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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: घंटा और घड़ियाल के उद्घोष से गूंजे मंदिर व घर, हर तरफ छाया उल्लास
Mon, 30 Aug 2021 07:26 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 30 Aug 2021 07:26 PM IST
सार
जेके मंदिर, सनातन मंदिर कौशलपुरी, राधा माधव मंदिर, इस्कॉन मंदिर आदि में भगवान का भव्य शृंगार कर महाआरती की गई। जेके मंदिर, इस्कॉन मंदिर के भक्तों को यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन दर्शन कराए गए।
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धूमधाम से मनाई गई जन्माष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रात 12 बजे कृष्ण का जन्म होते ही घरों और मंदिरों में घंटा और घड़ियाल बजने के साथ ही जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी... की गूंज सुनाई देने लगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व सोमवार को घरों व मंदिरों में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। कानपुर के मुख्य मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ऑनलाइन माध्यम से दिखाया गया।
घरों में लोगों ने झांकियां सजाई। झूले में विराजमान कर आरती उतारी गई। भगवान कृष्ण को माखन, मिश्री, मिठाई, पंचामृत आदि पकवान अर्पित कर भोग लगाया। घरों में छोटे-छोटे बच्चों को कृष्ण व राधा की तरह सजाया गया।
जेके मंदिर, सनातन मंदिर कौशलपुरी, राधा माधव मंदिर, इस्कॉन मंदिर आदि में भगवान का भव्य शृंगार कर महाआरती की गई। जेके मंदिर, इस्कॉन मंदिर के भक्तों को यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन दर्शन कराए गए।
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इस्कॉन मंदिर में 125 कलश से भगवान का अभिषेक किया गया। जेके मंदिर में शाम को धूप आरती कर भगवान को भोग अर्पित किया गया। आधी रात भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। ऑनलाइन माध्यम से मंदिर के कार्यक्रम में भक्त शामिल हुए। लोगों ने उन्हें जल, दूध, गाय का घी, दही, शहद, गुलाब जल और फिर जल से स्नान कराने के बाद चंदन का लेप लगाया।
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घरों में लोगों ने झांकियां सजाई। झूले में विराजमान कर आरती उतारी गई। भगवान कृष्ण को माखन, मिश्री, मिठाई, पंचामृत आदि पकवान अर्पित कर भोग लगाया। घरों में छोटे-छोटे बच्चों को कृष्ण व राधा की तरह सजाया गया।
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जेके मंदिर, सनातन मंदिर कौशलपुरी, राधा माधव मंदिर, इस्कॉन मंदिर आदि में भगवान का भव्य शृंगार कर महाआरती की गई। जेके मंदिर, इस्कॉन मंदिर के भक्तों को यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन दर्शन कराए गए।
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इस्कॉन मंदिर में 125 कलश से भगवान का अभिषेक किया गया। जेके मंदिर में शाम को धूप आरती कर भगवान को भोग अर्पित किया गया। आधी रात भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। ऑनलाइन माध्यम से मंदिर के कार्यक्रम में भक्त शामिल हुए। लोगों ने उन्हें जल, दूध, गाय का घी, दही, शहद, गुलाब जल और फिर जल से स्नान कराने के बाद चंदन का लेप लगाया।
इसके बाद वस्त्र पहनाकर, मोर मुकुट सिर पर सजाया। बांसुरी हाथ में पकड़ाकर झूले में विराजमान किए गए। यह नजारा देख सभी भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद घरों व मंदिरों में बधाई गीत गाए गए। इस मौके पर मंदिरों को फूलों से सजाया गया। घरों में लोगों ने झांकियों को सुंदर रूप देने के लिए कारागार का निर्माण कर उसमें कान्हा को बैठाया। देर रात तक मंदिरों में भगवान का गुणगान किया गया।
मोर पंख को पीले कपड़े में लपेट कर रखें
पं. आचार्य अमरेश मिश्रा ने बताया कि जो मोर पंख आपने कान्हा को चढ़ाया है, उसे पीले कपड़े में लपेट कर रखने से घर में सुख समृद्धि का वास होता है। ऐसे परिवार पर भगवान कृष्ण की कृपा हमेशा बनी रहती है। यह पंख परिवार के लिए कल्याणकारी साबित होता है।
मोर पंख को पीले कपड़े में लपेट कर रखें
पं. आचार्य अमरेश मिश्रा ने बताया कि जो मोर पंख आपने कान्हा को चढ़ाया है, उसे पीले कपड़े में लपेट कर रखने से घर में सुख समृद्धि का वास होता है। ऐसे परिवार पर भगवान कृष्ण की कृपा हमेशा बनी रहती है। यह पंख परिवार के लिए कल्याणकारी साबित होता है।