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शहर आईएसआई का पुराना गढ़, कई एजेंट दबोचे गए़

Thu, 19 Jan 2017 09:59 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 19 Jan 2017 09:59 AM IST
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ISI city fortress, several agents were arrested
आईएसआई के कई एजेंट दबोचे गए
कानपुर शहर आईएसआई का पुराना गढ़ रहा है। आईएसआई के स्लीपिंग माड्यूल कानपुर और आसपास के शहरों में सक्रिय रहकर संवेदनशील स्थानों की रेकी कर चुकी है। इसके बाद छोटी-छोटी तमाम वारदातें को अंजाम देने का प्रयास किया। हालांकि हर बार साजिश नाकाम कर दी गई। एटीएस और एसटीएफ ने शहर में छिपकर रेकी कर वाले आईएसआई के कई एजेंटों को दबोचा था। इनके पास से चकेरी एयरपोर्ट का नक्शा और सेना के मूवमेंट से जुड़े दस्तावेज मिले थे। पकड़े गए यह एजेंट जेल में बंद हैं। मंगलवार को बिहार के मोतिहारी में पकड़े गए एक आईएसआई के एजेंट ने कबूला है कि पुखरायां रेल हादसे की साजिश नेपाल में बैठे आकाओं ने की थी।
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एटीएस ने रेलबाजार से आईएसआई एजेंट फैजुल रहमान, बिठूर से वकास और सचेंडी से इम्तियाज, बाबूपुरवा से मुन्ना पाकिस्तानी को पकड़ा था। मुन्ना बाबूपुरवा थाने के निकट जूस बेचता था। यहीं रहकर रक्षा प्रतिष्ठानों, रेलवे ट्रैक, सैन्य क्षेत्रों की जैसे महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर सूचनाएं पाकिस्तान में बैठे आकाओं को भेजता था। वकास के पास चकेरी एयरपोर्ट का नक्शा, सेना के मूवमेंट से जुड़े दस्तावेज मिले थे, जो उसने आईएसआई अफसरों को भेजे थे। फैजुल रहमान और इम्तियाज ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां पाकिस्तान और दूसरे देशों में बैठे आकाओं को भेजने की बात कबूली थी। खुफिया सूत्रों का कहना है कि आईएसआई स्लीपिंग माडयूल्स से जरिए सूचनाएं एकत्रित करता है। इसके बाद दूसरी विंग को अगला टास्क सौंपता है। आर्य नगर में प्रेशर कुकर और घंटाघर में साइकिल में बम फटने के मामले में भी आईएसआई का नाम आया था।
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यूपी एटीएस ने दिया था इनपुट
नेपाल के बारा में दो लोगों की हत्या के बाद यूपी एटीएस के हाथ कुछ संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबर हाथ लगे थे। इन मोबाइल नंबरों को एटीएस ने मोतिहारी (बिहार) पुलिस से शेयर किया था। इसी आधार पर बिहार पुलिस ने तीनों आरोपियों को दबोचा है।
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कानपुर और आसपास हुए हादसे 
-2015 में फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा होते बचा था। प्लेटफार्म नंबर 1 स्थित पार्सल हाउस में एक टाइमर बम मिला था। बम की घड़ी चल रही थी। बम को डिफ्यूज करने के लिए कानपुर से पीएसी की एंटी बॉम्ब स्क्वैड पहुंची थी। उस बम में 330 ग्राम बारूद के साथ 10 छडें, दो पीवीसी पाइप, नौ वोल्ट की दो बैट्री, तीन रेडियो ट्रांसफार्मर मिले थे। बॉम्ब स्क्वैड के अधिकारियों ने बताया था कि दो बमों को एक साथ जोड़ कर बड़ा नुकसान करने की योजना थी। अगर विस्फोट होता तो 100 मीटर के इलाके में  खासा नुकसान हो सकता था।
-इससे एक दिन पहले लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में प्रयाग-बरेली पैसेंजर टूटे ट्रैक से गुजर कर मोहनलालगंज स्टेशन से कुछ पहले खुद-ब-खुद रुक गई थी। इस कारण बड़ा हादसा टल गया था। रेलवे अधिकारियों की जांच में पता चला था कि किसी ने पटरी को काट दिया था।

सिमी की भूमिका थी संदिग्ध
- 2014-2015 के बीच मोहनलालगंज क्षेत्र में ऐसे कई संदिग्ध ट्रेन हादसे हुए थे। तत्कालीन डीजी रेलवे जावीद अहमद (जो बाद में डीजीपी भी रहे) ने सभी मामले यूपी एटीएस को सौंप दिए थे। लेकिन एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वैड) अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
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