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मंदी से टायर इंडस्ट्री का चक्का जाम, औसतन 20 से 40 करोड़ रुपये महीने की बिक्री हुई कम

Tue, 03 Sep 2019 04:37 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 03 Sep 2019 04:37 PM IST
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Heavy losses in tire industry due to recession
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
ऑटो सेक्टर में मंदी से सिर्फ वाहनों की बिक्री में ही गिरावट नहीं आई है बल्कि टायर इंडस्ट्री भी संकट के दौर से गुजर रही है। यह संकट कोई एक दो महीने से नहीं, बल्कि बीते एक वर्ष से चला आ रहा है। ट्रांसपोर्टरों को भाड़ा कम मिलने से उनके चक्कर कम हो गए हैं। ट्रक कम चल रहे हैं, इसलिए टायर कम घिस रहे हैं। हालत ये है कि दिन में 50 से 100 टायर बेचने वालों को 20-30 टायरों की बिक्री से संतोष करना पड़ रहा है।
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टायर कंपनियों के लिए कानपुर बड़ा बाजार है। यहां एमआरएफ, सीएट, अपोलो और जेके समेत आठ से 10 कंपनियों के प्रदेश स्तरीय सेल्स ऑफिस हैं। हर महीने सिर्फ कानपुर भर में एक लाख छोटे बड़े टायरों की बिक्री होती है। करीब एक हजार करोड़ का सालाना टर्नओवर है। कानपुर में टायर डीलरों की संख्या करीब 125 है।
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टायर कंपनियों के स्थानीय अधिकारी बताते हैं आर्डर कम होने की वजह से मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। कंपनी के संविदा कर्मियों की छुट्टी कर दी है। इन्हें बरसात बाद संपर्क करने को कहा गया है। दरअसल जनवरी से अब तक हर महीने 20 से 40 करोड़ रुपये की बिक्री कम हो रही है। कई डीलरों को शोरूम के खर्चे निकालना मुश्किल पड़ रहा है।
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रेटिंग एजेंसी ने भी जताई मंदी की आहट 
देश की रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने भी मंदी के आसार जता दिए हैं। एजेंसी के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में डिमांड में कमी आने के चलते टायर इंडस्ट्री की अनुमानित राजस्व बढ़ोतरी दर में तीन से चार फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। जबकि 2020 से 2024 तक टायर इंडस्ट्री में राजस्व बढ़ोतरी दर छह से आठ फीसद रहने का अनुमान जताया गया था। ऐसे में ऑटो इंडस्ट्री में अस्थायी रूप से काम कर रहे लोगों की छंटनी का असर अब टायर इंडस्ट्री पर भी पड़ सकता है। 

कारोबारी बोले 
एक साल पहले दोपहर में खाना खाने की फुरसत नहीं मिलती थी। अब इतनी फुरसत है कि ऊब होती है। यह सब मंदी का असर है। ग्राहक पता नहीं कहां लापता हो गया है। दिन में 20-25 टायर बिक जाएं तो बड़ी बात। 
- महेश केसवानी, सुपर किंग टायर एजेंसी, जरीब चौकी

गिट्टी मौरंग का काम बरसात की वजह से बंद है। मंदी की वजह से फैक्ट्रियों से माल के परिवहन के आर्डर नहीं मिल रहे। शहर के हजारों ट्रक खड़े हैं। जाहिर है कि टायर इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ा है। 
- केसी शर्मा, संरक्षक, यूपी मोटर्स ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन

फैक्ट फाइल
13,00000 कुल वाहन हैं शहर में
7,00,000 बाइकें
3,00,000 कारें
2,50,000 लोडर, टैंपो
20,000 ट्रक

एक वर्ष पहले कारोबार हर महीने (औसत)
15,000 हैवी टायरों की बिक्री 
40,000 बाइक के टायरों की बिक्री 
40,000 लोडर, टैंपो, कार के टायरों की बिक्री
80-100 करोड़ रुपये की है औसत बिक्री

वर्तमान स्थिति (औसत)
10,000 हैवी टायरों की बिक्री 
30,000 बाइक के टायरों की बिक्री 
35,000 लोडर, टैंपो, कार के टायरों की बिक्री
60-80 करोड़ रुपये की है औसत बिक्री
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