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आईआईटी पहुंचे होनहार
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Thu, 21 Jul 2016 12:41 AM IST
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छात्रा प्रज्ञाना को आईआईटी छोड़ने आए परिजन।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) और बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) में एडमिशन लेने वाले 827 स्टूडेंट बुधवार को आईआईटी कैंपस पहुंच गए। सबको हॉस्टल दिया गया। साथ ही बताया गया कि गुरुवार को ओरिएंटेशन प्रोग्राम होगा। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना सुबह 10 बजे स्टूडेंटों से बात करेंगे। दोपहर 1 बजे से स्टूडेंटों के माता-पिता की काउंसलिंग की जाएगी। सबसे कहा जाएगा कि स्टूडेंटों पर अच्छा करने या ज्यादा मार्क्स लाने का दबाव न डालें। आईआईटी के स्टूडेंटों की पढ़ाई 27 जुलाई से कराई जाएगी।
देश की श्रेष्ठ आईआईटी से बीटेक और बीएस करने का सपना संजोए अलग-अलग राज्यों के स्टूडेंट अपने माता-पिता के साथ कैंपस पहुंचे। काउंसलिंग प्रभारी प्रो. एमके घोराई और स्टूडेंट कोआर्डिनेटर ने जूनियरों का स्वागत किया। शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया। हॉस्टल आवंटन और कमरों तक सामान पहुंचाने में मदद की। आईआईटी कैंपस की हरियाली, लैब, लाइब्रेरी और क्लास रूम देखकर आईआईटीयंस गदगद दिखे। लगा कि सपनों को पंख मिल गए हैं। जो कह रहे हैं आज मैं ऊपर आसमां नीचे। स्टूडेंटों ने कहा कि आईआईटी कानपुर की उपलब्धि के बारे में जो सुना, पढ़ा था, उससे कहीं ज्यादा देखने को मिला है। जेईई एडवांस में 113वीं रैंक हासिल करके सिटी टॉपर बने प्रवरदीप सिंह, 120वीं रैंक पाने वाले विभोर गुप्ता और थर्ड टॉपर गगनदीप भी परिवार के साथ हॉस्टल पहुंचे। एससी कोटे से ऑल इंडिया में 5वीं रैंक हासिल करने वाले शशि कुमार और पनकी के अंकित ने भी रिपोर्टिंग कर दी है।
डर के आगे जीत है
कैंपस पहुंचे स्टूडेंट मायूस थे लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा बरकरार रहा। सबने कहा कि माता-पिता का सपना जरूर पूरा करेंगे। बीएस में एडमिशन लेने वाली भोपाल की अनामिका ने कहा विज्ञानी बनने का सपना पूरा करूंगी। बीटेक एयरोस्पेस की मंसरगुन कौर ने कहा यहां कुछ डरे जरूर पर डर के आगे ही जीत है।
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कश्मीरी छात्रों को मोहलत
आईआईटी में 15-20 कश्मीर के स्टूडेंटों को भी एडमिशन मिला है। लेकिन वहां चल रहे बवाल के चलते स्टूडेंट अभी आ नहीं पाए हैं। आईआईटी प्रशासन ने उन्हें 2७ जुलाई तक की मोहलत दी है।
नए अम्मा-बाबू मिले
माता-पिता और परिवार के साथ आए स्टूडेंटों को आईआईटी कैंपस में दाखिल होते ही नए अम्मा-बाबू मिल गए। यह अम्मा-बाबू कोई और नहीं बल्कि कैंपस के ही सीनियर स्टूडेंट हैं। सीनियर गर्ल्स स्टूडेंट को अम्मा व सीनियर ब्वायज स्टूडेंट को बाबू नाम दिया गया है।
साइकिल की बिक्री, नीलामी भी
आईआईटी कैंपस में आए तमाम स्टूडेंटोें ने साइकिल भी खरीदी। 2500 से लेकर 5000 तक की साइकिल थी। वहीं, नीलामी से पुरानी साइकिल खरीदने का भी विकल्प है। इसके अलावा हॉस्टल में खुली दुकानोें से बेड, बाल्टी, बेड शीट खरीदे। 350 से लेकर 2680 रुपये के गद्दे बिके।
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देश की श्रेष्ठ आईआईटी से बीटेक और बीएस करने का सपना संजोए अलग-अलग राज्यों के स्टूडेंट अपने माता-पिता के साथ कैंपस पहुंचे। काउंसलिंग प्रभारी प्रो. एमके घोराई और स्टूडेंट कोआर्डिनेटर ने जूनियरों का स्वागत किया। शैक्षिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया। हॉस्टल आवंटन और कमरों तक सामान पहुंचाने में मदद की। आईआईटी कैंपस की हरियाली, लैब, लाइब्रेरी और क्लास रूम देखकर आईआईटीयंस गदगद दिखे। लगा कि सपनों को पंख मिल गए हैं। जो कह रहे हैं आज मैं ऊपर आसमां नीचे। स्टूडेंटों ने कहा कि आईआईटी कानपुर की उपलब्धि के बारे में जो सुना, पढ़ा था, उससे कहीं ज्यादा देखने को मिला है। जेईई एडवांस में 113वीं रैंक हासिल करके सिटी टॉपर बने प्रवरदीप सिंह, 120वीं रैंक पाने वाले विभोर गुप्ता और थर्ड टॉपर गगनदीप भी परिवार के साथ हॉस्टल पहुंचे। एससी कोटे से ऑल इंडिया में 5वीं रैंक हासिल करने वाले शशि कुमार और पनकी के अंकित ने भी रिपोर्टिंग कर दी है।
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डर के आगे जीत है
कैंपस पहुंचे स्टूडेंट मायूस थे लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा बरकरार रहा। सबने कहा कि माता-पिता का सपना जरूर पूरा करेंगे। बीएस में एडमिशन लेने वाली भोपाल की अनामिका ने कहा विज्ञानी बनने का सपना पूरा करूंगी। बीटेक एयरोस्पेस की मंसरगुन कौर ने कहा यहां कुछ डरे जरूर पर डर के आगे ही जीत है।
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कश्मीरी छात्रों को मोहलत
आईआईटी में 15-20 कश्मीर के स्टूडेंटों को भी एडमिशन मिला है। लेकिन वहां चल रहे बवाल के चलते स्टूडेंट अभी आ नहीं पाए हैं। आईआईटी प्रशासन ने उन्हें 2७ जुलाई तक की मोहलत दी है।
नए अम्मा-बाबू मिले
माता-पिता और परिवार के साथ आए स्टूडेंटों को आईआईटी कैंपस में दाखिल होते ही नए अम्मा-बाबू मिल गए। यह अम्मा-बाबू कोई और नहीं बल्कि कैंपस के ही सीनियर स्टूडेंट हैं। सीनियर गर्ल्स स्टूडेंट को अम्मा व सीनियर ब्वायज स्टूडेंट को बाबू नाम दिया गया है।
साइकिल की बिक्री, नीलामी भी
आईआईटी कैंपस में आए तमाम स्टूडेंटोें ने साइकिल भी खरीदी। 2500 से लेकर 5000 तक की साइकिल थी। वहीं, नीलामी से पुरानी साइकिल खरीदने का भी विकल्प है। इसके अलावा हॉस्टल में खुली दुकानोें से बेड, बाल्टी, बेड शीट खरीदे। 350 से लेकर 2680 रुपये के गद्दे बिके।