मिलेगी राहत: पीपीपी मॉडल पर विकसित होगा झकरकटी बस अड़्डा, 143 करोड़ का बजट हो चुका है स्वीकृत, पढ़ें अपडेट
Kanpur News: पीपीपी मॉडल से विकसित होने जा रहा झकरकटी बस अड्डा सात मंजिला बनेगा। इसके लिए 143 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। साथ ही, मुख्यालय स्तर पर कंपनी का चयन हो रहा है।
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कानपुर में झकरकटी बस अड्डे में यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी है। बस अड्डे पर सात मंजिला बिल्डिंग बनाई जाएगी, जिसमें मॉल, रोडवेज कार्यालय, हॉल, पूछताछ केंद्र, वेटिंग रूम, फूड व किड्स जोन और अन्य सुविधाएं रहेंगी। यह विकास पीपीपी मॉडल पर होगा। कंपनी का चयन मुख्यालय स्तर पर किया जा रहा है। परिवहन विभाग की ओर से 143 करोड़ रुपये का बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका है।
झकरकटी बस अड्डे से रोजाना 1000-1100 बसों की आवाजाही होती है। यहां से बांदा, चित्रकूट, उरई, झांसी, कानपुर देहात, गोरखपुर, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, लखनऊ, दिल्ली, प्रयागराज आदि शहरों के लिए बसें संचालित हो रही हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश की रोडवेज बसें भी आती हैं। बस अड्डे पर मेट्रो कार्य के लिए कुछ हिस्सा अधिग्रहीत हो गया है। इससे बसों की पार्किंग की समस्या आ रही है। इसी के चलते बस अड्डे का पीपीपी मॉडल पर विकास कराने की तैयार है।
आरएम रोडवेज अनिल कुमार ने बताया कि झकरकटी बस अड्डे का पूरा स्वरूप बदल जाएगा। यहां कई तरह की सुविधाएं रहेंगी। सात मंजिला बिल्डिंग में दो अंडरग्राउंड होंगे, जिसमें कई तरह की सुविधाएं रहेंगी। यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधित सहूलियत देने के लिए क्लीनिक भी बनेगा। यह क्लीनिक निजी अस्पताल द्वारा संचालित किया जाएगा। एक हिस्सा मॉल के रूप में तैयार किया जा सकता है।
बड़ी स्क्रीन पर दिखाई देगी बसों की लोकेशन
बस अड्डे पर जल्द ही बसों की लोकेशन बड़ी स्क्रीन पर दिखाई देगी। बसों में जीपीएस लगाया जा रहा है। इस स्क्रीन के माध्यम से यात्रियों को बसों की सही स्थिति का पता लग सकेगा।
बस अड्डे के किनारे लगेंगे शेड
बस अड्डे के किनारे की ओर शेड लगाए जाएंगे। यहां पर विभिन्न रूटों की बसें आकर खड़ी होंगी। लंबी रूट की बसों को अलग और पास की रूट की बसों के लिए अलग अलग शेड तैयार किए जाएंगे। परिवहन अधिकारियों की लखनऊ, कानपुर देहात और दिल्ली जाने वाली ज्यादातर बसों को गीन्स सिटी बस अड्डे से संचालित करने की तैयारी है। हालांकि अभी ग्रीन्स सिटी बस अड्डे से गिनती के ही लोग जा रहे हैं।