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव के लिए मतदान हुआ। सभी छह सीटों पर भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला रहा। शाम को घोषित नतीजों में भीतरगांव, बिल्हौर और चौबेपुर में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि सरसौल, ककवन और पतारा सीट सपा के पाले में आई।
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सरसौल में पहले से तय थी सपा की जीत
भाजपा ने नौ सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। सरसौल ब्लॉक में आपसी खींचतान की वजह से पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं घोषित किया। हालांकि, सरसौल से पहले ही सपा की बड़ी जीत तय मानी जा रही थी। यहां पर पूूर्व सपा एमएलसी लाल सिंह तोमर की बहू डॉ. विजयरत्ना तोमर ने भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी गायत्री को पराजित किया। डॉ. विजयरत्ना को 70 और गायत्री को 20 वोट मिले। 1991 में लाल सिंह तोमर भी सपा के कोटे से यहां से ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। 

चौबेपुर में जीती प्रतिष्ठा की लड़ाई
चौबेपुर सीट को भाजपा ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ रखा था। यहां से बिठूर विधानसभा क्षेत्र से सपा के पूर्व विधायक मुनींद्र शुक्ला के भतीजे अनुभव मैदान में थे। अनुभव निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख भी हैं। भाजपा ने यहां से सपा को हराकर पूरे बिठूर क्षेत्र को संदेश दिया है। यहां से भाजपा के राजेश शुक्ला ने अनुभव शुक्ला को 10 वोटों से हराया।

भाजपा ने छीनीं सपा की ये सीटें
पिछले चुनाव में कल्याणपुर, भीतरगांव, बिल्हौर, शिवराजपुर और चौबेपुर सीट पर सपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इस बार यह सभी सीटें भाजपा ने जीत लीं। पिछले चुनाव में बसपा के खाते में रही बिधनू सीट पर इस बार भाजपा प्रत्याशी ने निर्विरोध जीत हासिल कर ली।

मतदान में कहां से कौन जीता
ब्लॉक        विजेता                पार्टी        वोट

भीतरगांव    अशोक सचान    भाजपा   48
चौबेपुर      राजेश शुक्ला     भाजपा   41
बिल्हौर     मनोरमा कठेरिया    भाजपा 56
सरसौल    डॉ. विजयरत्ना तोमर    सपा 70
ककवन    किरनलता              सपा    28
पतारा     कोमल सिंह             सपा    37

ये चुने गए निर्विरोध
कल्याणपुर से अनुराधा अवस्थी, भाजपा
घाटमपुर से इंद्रजीत सिंह, भाजपा
बिधनू से अरुण कुमार भाजपा
शिवराजपुर से शुभम वाजपेयी

सियासी आस्था बदली, मारा मैदान
पिछले ब्लॉक प्रमुख चुनाव में घाटमपुर से देविका सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। इस बार उनके पति इंद्रजीत सिंह ने भाजपा का दामन थामा तो पार्टी ने उन्हें टिकट भी दे दिया। इंद्रजीत यहां से निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इसी तरह भीतरगांव से सपा के टिकट पर ब्लॉक प्रमुख बनीं रानी सचान के पति अशोक कुमार ने भी दलबदल किया।

अशोक इस बार भाजपा से चुनाव लड़े और सपा प्रत्याशी को हराकर ब्लॉक प्रमुख चुने गए हैं। शिवराजपुर ब्लॉक में तो सपा के साथ उसके प्रत्याशी ने ही खेल कर दिया। गुरुवार को नामांकन से पहले लापता हुए विनोद सिंह चंदेल को लेकर सपाई भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते रहे, लेकिन उसी रात उनकी फोटो भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा के साथ वायरल हो गई।

इससे सपा की किरकिरी हुई तो चंदेल की बदली आस्था ने भाजपा की जीत की राह आसान कर दी। कमोबेश यही हाल बिधनू में भी रहा। यहां सपा प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण दिवाकर को उनके प्रस्तावक ने बिना लड़े ही मैदान से बाहर करा दिया। प्रस्तावक का आरोप था कि धोखे से उसके हस्ताक्षर करा लिए गए।
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