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kanpur coronavirus: रोगियों में समूह प्रतिरोधक क्षमता के संकेत, ऐसे में हो सकता कोरोना का खात्मा
Sat, 11 Apr 2020 02:10 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 11 Apr 2020 02:10 PM IST
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कानपुर कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर के हैलट और सीएचसी सरसौल में भर्ती रोगियों में कोरोना के लक्षण न उभरने पर चिकित्सा विज्ञानियों को यह संकेत मिलने लगा है कि और भी साइलेंट कैरियर हो सकते हैं जिनकी स्क्रीनिंग न होने से पता नहीं चल सका। इसके साथ ही यह स्थिति समूह प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्युनिटी) विकसित होने के भी संकेत दे रही है।
अगर समूह प्रतिरोधक क्षमता होने लगी तो कोरोना का खात्मा हो जाएगा। लोगों को संक्रमण तो होगा लेकिन पता ही नहीं चलेगा और वे खुद ठीक हो जाएंगे। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जमातियों की जांच न होती तो पता ही नहीं चलता कि वे कोरोना के रोगी हैं। उनमें कोई लक्षण ही नहीं हैं। इसी तरह और भी लोग हो सकते हैं।
कुछ लोग संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो गए होंगे। जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. देव सिंह का कहना है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अगर मजबूत हो तो पता भी नहीं चलता और रोगी ठीक हो सकता है। जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उन्हीं के लिए यह घातक हो सकता है। शहर में मिले कोरोना के 11 रोगियों का अध्ययन फिलहाल नजीर के तौर पर किया जा रहा है।
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अगर समूह प्रतिरोधक क्षमता होने लगी तो कोरोना का खात्मा हो जाएगा। लोगों को संक्रमण तो होगा लेकिन पता ही नहीं चलेगा और वे खुद ठीक हो जाएंगे। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जमातियों की जांच न होती तो पता ही नहीं चलता कि वे कोरोना के रोगी हैं। उनमें कोई लक्षण ही नहीं हैं। इसी तरह और भी लोग हो सकते हैं।
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कुछ लोग संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो गए होंगे। जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. देव सिंह का कहना है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अगर मजबूत हो तो पता भी नहीं चलता और रोगी ठीक हो सकता है। जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उन्हीं के लिए यह घातक हो सकता है। शहर में मिले कोरोना के 11 रोगियों का अध्ययन फिलहाल नजीर के तौर पर किया जा रहा है।
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सरसौल सीएचसी के प्रभारी डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि अभी रोगियों में कोई लक्षण नहीं हैं। 14 दिन पूरे होने के बाद सैंपल जांच के लिए फिर भेजे जाएंगे। उनका कहना है कि रोगियों की इम्युनिटी मजबूत है। वहीं, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि जनरल स्क्रीनिंग होने पर ही साइलेंट कैरियर का पता चलेगा।
लेकिन इससे हर्ड इम्युनिटी हो जाती है। शरीर में एंटी बॉडीज होने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। माइक्रो बायोलॉजी विभाग में जांच शुरू होने पर एंटी बॉडीज का अध्ययन किया जाएगा।
इसे कहते हैं हर्ड इम्युनिटी
जब बहुत सारे लोगों को किसी मर्ज का संक्रमण हो जाता है तो उसे समूह प्रतिरोधक क्षमता या हर्ड इम्युनिटी कहते हैं। इसे नेचुरल वैक्सीनेशन भी कहा जाता है। इससे रोग सामान्य जुकाम-बुखार की तरह होता है, वह घातक नहीं हो पाता।
लेकिन इससे हर्ड इम्युनिटी हो जाती है। शरीर में एंटी बॉडीज होने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। माइक्रो बायोलॉजी विभाग में जांच शुरू होने पर एंटी बॉडीज का अध्ययन किया जाएगा।
इसे कहते हैं हर्ड इम्युनिटी
जब बहुत सारे लोगों को किसी मर्ज का संक्रमण हो जाता है तो उसे समूह प्रतिरोधक क्षमता या हर्ड इम्युनिटी कहते हैं। इसे नेचुरल वैक्सीनेशन भी कहा जाता है। इससे रोग सामान्य जुकाम-बुखार की तरह होता है, वह घातक नहीं हो पाता।