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Kanpur: मजदूर ने जुर्म कबूल कर खुद ही सजा मांगी, बोला- साहब! कोर्ट के चक्कर काटकर थक गया, मुझे जेल भेज दीजिए

Sun, 16 Oct 2022 10:38 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 16 Oct 2022 10:38 AM IST
सार

एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि विजय ने जुर्म स्वीकार करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी जिस पर कोर्ट ने उसके दोनों मुकदमों का निस्तारण करते हुए 4 माह कैद और 4900 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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Kanpur: After defeating the system laborer finally accepted his crime and sought punishment himself
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

23 साल से कोर्ट के चक्कर काटकर थक चुके एक मजदूर का दर्द कोर्ट के सामने छलक पड़ा। न्याय की आस छोड़ चुके इस मजदूर ने व्यवस्था से हारकर आखिर अपना जुर्म कबूल कर खुद ही सजा की मांग कर डाली। अपर जिला जज 14 अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने भी आरोपी की पीड़ा को समझते हुए उसे न्यूनतम सजा चार माह सुनाकर जेल भेज दिया।

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चकेरी थाना क्षेत्र के संजीव नगर में दीपक गेस्ट हाउस के पास वर्ष 1999 में सड़क दुर्घटना के बाद ग्रामीणों ने बवाल किया था। पथराव कर गाड़ियों के शीशे तोड़े और आग लगाकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। इस मामले में चकेरी थाने में कई लोगों के खिलाफ दो रिपोर्ट दर्ज हुई थीं। जिसमें सुभाष रोड निवासी विजय दास को भी आरोपी बनाया गया था। विजय दास का कहना है कि वह गेस्ट हाउस में वेटर था। शोरशराबा सुनकर बाहर आया था। तो पुलिस ने फंसा दिया।

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नौ साल बाद यह फाइल सेशन कोर्ट पहुंची और वर्ष 2008 में मुकदमे में सुनवाई शुरू हुई। 14 साल गुजर गए कई बार समन व वारंट जारी हुए लेकिन एक भी गवाह कोर्ट नहीं पहुंचा। इस बीच विजय को जमानत तो मिल गई लेकिन हर तारीख पर कोर्ट में हाजिरी देनी पड़ती थी। पत्नी और बच्चों का पेट पालने के लिए वह मजदूरी करता है लेकिन मुकदमे की तारीख के चक्कर में मजदूरी करने बाहर नहीं जा पा रहा था। कोई गवाह भी गवाही देने नहीं आ रहा था। एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि विजय ने जुर्म स्वीकार करने के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी जिस पर कोर्ट ने उसके दोनों मुकदमों का निस्तारण करते हुए 4 माह कैद और 4900 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

विजय की पत्नी ने कोर्ट में जुर्माना जमा कर दिया है। जमानत से पहले कुछ दिन वह जेल भी काट चुका है। शेष सजा की अवधि काटने के बाद जल्द ही उसकी रिहाई हो जाएगी।

एक फाइल में तो सुनवाई शुरू ही नहीं हुई
इस मामले में भी बड़ी खामी सामने आई है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर चार्जशीट तो कोर्ट भेज दी लेकिन कोई गवाही देने कोर्ट नहीं पहुंचा। एडीजीसी विनोद त्रिपाठी ने बताया कि इसी घटना से संबंधित एक और एफआईआर भी पुलिस ने दर्ज की थी लेकिन 23 साल गुजरने के बावजूद अब तक फाइल निचली अदालत में ही पड़ी है। सेशन कोर्ट में सबमिट ही नहीं हुई। अब तक सुनवाई ही शुरू नहीं हुई तो फैसला कब आएगा। 

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