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निजी अस्पतालों में कोविड रोगी के इलाज का खर्च छह गुना, डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ को देनी पड़ती है फीस

Mon, 20 Jul 2020 01:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 20 Jul 2020 01:06 PM IST
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In private hospitals, the cost of treatment of Covid patient is six times
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
सामान्य रोगी की तुलना में कोरोना संक्रमित का इलाज करने में निजी अस्पतालों का छह गुना अधिक खर्च आ रहा है। बताया जा रहा है कि इसी वजह से निजी अस्पताल कोरोना रोगियों को भर्ती करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन की बैठकों में नर्सिंगहोमों से लगातार कोविड रोगियों का इलाज शुरू करने के लिए कहा जा रहा है।
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शासन स्तर पर भी निजी क्षेत्र के डॉक्टरों से इस संबंध में सहयोग की अपेक्षा की जाती है। निजी क्षेत्र के अस्पताल संचालकों का कहना है कि संसाधनों पर खर्च करने के साथ ही डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को अतिरिक्त कोविड सर्विस चार्ज देना पड़ता है। कानपुर नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एमके सरावगी का कहना है कि स्टाफ की ड्यूटी तीन चरणों में होती है।
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हर शिफ्ट के स्टाफ को पीपीई किट देनी पड़ती है। पीपीई किट आठ सौ से हजार रुपये के बीच होती है। एक बार इस्तेमाल होने के बाद इसे फेंक दिया जाता है। इसके साथ ही रोगी को हर बार छूने पर ग्लब्ज और एन-95 मॉक्स देने पड़ते हैं। संक्रमण से बचाव को केमिकल का छिड़काव कराया जाता है। इससे खर्च छह से सात गुना बढ़ जाता है।

स्टाफ को अतिरिक्त इंसेंटिव देना होता है। स्टाफ घर नहीं जाता। स्टाफ को क्वॉरंटीन करने के लिए होटल या अलग भवन लेना पड़ता है। खाने-पीने का खर्च उठाना पड़ता है। क्वॉरंटीन पीरियड का भी वेेतन देना पड़ता है। इस वजह से कोई नर्सिंगहोम संचालक जल्दी तैयार नहीं होता है। अभी तक शहर के चार निजी अस्पताल ही कोविड रोगियों को भर्ती कर रहे हैं।

डॉक्टरों के हेल्थ इंश्योरेंस कराए जाएं
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. रीता मित्तल का कहना है कि डॉक्टरों के हेेल्थ इंश्योरेंस कराए जाएं। डॉक्टर अगर पॉजिटिव होंगे तो उनका इलाज कहां होगा? इसके साथ ही निजी अस्पतालों को कॉमर्शियल रेट पर टैक्स देना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों को बिजली, पानी, प्रदूषण आदि की दिक्कत नहीं होती है लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में कई टैक्स लगते हैं। स्टाफ संक्रमित होने पर उसका भुगतान अस्पताल करता है। कुल मिलाकर अस्पताल पर बहुत खर्च आ जाता है। इसके लिए सरकार सहूलियतें दे।
 
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