नई खोज! बीटी बैंगन व कॉटन के बाद अब बीटी असरहर-चना
- आईआईपीआर देश का पहला संस्थान बना
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बीटी तकनीक पर पिछले 20 साल से शोध चल रहा था। अब जाकर इसमें सफलता मिली है। बस अब फील्ड ट्रायल करने की तैयारी है। ऐसा हुआ तो अरहर, चना की फसल को रोग मुक्त कर दिया जाएगा। जो फली छेदक फसलों को 100 फीसदी तक नष्ट कर देती है, उसे बाहर कर दिया जाएगा।
क्या है बीटी
बीटी एक बैक्टीरिया का नाम है। यह मिट्टी में पाया जाता है। इसके जीन नुकसानदायक कीड़ों को मारते हैं। बीटी का ही जीन क्राई वन एसी को पौधों में डाला जाता है। ये जीन केमिकल बनाकर कीड़ों को मार देते हैं। जीन ट्रांसफर से फसलों में कम केमिकल का प्रयोग करना पड़ेगा।
अरहर का हाइब्रिड बीज
आईआईपीआर के विज्ञानियों ने अरहर की हाइब्रिड प्रजाति (आईपीएच 9-5) विकसित कर ली है। इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है। मई 2017 तक प्रजाति रिलीज होगी, फिर अरहर के प्रति हेक्टेयर क्षेत्रफल में पैदावार 5-8 कुंतल बढ़ जाएगी। 8-10 की जगह 15-18 कुंतल फसल पैदा की जा सकेगी। इसकी बुआई जून में की जा सकती है। फसल 140-145 दिन में पक जाएगी। देश के किसी भी हिस्से में बुआई की जा सकेगी। खास बात यह है कि इस अरहर के बाद गेहूं की फसल भी ली जा सकेगी।
मीठी होगी हरी मटर
आईआईपीआर के विज्ञानियों ने हरी मटर की मीठी प्रजाति विकसित की है। इस मटर को सुखाकर रखा जाए, फिर पानी में भिगोकर सामान्य मटर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। केमिकल का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा। इसकी बुआई अक्तूबर-नवंबर में की जा सकती है। आईआईपीआर से बीज प्राप्त किए जा सकते हैं। फसल 120 दिन में पक जाएगी। प्रति हेक्टेयर पैदावार 10-12 कुंतल है।
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