{"_id":"40141e410a2ea2e4e465c128879383b3","slug":"holi-in-kanpur-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज कंपू मा होरी र रसिया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज कंपू मा होरी र रसिया
अमर उजाला कानपुर
Updated Fri, 06 Mar 2015 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नरेंद्र मोदी
अभी मुड़ाया ही था सर पर ओले थे जल्दी में, मैं भाषण भोगी घाटी में ले कूद गया हल्दी में, यूं कर स्वच्छ मिशन अब मैने पश्चाताप किया है, झाडू़ ले अपने हाथों में दिल्ली ही साफ किया है।
-
अरविंद केजरीवाल
एक बुजुर्ग की भूख भुनाकर अनशन की आंधी में, पानी तो भर डाला मैंने उफनाती नांदी में, खड़ी फसल, बिजली-पानी की चरने पे ऐठूंगा, अगर किसी ने रोका तो फिर धरने पे बैठूंगा।
-
मनमोहन सिंह
केवल यस कहना सीखा है नो मैं कभी न करता, अगर न दिग्गी अय्यर होते, गो मैं कभी न करता, सिर्फ उजागर मुझको यही घोटाला करना है। होली पे बस मुझको इनका मूं काला करना है।
विज्ञापन
-
राहुल गांधी
रंग चढ़े न उनपे, उनसे खुशियां कर लें कुट्टी, बात-बात पे मुझे प्रियंका की देते जो घुट्टी, सुनता कोई नही मुझको, चीख रहा हूं। बाबा हूं अज्ञातवास में रहना सीख रहा हूं
-
श्रीप्रकाश जायसवाल
शिलान्यास कर करके मैंने खूब लगवाए पत्थर, काम किसी का नहीं किया पर खोले रखा दफ्तर, जो भी आई सिफारिश उस पर बस चिट्ठी लिख बैठा, लेकिन मतदाता अच्छे दिन के भ्रम में बिक बैठा। दोबारा नीलामी की तिथि बैठे ताड़ रहा हूं, अब ठंडाई भट्ठी से मैं कोयला झाड़ रहा हूं
---------
डा. मुरली मनोहर जोशी
दिखलाए जो आंख उसे तत्काल वहीं डाटूंगा, सोच रहा था मंत्रालय में कुर्सी मैं बाटूंगा, पर अफसोस मेरे अपनों ने ही मेरा घर भेदा, मेरे मूं पर पोत दिया है मोदी ब्रांड सफेदा
-
देवेंद्र सिंह भोले
बड़े-बड़े सुरमा जब रण में ताकत तौल रहे थे, मैं भोला मेरे अंग-अंग डोल रहे थे, युक्ति कहां से टिकट मिलेगी, राज मुझे मिल बैठा, बिल्ली के छींके से सर पे ताज मुझे मिल बैठा, ताज पहनकर उम्मीदों की होली खेल रहा हूं, चढ़ी कढ़ाई देख यतन से पूड़ी बेल रहा हूं
विज्ञापन
अभी मुड़ाया ही था सर पर ओले थे जल्दी में, मैं भाषण भोगी घाटी में ले कूद गया हल्दी में, यूं कर स्वच्छ मिशन अब मैने पश्चाताप किया है, झाडू़ ले अपने हाथों में दिल्ली ही साफ किया है।
-
अरविंद केजरीवाल
एक बुजुर्ग की भूख भुनाकर अनशन की आंधी में, पानी तो भर डाला मैंने उफनाती नांदी में, खड़ी फसल, बिजली-पानी की चरने पे ऐठूंगा, अगर किसी ने रोका तो फिर धरने पे बैठूंगा।
विज्ञापन
-
मनमोहन सिंह
केवल यस कहना सीखा है नो मैं कभी न करता, अगर न दिग्गी अय्यर होते, गो मैं कभी न करता, सिर्फ उजागर मुझको यही घोटाला करना है। होली पे बस मुझको इनका मूं काला करना है।
विज्ञापन
-
राहुल गांधी
रंग चढ़े न उनपे, उनसे खुशियां कर लें कुट्टी, बात-बात पे मुझे प्रियंका की देते जो घुट्टी, सुनता कोई नही मुझको, चीख रहा हूं। बाबा हूं अज्ञातवास में रहना सीख रहा हूं
-
श्रीप्रकाश जायसवाल
शिलान्यास कर करके मैंने खूब लगवाए पत्थर, काम किसी का नहीं किया पर खोले रखा दफ्तर, जो भी आई सिफारिश उस पर बस चिट्ठी लिख बैठा, लेकिन मतदाता अच्छे दिन के भ्रम में बिक बैठा। दोबारा नीलामी की तिथि बैठे ताड़ रहा हूं, अब ठंडाई भट्ठी से मैं कोयला झाड़ रहा हूं
---------
डा. मुरली मनोहर जोशी
दिखलाए जो आंख उसे तत्काल वहीं डाटूंगा, सोच रहा था मंत्रालय में कुर्सी मैं बाटूंगा, पर अफसोस मेरे अपनों ने ही मेरा घर भेदा, मेरे मूं पर पोत दिया है मोदी ब्रांड सफेदा
-
देवेंद्र सिंह भोले
बड़े-बड़े सुरमा जब रण में ताकत तौल रहे थे, मैं भोला मेरे अंग-अंग डोल रहे थे, युक्ति कहां से टिकट मिलेगी, राज मुझे मिल बैठा, बिल्ली के छींके से सर पे ताज मुझे मिल बैठा, ताज पहनकर उम्मीदों की होली खेल रहा हूं, चढ़ी कढ़ाई देख यतन से पूड़ी बेल रहा हूं