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1000 करोड़ की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 21 Feb 2015 02:48 AM IST
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शहर की 1000 करोड़ रुपये की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा है। इसका खुलासा जिला प्रशासन की गोपनीय जांच-पड़ताल से हुआ है। अब डीएम डॉ. रोशन जैकब ने अवैध कब्जेदारों को नोटिस दिया है। डीएम ने कहा है कि तीन दिन के अंदर अवैध कब्जे वाली सरकारी जमीन खुद ही खाली कर दी जाए।
ऐसा नहीं हुआ तो कब्जेदारों को भूमाफिया करार दिया जाएगा। गुंडाएक्ट की कार्रवाई करके जिला बदर किया जाएगा। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से बड़े-बड़ों की चूलें हिल सकती हैं। क्योंकि अवैध कब्जे की ज्यादातर नजूल भूमि पॉश इलाकों में है।
कब्जेदार भी हाई प्रोफाइल हैं। लैंड बैंक (भूमि) की कमी से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इससे चिंतित डीएम ने शहर की नजूल भूमि और कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के अंतर्गत आने वाली भूमि का सर्वे कराया।
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एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह को प्रभारी बनाकर भूमि से संबंधित पूरी रिपोर्ट भी तलब की गई। एक महीने के सर्वेक्षण के बाद शुक्रवार को जो रिपोर्ट सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। शहरी क्षेत्र ूमें ही नजूल की 7 लाख 14 हजार स्क्वायर मीटर भूमि पर अवैध कब्जा है।
इसकी कीमत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की आंकी गई है। 5 लाख 3 हजार स्क्वायर मीटर भूमि खाली पड़ी है। इसमें से 20 हजार स्क्वायर मीटर भूमि पर भी छोटे-मोटे कब्जे हैं। अवैध पट्टेदार जमे हुए हैं। सदर तहसील क्षेत्र से संबंधित शहरी क्षेत्र में ही नजूल की 12 लाख 19 हजार स्क्वायर मीटर भूमि है।
इसमें से आधे से ज्यादा पर कब्जा है। केडीए के 210 गांवों की जमीनें भी शहरी क्षेत्र में आती हैं। इनकी खरीद-बिक्री डीएम सर्किल रेट से होती है। एडीएम फाइनेंस ने बताया कि केडीए में निहित 174 गांवों की जांच रिपोर्ट मिली है। इन गांवों में 7000 हेक्टेयर ग्राम समाज की भूमि है।
इसमें से 772 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा है। इस जमीन की कीमत भी 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की आंकी गई है। अवैध कब्जे की पूरी सूचना आ गई है। तीन दिन बाद केडीए और जिला प्रशासन का संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। यदि अवैध कब्जा खुद नहीं छोड़ा गया तो उसे ढहाया जाएगा।
साथ ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की वजह से ही गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए तमाम सरकारी योजनाआें की लांचिंग फंसी है। कब्जा हटते ही सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाएगा।
यह पहला मौका है, जब अवैध कब्जे की सही सूचना सामने आई है। इस बार किसी को बख्शा नहीं जाएगा। कोई भी अवैध कब्जेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी।
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ऐसा नहीं हुआ तो कब्जेदारों को भूमाफिया करार दिया जाएगा। गुंडाएक्ट की कार्रवाई करके जिला बदर किया जाएगा। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से बड़े-बड़ों की चूलें हिल सकती हैं। क्योंकि अवैध कब्जे की ज्यादातर नजूल भूमि पॉश इलाकों में है।
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कब्जेदार भी हाई प्रोफाइल हैं। लैंड बैंक (भूमि) की कमी से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इससे चिंतित डीएम ने शहर की नजूल भूमि और कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के अंतर्गत आने वाली भूमि का सर्वे कराया।
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एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह को प्रभारी बनाकर भूमि से संबंधित पूरी रिपोर्ट भी तलब की गई। एक महीने के सर्वेक्षण के बाद शुक्रवार को जो रिपोर्ट सामने आई है, वह चौंकाने वाली है। शहरी क्षेत्र ूमें ही नजूल की 7 लाख 14 हजार स्क्वायर मीटर भूमि पर अवैध कब्जा है।
इसकी कीमत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की आंकी गई है। 5 लाख 3 हजार स्क्वायर मीटर भूमि खाली पड़ी है। इसमें से 20 हजार स्क्वायर मीटर भूमि पर भी छोटे-मोटे कब्जे हैं। अवैध पट्टेदार जमे हुए हैं। सदर तहसील क्षेत्र से संबंधित शहरी क्षेत्र में ही नजूल की 12 लाख 19 हजार स्क्वायर मीटर भूमि है।
इसमें से आधे से ज्यादा पर कब्जा है। केडीए के 210 गांवों की जमीनें भी शहरी क्षेत्र में आती हैं। इनकी खरीद-बिक्री डीएम सर्किल रेट से होती है। एडीएम फाइनेंस ने बताया कि केडीए में निहित 174 गांवों की जांच रिपोर्ट मिली है। इन गांवों में 7000 हेक्टेयर ग्राम समाज की भूमि है।
इसमें से 772 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा है। इस जमीन की कीमत भी 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की आंकी गई है। अवैध कब्जे की पूरी सूचना आ गई है। तीन दिन बाद केडीए और जिला प्रशासन का संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। यदि अवैध कब्जा खुद नहीं छोड़ा गया तो उसे ढहाया जाएगा।
साथ ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की वजह से ही गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए तमाम सरकारी योजनाआें की लांचिंग फंसी है। कब्जा हटते ही सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाएगा।
यह पहला मौका है, जब अवैध कब्जे की सही सूचना सामने आई है। इस बार किसी को बख्शा नहीं जाएगा। कोई भी अवैध कब्जेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी।