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Holi 2022: आज रात 12:57 के बाद होगा होलिका दहन, इस मंत्र का जाप करते हुए करें परिक्रमा
Thu, 17 Mar 2022 11:30 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 17 Mar 2022 11:30 AM IST
सार
रात के समय होलिका दहन करने के लिए शुभ समय 12:58 बजे से लेकर रात 2:12 बजे तक है। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी।
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होलिका
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
होलिका दहन 17 मार्च को होगा। इस बार फाल्गुनी नक्षत्र में यह पर्व पड़ रहा है। रात 12:57 तक भद्रा रहेगी। इसके बाद ही होलिका दहन होगा। यह जानकारी आचार्य अमरेश मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि धर्म ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है।
दहन के समय ऊं होलिकाय नम: मंत्र का जाप करते हुए 11 परिक्रमा करें। नए अन्न की आहुतियां दें। शनिदोष से मुक्त होने के लिए काले धागे को सात बार पैर के अंगूठे से सिर तक नापकर होली में डालें। पं. पवन तिवारी ने बताया कि भद्रा योग को शास्त्रों में अशुभ माना गया है क्योंकि भद्रा के स्वामी यमराज होते हैं।
भद्रा का योग दोपहर डेढ़ बजे से रात एक बजे तक रहेगा। शाम में गोधूलि बेला के समय भद्रा का प्रभाव होने से होलिका दहन नहीं किया जा सकेगा। पं. गौरव तिवारी ने बताया कि 18 मार्च को उदयकालीन तिथि रहेगी। इस तिथि में होली खेली जाएगी।
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स्नान-दान और पूजा-पाठ के लिए ये दिन शुभ रहता है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन वृद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ही ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। होलिका दहन को नवविवाहिता, गर्भवती महिला और इस वर्ष बनी मां को नहीं देखना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य स्वाति सक्सेना ने बताया कि रात के समय होलिका दहन करने के लिए शुभ समय 12:58 बजे से लेकर रात 2:12 बजे तक है। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित पीएन द्विवेदी ने बताया कि ऊं होलिकाय नम: का जाप करते हुए रात 12:57 बजे के बाद होलिका दहन करें।
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दहन के समय ऊं होलिकाय नम: मंत्र का जाप करते हुए 11 परिक्रमा करें। नए अन्न की आहुतियां दें। शनिदोष से मुक्त होने के लिए काले धागे को सात बार पैर के अंगूठे से सिर तक नापकर होली में डालें। पं. पवन तिवारी ने बताया कि भद्रा योग को शास्त्रों में अशुभ माना गया है क्योंकि भद्रा के स्वामी यमराज होते हैं।
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भद्रा का योग दोपहर डेढ़ बजे से रात एक बजे तक रहेगा। शाम में गोधूलि बेला के समय भद्रा का प्रभाव होने से होलिका दहन नहीं किया जा सकेगा। पं. गौरव तिवारी ने बताया कि 18 मार्च को उदयकालीन तिथि रहेगी। इस तिथि में होली खेली जाएगी।
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स्नान-दान और पूजा-पाठ के लिए ये दिन शुभ रहता है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन वृद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ही ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। होलिका दहन को नवविवाहिता, गर्भवती महिला और इस वर्ष बनी मां को नहीं देखना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य स्वाति सक्सेना ने बताया कि रात के समय होलिका दहन करने के लिए शुभ समय 12:58 बजे से लेकर रात 2:12 बजे तक है। इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी। ज्योतिषाचार्य पंडित पीएन द्विवेदी ने बताया कि ऊं होलिकाय नम: का जाप करते हुए रात 12:57 बजे के बाद होलिका दहन करें।