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Kanpur: सामूहिक विवाह की अव्यवस्था पर कार्रवाई, समाज कल्याण अधिकारी हटाई गईं, शिवम बने नए अधिकारी

Sat, 13 Dec 2025 10:28 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 13 Dec 2025 10:28 PM IST
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Kanpur: Action taken over mismanagement of mass marriage ceremony; social welfare officer removed
समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह - फोटो : अमर उजाला
सीएसए मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में सामने आई गंभीर अव्यवस्थाओं पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया है। समाज कल्याण अधिकारी शिल्पी सिंह को पद से हटा दिया गया है और उन्हें निदेशालय से अटैच कर दिया गया है। उनके स्थान पर शिवम सागर को नया जिला समाज कल्याण अधिकारी नियुक्त किया गया है। ए निदेशालय में सम्बद्ध थे। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब समारोह से जुड़ी जांच अब भी अधूरी है और फाइनल रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी नहीं गई है। 
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गुरुवार को जिले में समाजकल्याण विभाग की तरफ से 551 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया गया था, जिसमें भोजन, बैठने और टेंट व्यवस्था को लेकर भारी अव्यवस्थाएं सामने आई थीं। जिलाधिकारी जितेंद्र के निर्देश पर सीडीओ ने जाँच टीम गठित की थीं। एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार की अध्यक्षता में जांच हो रही है। शुक्रवार को कमेटी ने समाज कल्याण विभाग पहुंचकर दोनों फर्मों के टेंडर और खर्च से जुड़े अभिलेखों की गहन जांच की थीं। जांच में सामने आया कि 2.39 करोड़ रुपये का टेंडर दिए जाने के बावजूद व्यवस्थाएं पूरी तरह धराशायी रहीं। भोजन और टेंट की व्यवस्था सबसे अधिक लचर पाई गई। जहां 15 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था का ठेका दिया गया था, वहां सिर्फ 5 हजार लोगों की ही तैयारी मिली। कुर्सियों, स्टॉल और बैठने की व्यवस्था में भी भारी कमी रही।उपहार सामग्री की जांच में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
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शासनादेश के अनुसार जहां प्रत्येक जोड़े को 10 किलो लड्डू दिया जाना था, वहां सिर्फ 2 किलो का वितरण किया गया। उपहार में दी गई घड़ियों का साइज भी तय मानकों से कम पाया गया।समाज कल्याण विभाग ने ई-टेंडर प्रक्रिया के तहत नेशनल कोऑपरेटिव कंस्ट्रक्शन फेडरेशन लिमिटेड को जोड़ों के उपहार वितरण की जिम्मेदारी दी थी।जबकि नेशनल फेडरेशन ऑफ फार्मर प्रोक्योरमेंट प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग कोऑपरेटिव ऑफ इंडिया लिमिटेड को टेंट और भोजन व्यवस्था का कार्य सौंपा गया था।विभाग की ओर से प्रति जोड़ा 15 हजार रुपये भोजन और 25 हजार रुपये उपहार के लिए निर्धारित किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आई।हालांकि, टेंडर प्रक्रिया किस तरह और किन शर्तों पर खोली गई, इसकी जांच अभी बाकी है। साथ ही, जांच कमेटी की रिपोर्ट अभी तक सीडीओ दीक्षा जैन को नहीं सौंपी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या आगे और जिम्मेदार अफसरों पर भी कार्रवाई होगी या मामला यहीं थम जाएगा।
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फिलहाल, समाज कल्याण अधिकारी को हटाया जाना यह संकेत देता है कि सरकार और प्रशासन सामूहिक विवाह योजना में लापरवाही को लेकर गंभीर है, और आगे और भी सख्त कार्रवाई संभव है।
 
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