Kanpur: भाजपा नेता से रंगदारी वसूलने में अखिलेश को जमानत नहीं, पीड़िता और उसकी बहन के बयान रहे महत्वपूर्ण
Kanpur News: अधिवक्ता ने तर्क रखा कि पीड़िता और उसकी बहन द्वारा कोर्ट में दर्ज कराए गए बयानों से साफ है कि अखिलेश के कहने पर उन्होंने रवि सतीजा के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया।
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कानपुर में भाजपा नेता को दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाकर रंगदारी वसूलने के मामले में जेल भेजे गए अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत अर्जी जिला जज चवन प्रकाश ने खारिज कर दी है। जमानत अर्जी के दौरान अखिलेश के अधिवक्ता की ओर से तर्क रखा गया कि अखिलेश को षड्यंत्र के तहत रंजिशन फंसाया गया है। यह मुकदमा दर्ज होने से पहले तक उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वहीं शासकीय अधिवक्ता ने तर्क रखा कि पीड़िता और उसकी बहन द्वारा कोर्ट में दर्ज कराए गए बयानों से साफ है कि अखिलेश के कहने पर उन्होंने रवि सतीजा के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया।
तीन बार दाखिल कीं जमानत अर्जियां
पहले बीएनएस की धारा 308 (2), 308 (5) और 351 (3) में जमानत अर्जी दाखिल हुई थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने धारा 308 (7) और 61 (2) की बढ़ोतरी की तो दोबारा नई धाराओं में जमानत अर्जी दाखिल की गई। इसके बाद फिर पुलिस ने धारा 231 बढ़ा दी तो तीसरी बार जमानत अर्जी दाखिल करनी पड़ी थी। तीनों जमानत प्रार्थना पत्रों की एकसाथ सुनवाई हुई।
पीड़िता और उसकी बहन के बयान रहे महत्वपूर्ण
अखिलेश की जमानत अर्जी खारिज होने में रवि सतीजा मामले की पीड़िता व उसकी बहन के मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान अहम रहे। पीड़िता व उसकी बहन ने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कहा है कि प्रियांशु उर्फ अभिषेक बाजपेई ने कहा था कि दो लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखाना है। उन्हें मना किया तो धमकाया कि अखिलेश उन्हें ही किसी मामले में जेल भिजवा देंगे। डरकर हां कर दी।
रवि सतीजा के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया है
फिर कुछ दिन बाद प्रियांशु कुछ कागज लेकर आए और उन पर उसके व बहन के हस्ताक्षर करा लिए। उसे नहीं पता था कि उसमें क्या लिखा है, क्योंकि वह पढ़ी-लिखी नहीं है। बस नाम लिखना जानती है। प्रियांशु उसे दो-तीन बार कचहरी लाए। दरोगा के सामने उसका व बहन का बयान दर्ज कराया। प्रियांशु के बताने पर ही बयान दिया। जब उसके जज के सामने बयान हुए तब उसे पता चला कि उससे रवि सतीजा के खिलाफ मुकदमा लिखाया गया है।