सेंट्रल बैंक के लॉकरों से करोड़ों के गहने चोरी: व्यापारियों संग पुलिस कमिश्नर से मिले पीड़ित, क्राइम ब्रांच को जांच
उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि पुलिस निर्धारित समय (चार दिन) में खुलासा नहीं करती है तो उनका प्रतिनिधि मंडल सीएम और वित्त मंत्री से मिलने जाएगा।
विस्तार
कानपुर में कराची खाना स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकरों से ग्राहकों के करोड़ों के गहने चोरी होने की वारदात के बाद बुधवार को कानपुर उद्योग व्यापार मंडल के तत्वावधान में पीड़ित ग्राहकों ने पुलिस से मिलकर जल्द खुलासे की मांग की। व्यापारियों ने उन्हें एक मांगपत्र सौंपते हुए बैंक के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया।
इस पर पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। इस बैंक में ज्यादातर खाते व्यापारियों और रिटायर्ड बैंक कर्मचारियों के ही हैं। इसे लेकर बुधवार को कानपुर उद्योग व्यापार मंडल भी पीड़ित ग्राहकों के पक्ष में उतर कर पुलिस कमिश्नर से मिलने पहुंचा। महामंत्री विनोद गुप्ता के साथ सभी पीड़ित ग्राहक भी पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। ग्राहकों ने उन्हें बताया कि बैंक लॉकर में उनके जीवन भर की जमा पूंजी थी। जिसे बरामद कराने की मांग की।
पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने पदाधिकारियों के सामने ही डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल को फोन कर जल्द खुलासे के लिए टीम लगाने के निर्देश दिए। दोपहर बाद क्राइम ब्रांच की चार सदस्यीय टीम बैंक पहुंची और कुछ औपचारिकताएं कर लौट गई। वहीं, मांग पत्र सौंपने वालों में विजय पंडित, टीकम सेठिया, शेष नारायण त्रिवेदी, राजेश गुप्ता, ईश्वर वर्मा, रोशन लाल, शीबू गुप्ता, सीपी ओमर, विजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।
अधिकारी के सामने बिलख पड़ीं मीना
मंगलवार को अपना खाता चेक करने पहुंचीं लाल बंगला निवासी मीना यादव के खाते से भी करीब 80 लाख के गहने गायब थे। वह पुलिस कमिश्नर के सामने बिलख पड़ीं। उन्होंने कहा कि बेटी की शादी के गहने, मां, बहन के गहने भी उन्हीं के लॉकर में रखे थे, जिन्हें चोरी कर लिया गया। साथ मौजूद अन्य महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला।
सीएम और वित्त मंत्री से भी करेंगे मुलाकात
उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि यदि पुलिस निर्धारित समय (चार दिन) में खुलासा नहीं करती है तो उनका प्रतिनिधि मंडल सीएम और वित्त मंत्री से मिलने जाएगा। शहर भर के सभी बैंकों को बंद कराने के लिए सड़क पर उतर का आंदोलन करने को बाध्य होंगे।