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UP: 22 वर्ष पुराने मामले में आया फैसला, चार पुलिस कर्मियों की हत्या करने में कलुआ गैंग के सदस्य को उम्रकैद
Thu, 25 Sep 2025 10:15 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 25 Sep 2025 10:15 PM IST
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जेल जाता देवेन्द्र उर्फ फौजी
- फोटो : अमर उजाला
थानाध्यक्ष सहित चार पुलिस कर्मियों की गोली मारकर हत्या करने के मामले में विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शैलेंद्र सचान ने गुरुवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कलुआ गैंग के सदस्य देवेंद्र कुमार उर्फ फौजी को दोषी मानते हुए उम्रकैद और 12 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में दो आरोपियों को बरी कर दिया गया।
22 वर्ष पहले थाना कंपिल के हेड कांस्टेबल राम सेवक यादव ने 26 मार्च 2003 को कलुआ गैंग के 40 अज्ञात सदस्यों के खिलाफ डकैती और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में कलुआ गैंग के मुख्य सदस्य पीलीभीत के थाना बीसलपुर के गांव परनिया निवासी देवेंद्र कुमार, अमृतपुर निवासी धनपाल, शाहजहांपुर निवासी सोनपाल के नाम प्रकाश में आए। विवेचक ने तीनों के खिलाफ डकैती कर हत्या करने के मामले में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शैलेंद्र सचान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद देवेंद्र कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
तीन पीएसी जवानों की हत्या में देवेंद्र को हो चुकी है फांसी की सजा
जिले के अलावा बदायूं, एटा और शाहजहांपुर में वर्षों तक कलुआ डकैत का आतंक रहा है। 19 वर्ष पहले कंपिल थानाक्षेत्र में डकैत कलुआ के साथी देवेंद्र फौजी ने तीन पुलिस कर्मियों सहित एक ग्रामीण की हत्या कर दी थी। मामले में देवेंद्र उर्फ फौजी को विशेष न्यायाधीश एंटी डकैती कृष्ण कुमार ने फांसी की सजा सुनाई थी। उस पर 7.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। देवेंद्र फौजी ने सजा-ए-मौत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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22 वर्ष पहले थाना कंपिल के हेड कांस्टेबल राम सेवक यादव ने 26 मार्च 2003 को कलुआ गैंग के 40 अज्ञात सदस्यों के खिलाफ डकैती और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में कलुआ गैंग के मुख्य सदस्य पीलीभीत के थाना बीसलपुर के गांव परनिया निवासी देवेंद्र कुमार, अमृतपुर निवासी धनपाल, शाहजहांपुर निवासी सोनपाल के नाम प्रकाश में आए। विवेचक ने तीनों के खिलाफ डकैती कर हत्या करने के मामले में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शैलेंद्र सचान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद देवेंद्र कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
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तीन पीएसी जवानों की हत्या में देवेंद्र को हो चुकी है फांसी की सजा
जिले के अलावा बदायूं, एटा और शाहजहांपुर में वर्षों तक कलुआ डकैत का आतंक रहा है। 19 वर्ष पहले कंपिल थानाक्षेत्र में डकैत कलुआ के साथी देवेंद्र फौजी ने तीन पुलिस कर्मियों सहित एक ग्रामीण की हत्या कर दी थी। मामले में देवेंद्र उर्फ फौजी को विशेष न्यायाधीश एंटी डकैती कृष्ण कुमार ने फांसी की सजा सुनाई थी। उस पर 7.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। देवेंद्र फौजी ने सजा-ए-मौत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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