कानपुर: पार्षद-विधायक और पीडब्ल्यूडी ने नहीं सुनी तो जनता ने चंदा कर शुरू कराया नाली निर्माण
Kanpur News: कानपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और शहर में विकास कार्यों की योजनाएं बनाई जा रही हैं। लेकिन बर्रा-6 में तस्वीर कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। यहां नाली की समस्या का समाधान नहीं होने से परेशान लोगों ने आखिरकार खुद ही अपनी जेब खोल दी।
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किसी ने 1500 रुपये दिए तो किसी ने 2000 रुपये। लोगों ने आपस में चंदा जुटाया और श्रमदान करते हुए नाली निर्माण का काम शुरू करा दिया। जिस सड़क पर यह नाली बनाई जा रही है, वह पीडब्ल्यूडी के अधीन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने खुद ही रास्ता निकालने का फैसला किया।
शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
बर्रा-6 के वार्ड नंबर 67 में नाली की व्यवस्था नहीं होने से लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने समस्या को लेकर कई बार पार्षद और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके बाद लोगों ने आपस में पैसे इकट्ठे करने शुरू किए।
जनता बनी मजदूर, खुद उठाया फावड़ा
नाली निर्माण के दौरान स्थानीय लोग खुद श्रमदान करते नजर आए। पुरुषों के साथ महिलाएं भी ईंट और गारा लेकर निर्माण कार्य में जुटीं। यानी जिस बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहना चाहिए था, उसके लिए जनता ने खुद पैसा भी लगाया और श्रम भी किया।
स्थानीय लोगों के इस प्रयास पर सवाल उठ रहा है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद एक नाली के निर्माण के लिए लोगों को चंदा क्यों जुटाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि टैक्स देने के बाद भी उन्हें अपनी गली की मूलभूत सुविधा के लिए दोबारा अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
पार्षद और विधायक से भी नाराजगी
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में पार्षद देवेंद्र द्विवेदी, गोविंद नगर से भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी और संबंधित विभाग के प्रति नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जनता आखिर जाए तो जाए कहां। स्थानीय लोगों ने आने वाले चुनाव में इस मुद्दे का जवाब देने की बात भी कही है। उनका कहना है कि जलभराव जैसी मूलभूत समस्या के लिए उन्हें खुद चंदा जुटाकर नाली बनानी पड़ रही है।
टैक्स के बाद भी खुद करना पड़ रहा काम
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब जनता हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और दूसरे टैक्स देती है तो अपनी गली की नाली के लिए उसे दोबारा पैसा क्यों लगाना पड़ रहा है। लोगों ने पूछा कि विकास कार्यों के लिए आने वाला पैसा आखिर कहां खर्च हो रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक अगर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो वार्डों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव क्यों है। लोगों ने पीडब्ल्यूडी और जनप्रतिनिधियों से नाली निर्माण और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।