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हिंदी हैं हम: आप जिंदा कहां हैं, जो मर जाएंगे, प्रसिद्ध कवि डॉ. अंसार कंबरी ने वर्तमान हालातों पर कसा तंज

Sun, 15 Aug 2021 09:36 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 15 Aug 2021 09:36 AM IST
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Hindi Hain Hum: famous poet Dr. Ansar Kambri took a dig at the current situation
अमर उजाल कवि सम्मेलन - फोटो : amar ujala
पूछो न हम किधर जाएंगे, थक गए हैं बहुत अपने घर जाएंगे। मौत के डर से नहक (बेवजह) परेशान हैं, आप जिंदा कहां हैं, जो मर जाएंगे। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत शनिवार को फजलगंज स्थित कार्यालय में हुई काव्य संध्या में प्रसिद्ध कवि डॉ. अंसार कंबरी ने जब ये पंक्तियां सुनाईं हॉल वाहवाह से गूंज उठा। इसके अलावा उन्होंने अमर उजाला की तारीफ में भी कसीदे पढ़े।
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कहा ‘अमर उजाला तो बहुत अच्छा है अखबार, हिंदी हैं हम हैं कह रहा, मां से करता प्यार’। डॉ. कंबरी ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता भी की। कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि श्रवण शुक्ल ने कहा हमारे अंतस में हमारी मातृ भाषा हिंदी विद्यमान है। हम अंग्रेजी भाषा चाहे जितनी पढ़ लें, फिर भी आम बोलचाल की भाषा में हिंदी का ही उच्चारण करते हैं। कवि अमित तोमर ने सुनाया ‘हम प्यार करें हिंदी में, करें तकरार हिंदी में, अगर कोई भूल हमसे हो, उसे स्वीकार करें हिंदी में।
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इसके पहले कार्यक्रम का शुभारंभ शीतल वाजपेयी ने सरस्वती वंदना आप मेरी वंदना स्वीकार करो मां... से किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘तृष्णा में पावन आधार नहीं होता, मद को संयम पर अधिकार नहीं होता’ सुनाकर तालियां बटोरी। इसी तरह नीरज नीलेश ने सुनाया ‘शब्द मौन हो चले, नैनो ने जब बात की, स्पर्श बेमानी हुआ, जब मन ने मुलाकात की’।
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अल्का मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस को याद करते हुए कहा ‘जाते-जाते एक कहानी दे गया, सबकी आंखों में वो पानी दे गया’। नूरैन फैजाबादी ने कहा ‘मादरे हिंद तेरे कदमों में सजदा करते हैं। वेद प्रकाश शुक्ल संजर ने सुनाया ‘हर चीज है गर्दिश में, मौजे भी कनारा भी, मल्लाह भी कश्ती भी साथी भी सहारा भी’।

श्रवण शुक्ल व्यंग ने सुनाया कि जले हुए खाने में मैंने ढूंढ लिया स्वाद आखिर, मगर ये हुनर भी मिला काफी बेइज्जती के बाद’। कवि मुकेश ने सुनाया कि हिय में सिय को रखने वाले, पीपल के पर्ण हमी में हैं। अंजना कुमार ने सुनाया ‘पीठ पर खंजर जो भोंकने को तैयार बैठे हैं, सब अपने ही हैं, जो तैयार बैठे हैं’। वर्तमान के हालात पर संजय शर्मा ने तंज कसा।

मुरली परिहार ने ‘धर्म अलग, भाषा अलग, अलग परिवेश सुनाकर आजादी की याद दिलाई। नूपुर राही ने ‘नहीं ये चीन, अमरीका नहीं जापान की मिट्टी, हमारे तन से लिपटी है ये हिंदुस्तान की मिट्टी सुनाकर माहौल में जोश भरा। इस मौके पर निशित शर्मा, मुर्तजा खान, शशांक दीक्षित, भानू प्रताप सिंह सम्राट, अंकुर श्रीवास्तव, दीप मिश्रा, प्रभाकर श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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