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ज्योति मिश्रा हत्याकांड: घटनास्थल पर एक संदिग्ध की मिली मौजूदगी, कनेक्शन भी मिला, पुलिस जल्द करेगी पूछताछ
Thu, 04 Nov 2021 02:26 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 04 Nov 2021 02:26 PM IST
सार
पुलिस अफसरों का कहना है कि केस बेहद पेचीदा है। आरोपी भले ही जेल भेजे जा चुके हों लेकिन उनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं। न ही हत्या का मोटिव स्पष्ट हो रहा है। यही वजह है कि पुलिस की तफ्तीश जारी है।
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ज्योति मिश्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महिला टेलीकॉलर ज्योति मिश्रा हत्याकांड में पुलिस को सर्विलांस की मदद से एक अहम सुराग हाथ लगा है। घटनास्थल पर उस रात वारदात की समयावधि में एक मोबाइल नंबर सक्रिय था। यह नंबर आरोपी या मृतका की सीडीआर में भी मिला है।
इससे पुलिस का शक इस पर गहरा गया है। पुलिस जल्द इस शख्स से पूछताछ करेगी। आशंका है कि यह वारदात के वक्त घटना स्थल पर मौजूद था। चकेरी गिरजा नगर निवासी ज्योति 25 सितंबर की शाम करीब सवा छह बजे दफ्तर से घर के लिए निकली थी लेकिन वह घर नहीं पहुंची थी।
26 सितंबर की सुबह भाभा नगर में रेलवे ट्रैक किनारे उसका अधजला शव पड़ा मिला था। पुलिस ने उसके परिचित अमित व उसकी महिला मित्र विमल को हत्या के केस में जेल भेजा था। मगर हत्याकांड की गुत्थी पुलिस सुलझा नहीं सकी है।
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सही आरोपी जेल भेजे गए हैं या वारदात के पीछे किसी अन्य का हाथ है, इसकी छानबीन पुलिस कर रही है। इस बीच सर्विलांस की टीम ने एक संदिग्ध मोबाइल नंबर निकाला है। घटना के वक्त घटनास्थल पर यह नंबर एक्टिव था।
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इससे पुलिस का शक इस पर गहरा गया है। पुलिस जल्द इस शख्स से पूछताछ करेगी। आशंका है कि यह वारदात के वक्त घटना स्थल पर मौजूद था। चकेरी गिरजा नगर निवासी ज्योति 25 सितंबर की शाम करीब सवा छह बजे दफ्तर से घर के लिए निकली थी लेकिन वह घर नहीं पहुंची थी।
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26 सितंबर की सुबह भाभा नगर में रेलवे ट्रैक किनारे उसका अधजला शव पड़ा मिला था। पुलिस ने उसके परिचित अमित व उसकी महिला मित्र विमल को हत्या के केस में जेल भेजा था। मगर हत्याकांड की गुत्थी पुलिस सुलझा नहीं सकी है।
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सही आरोपी जेल भेजे गए हैं या वारदात के पीछे किसी अन्य का हाथ है, इसकी छानबीन पुलिस कर रही है। इस बीच सर्विलांस की टीम ने एक संदिग्ध मोबाइल नंबर निकाला है। घटना के वक्त घटनास्थल पर यह नंबर एक्टिव था।
इसका घटना से कनेक्शन भी मिला है। हालांकि पुलिस ने अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि इस नंबर के संपर्क में आरोपी अमित था या मृतका। इस नंबर की विस्तृत सीडीआर पुलिस ने टेलीकॉम कंपनी से मंगवाई है।
किसी नतीजे पर नहीं पहुंची पुलिस
पुलिस अफसरों का कहना है कि केस बेहद पेचीदा है। आरोपी भले ही जेल भेजे जा चुके हों लेकिन उनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं। न ही हत्या का मोटिव स्पष्ट हो रहा है। यही वजह है कि पुलिस की तफ्तीश जारी है। पुलिस को आशंका है कि कहीं किसी तीसरे का हाथ तो नहीं है। तमाम सवाल अनसुलझे हैं।
किसी नतीजे पर नहीं पहुंची पुलिस
पुलिस अफसरों का कहना है कि केस बेहद पेचीदा है। आरोपी भले ही जेल भेजे जा चुके हों लेकिन उनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं। न ही हत्या का मोटिव स्पष्ट हो रहा है। यही वजह है कि पुलिस की तफ्तीश जारी है। पुलिस को आशंका है कि कहीं किसी तीसरे का हाथ तो नहीं है। तमाम सवाल अनसुलझे हैं।