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Kanpur: दिसंबर से मार्केट में आएगा आईआईटी का मुंह परीक्षक, एक मिनट में होगी ओरल कैंसर की जांच
Wed, 02 Oct 2024 08:46 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 02 Oct 2024 08:46 PM IST
सार
Kanpur News: दिसंबर से मार्केट में आईआईटी का मुंह परीक्षक आएगा। शहर की कंपनी ब्रशनुमा उपकरण तैयार करेगी। जिससे एक मिनट में ओरल कैंसर की जांच होगी।
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वार्ता के दौरान प्रो. जयंत के मुंह की जांच करते छात्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईआईटी कानपुर की ओर से विकसित किए गए मुंह परीक्षक उपकरण से शुरुआती चरण में ही मुंह के कैंसर की जानकारी मिल सकेगी। यह उपकरण दिसंबर तक मार्केट में आ जाएगा। इससे एक मिनट के भीतर मुंह की जांच कर ओरल कैंसर की जानकारी मिल सकेगी। आईआईटी ने इस तकनीक का हस्तांतरण शहर की कंपनी को किया है, जो ब्रशनुमा उपकरण तैयार करेगी। इसको केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. जयंत कुमार सिंह व उनकी टीम ने विकसित किया है। यह एक पोर्टेबल उपकरण है।
आईआईटी कानपुर ने शहर के करीब 3000 लोगों पर इस उपकरण का परीक्षण भी किया है। इसमें फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों से लेकर स्कूलों, अस्पतालों, संस्थानों के लोगों को भी शामिल किया गया है। प्रो. जयंत ने बताया कि मुंह का कैंसर अगर शुरुआती चरण में ही पता चल जाए तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। ज्यादातर लोगों को दूसरे या तीसरे चरण में ही इसका पता चल पाता है।
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आईआईटी कानपुर ने शहर के करीब 3000 लोगों पर इस उपकरण का परीक्षण भी किया है। इसमें फैक्टरी में काम करने वाले मजदूरों से लेकर स्कूलों, अस्पतालों, संस्थानों के लोगों को भी शामिल किया गया है। प्रो. जयंत ने बताया कि मुंह का कैंसर अगर शुरुआती चरण में ही पता चल जाए तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। ज्यादातर लोगों को दूसरे या तीसरे चरण में ही इसका पता चल पाता है।
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प्रो. जयंत कुमार सिंह ने बताया कि मुंह परीक्षक एक सामान्य उपकरण है, जिसमें सफेद और प्रतिदीप्ति प्रकाश स्रोत हैं, जो स्मार्टफोन, टैबलेट, आईपैड आदि से वायरलेस तरीके से जुड़ता है। डिवाइस पावर बैकअप के साथ ट्रैकिंग के लिए स्वास्थ्य हिस्ट्री एकत्र रहती है। यह उपकरण क्लीनिकल सेटिंग्स में 90 फीसदी सटीकता के साथ त्वरित और दर्द रहित जांच करता है। यह सुरक्षित और विकिरण-मुक्त है। इसमें किसी अतिरिक्त रसायन या प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है।
यह कैंसर टिश्यू और सामान्य टिश्यू में अंतर बताता है। दाएं-बाएं गाल, तालू और जीभ का भी परीक्षण करता है। जिसकी मदद से मरीज सही समय पर इलाज कराकर बीमारी को कम कर सकता है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस उपकरण को ब्रश की तरह विकसित किया है।
दो लाख रुपये तक हो सकती है कीमत
इस डिवाइस की कीमत एक से दो लाख रुपये के बीच होगी। इसमें लगने वाले उपकरणों को आयात करना पड़ा जिससे इसकी कीमत बढ़ी है। हालांकि एक डिवाइस से पांच लाख तक मरीजों की जांच हो सकती है। प्रो. जयंत ने बताया कि दिसंबर तक यह मार्केट में उपलब्ध होगी।
इस डिवाइस की कीमत एक से दो लाख रुपये के बीच होगी। इसमें लगने वाले उपकरणों को आयात करना पड़ा जिससे इसकी कीमत बढ़ी है। हालांकि एक डिवाइस से पांच लाख तक मरीजों की जांच हो सकती है। प्रो. जयंत ने बताया कि दिसंबर तक यह मार्केट में उपलब्ध होगी।